-सुसंस्कृति परिहार
कभी कभी इन भाजपाईयों पर हंसी आती है कि इनके दिलो दिमाग में कभी भी देश की अवाम की समस्याओं के हल की कोई सार्थक बात नहीं आती है। इन्हें तो उठते बैठते महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी ,सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी के ऐसी बातें सामने लाते हैं जिनके पीछे कहीं लेशमात्र सचाई नहीं होती। प्रियंका को शायद इसलिए छोड़ दिया जाता है क्योंकि उनकी हाज़िर जवाबी ग़ज़ब की है। आजकल ज़ोर शोर महात्मा गांधी जी के नाम को ऐप्सटीन फाइल से जोड़ा जा रहा है। बोलने वाले सुधांशु डूब मरो महात्मा गांधी जी सन् 1948 में एक संघी द्वारा मार दिए जाते हैं जबकि जेफ्री ऐप्सटीन का जन्म 1953 में हुआ है। कुछ करनी करतूत नहीं तो अंट शंट बोलते जाते हो। झूठ का ऐसा तमाशा उस देश में हो रहा है जहां सत्यमेव जयते और सत्यं शिवम् सुंदरम को महत्व दिया जाता रहा है।एक तरफ सत्यवादी हरिश्चंद्र और सत्य के पुजारी महात्मा गांधी है तो दूसरी तरफ़ झूठों का सबसे बड़ा दल इस वक्त सत्ता पर काबिज है।जिसके पुरखे संघी हैं जिन्हें आज अमेरिका अपने दोस्त भारत को बेन लगाने की बात कह रहा है। देखिए सरेंडर पीएम अमल करता है या नहीं क्योंकि उसके पास पूरा कैरियर ताप लेने का माद्दा है। वहीं ईरान देश की अवाम की कद्र करते हुए सत्ता चलाने वालों से नाखुश है।होना ही चाहिए आज अमेरिका इज़राइल की दोस्ती की वजह से भारत जैसे देश पर कई मुल्क उंगली उठा रहे हैं। रुस जैसे पुराने मित्र राष्ट्र ने भी भारत को सबक सिखाने की ठान ली है।खनिज तेल यदि देगा तो मनमाफिक वसूली भी करेगा।
बहरहाल ऐसी घृणित और बदबूदार राजनीति के बाद जब कुछ समझ नहीं आता तो भाजपा के नेता निशिकांत दुबे राहुल गांधी के छोटे पजामे पर तंज कसते हैं उन्हें कंगना रनौत के छोटे वस्त्र दिखाई नहीं देते। राहुल ट्राउज़र पहनते हैं। अपने बच्चों से पूछिये छोटा पेंट जिसे आप पायजामा कह रहे हैं समझ जाएंगे। वह क्रॉप्ड पैंट/ट्राउजर या एंकेल लेंथ पैंट। जिसे उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पहना था।
खैर इस नासमझी के बाद अब तो हद ही हो गई।भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने यह क्या कह दिया कि राहुल गांधी संसद भवन के बाहर पकौड़े खाते हैं चाय पीते हैं।इससे सांसद का अपमान होता है।तो तड़ीपार जी यह बताइए कि नेताओं या सांसदों का यह व्यवहार अनुचित है तो बताईए देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी भी तो ग्वालियर में दूकान पर जाकर मिठाईयां चाव से खाते रहे। उससे देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा आहत नहीं हुई। वर्तमान प्रधानमंत्री जी मतदान की लाईन में खड़े होकर कमल का फूल दिखाते हैं तब अपमान नहीं होता या समुद्र किनारे नाटकीय तौर कचरा समेटते फोटो खिंचवाते हैं।
तो भाजपाईयों, देश के आम लोगों के बीच वही छप्पन इंची नेता जा पाता है जो निडर हो जिसे अपने लोगो से प्यार हो।आपके नेता तो इतने सुरक्षित घेरे में रहते हैं कि उनके दीदार भी मुश्किल से हो पाता है।वजह साफ़ है जो कायर है वहीं आम लोगों के बीच नहीं जा पाएगा। गुनहगारों को हर पल ख़तरा रहता है और उसे शायद और जो जनता से वोट लेने के बाद पचास दिन का समय मांगता है और कहता है यदि वादे पूरे नहीं हुए तो जिस चौराहे पर बुलाया जाएगा वह आयेगा लेकिन वह दिन कभी नहीं आया ,क्योंकि ये झूठे डरपोक सावरकर जैसे वीर हैं। जिनकी बदौलत आज भारत जैसे महान देश को आज अपमान सहना पड़ रहा है।ये ओछी हरकतें निरंतर जारी है विदेशी समझ गए हैं देशवासी कब समझेंगे?






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