-सुसंस्कृति परिहार
डाक्टर राममनोहर लोहिया ने कहा था जब सड़कें सूनी होती हैं तो संसद आवारा हो जाती है। यह नारा देने वाले और संसद से लेकर सड़क तक लोक चेतना की अलख जगाने वाले लोहिया आज बहुत याद आ रहे हैं। आज यह नज़ारा देखने मिल रहा है। अच्छी बात यह है कि प्रतिपक्ष के सांसदों के साथ जनता भी सड़क पर उतर आईं हैं।
बहुत लंबा अंतराल हो गया जब कोई बड़ा जन अभियान देश में देखने नहीं मिला।किसान आंदोलन बेशक बड़ा आंदोलन था लेकिन उसमें आमजन की उपस्थिति कम रही इसलिए वह अवाम का आंदोलन होते हुए भी किसान आंदोलन तक केन्द्रित रह गया।इसी वजह से सरकार ने उसे कामयाब नही होने दिया।
लोग 2011 में कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ अन्ना आंदोलन के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन जिसे जन लोकपाल विधेयक आंदोलन मानते हैं कहा जाता है इससे प्रभावित होकर लोगों ने 2014 में कांग्रेस सरकार को सत्ताच्युत कर दिया। जी हां यह एक जन आंदोलन मान सकते हैं जिसमें संघी ताकतों ने मिलकर भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ा। कांग्रेस ने ना खंडन किया और ना प्रमाण मांगे। मनमोहन जी अपने कार्यक्रमों में चुपचाप लगे रहे।उस समय सरकार आत्मविज्ञापनों को महत्व नहीं देती थी। इसलिए संघी झूठे प्रचार और राम आसरे सत्ता तक पहुंच गए।यह आंदोलन जनता को भ्रमित कर संचालित हुआ।बाद के वर्षों में उनके ही राज में जो भी आरोप लगाए गए थे वे कोर्ट ने खारिज कर दिए।जिस भ्रष्टाचार विरोधी जन लोकपाल विधेयक की बात हुई वह लापता हो गया। उल्टे भ्रष्टाचारी यहां आकर पावन हो गए।अबाध गति से भ्रष्टाचार चला गिरते पुल,गिरते विमान,पानी झरते स्कूल, अस्पताल नया संसद भवन,टूटती वंदे भारत वगैरह में नज़र आता है।
लेकिन जो होना था वह हुआ । मनुवादी संविधान के मुताबिक देश में काम हुए।नाम परिवर्तन से शुरू इस सरकार ने भारतीय गंगा जमुनी संस्कृति को तोड़ने नफ़रत का जहर घोलना शुरू किया। हिंदू वोट के ध्रुवीकरण ने संविधान की धज्जियां उड़ाई। साम दाम दंड भेद की मनुवादी संस्कृति के अनुरूप रात दिन चुनाव अभियान जारी रखा यह दिखावा था ,वास्तविकता तो यह थी यह ईवीएम और वोट चोरी को छुपाने की एक गहरी साज़िश के तहत हो रहा था। जिसने देश की जनता के मौलिक अधिकार छीनने के साथ साथ उनके वोट की चोरी जैसा लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ काम किया।
आज यह चोरी प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने कड़ी मशक्कत के बाद जब जनता के सामने रखी हैं तो जनता अवाक रह गई।यह सच वह जानती थी किन्तु उसको कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। क्योंकि सरकार के ख़िलाफ़ बोलने लिखनेवाले कवि,लेखक, पत्रकार कार्टूनिस्ट और नेताओं के ख़िलाफ़ सरकार का रवैया ठीक नहीं था।जन आंदोलनों पर प्रतिबंध था।ऐसी स्थिति में जब मय प्रमाणों के साथ राहुल गांधी ने आवाज़ उठाई तो सारा देश वोट चोर गद्दी छोड़ के नारे से गूंज उठा।आज तो लगभग हर प्रदेश से वोट चोरी की और आयोग की खामियों की शिकायतें आती जा रही है। यह किसी बड़े सरकार विरोधी जनांदोलन की शुरूआत लग रही है।यह आंदोलन इसलिए प्रभावी हो रहा है क्योंकि राहुल ने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया है। उन्हें निडर नेता मिल गया है और वे सब अपने आपको निडर मान आंदोलन प्रदर्शन में शामिल होने लगे हैं।अब तक दहशत के साए में जीते रहे लोगों को नई आवाज़ मिली है।
दूसरी तरफ़ वोट चोरों की गैंग पलायन करने की फ़िराक में है। पूर्व चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के बारे में ख़बरें मिल रहीं हैं कि वे देश छोड़कर माल्टा की नागरिकता ले लिए हैं।
इस समय देश की सरकार एक के बाद एक नए नए आरोपों से घिरती चली जा रही है।उसे लगभग देश विदेश सब जगह से मात ही मिल रही है।वह मातम में गोते लगा रही है। सावधान रहिए कहीं लुटेरे फ़कीर झोला उठाकर निकल ना लें। जनांदोलन की ताकत अकूत होती है।वह चाहे तो अपने मनोनुकूल काम कराने वाली सरकार गिरा भी सकती है और बना भी सकती है।डरो मत को यदि राहुल गांधी की तरह अपना आदर्श वाक्य बना लें।




