अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

संविधान के सवालों का जबाब दे सियासत

Share

पुष्पा गुप्ता

     ब्रिटेन की प्रसिद्ध संवाद संस्था बीबीसी ने एक के बाद एक दो डाक्यूमेंट्री फिल्में रिलीज़ कीं। उनमें गुजरात के 2002 के दंगों और बाद की घटनाओं को भी उजागर करते तब की नरेन्द्र मोदी सरकार की हुकूूमत को आलोचनात्मक नज़र से परखने का उद्दाम गूंथा।

      दोनों की सरकार समर्थक लाॅबी ने लानत मलामत की। सरकार ने पहली डाॅक्यूमेंट्री को प्रतिबंधित कर दिया। कहा झूठ और फरेब परोसा गया है। एक बंद हो चुके विवाद को जबरिया दुर्भावनासहित खोलने का दुस्साहस है।

      विवादित घटना में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोषमुक्त माना है। थोड़े दिनों बाद अमेरिका की व्यापार संबंधी निजी रिसर्च एजेंसी हिंडनबर्ग ने भारत के सबसे अमीर गौतम अडानी के संस्थानों के कई तरह के व्यापारिक और कानूनी उल्लंघनों तथा सरकारी शह का कच्चा चिट्ठा जगजाहिर कर दिया।

     नतीजतन अडानी के कारोबार को लाखों डाॅलर का धक्का लगा। वे दुनिया के तीसरे क्रम के अमीरों से नीचे खिसककर 22 वें नंबर पर आंके गए। अडानी को स्टेट बैंक और जीवन बीमा निगम सहित अन्य सरकारी स्त्रोतों से धन कबाड़ने का आरोपी कहा गया।

      अडानी को बिना केन्द्र सरकार की शह, मंजूरी या अनदेखी के लगभग खैरात जैसा धन नहीं दिया जा सकता था। एकजुट सभी विरोधी दलों ने संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग पर सरकार की रज़ामंदी के लिए सियासती जंग छेड़ दी। केन्द्र सरकार की चुप्पी पूरे मामले को रहस्यमय बनाती रही। तीसरा हंगामा बरपा हुआ।

       यहूदी मूल के अमेरिकी अरबपति जाॅर्ज सोरोस ने अंबानी प्रकरण को लेकर एक शिखर सम्मेलन में कई वित्तीय अनियमितताओं के खुलकर आरोप लगाए। प्रधानमंत्री को उद्योगपति को संरक्षण देने के कारण राजनीतिक निष्ठा के पाठ पढ़ाने की कोशिश की।

      केन्द्र सरकार और भाजपा ने इसका कड़ा प्रतिवाद किया। मंत्री स्मृति ईरानी ने ऐसे करतबों को भारत की सार्वभौमिकता के खिलाफ हमला और साजिश करार दिया। बीबीसी और हिंडनबर्ग मामले में कांग्रेस ने केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री को घेरने में कोर कसर बाकी नहीं रखी, लेकिन जाॅर्ज सोरोस के आरोपों को लेकर भारत की सार्वभौमिकता पर हमले का मिथक खड़ा करने कांग्रेस सहायक भूमिका में आकर उद्योगपति की लानत मालमत करने में एकजुट हो गई। 

प्रश्न राजनीतिक शुचिता, ईमानदारी, प्रामाणिकता, जवाबदेही और सार्वजनिकता का तो है। लेकिन दुनिया के सबसे बहुसंख्यक और पके हुए लोकतंत्र में विदेशी किसी कथित छानबीन या राय के आधार पर आरोप लगाते हैं तो उसकी बेअनुपात प्रतिक्रिया करने का संविधान कहां आग्रह करता है?

      बीबीसी डाॅक्यूमेंट्री चुक गए कानूनी कारतूस की तरह यदि दुबारा हमलावर कोशिश है। तो संविधान फुसफुसाता तो है कि भारत में भी ऐसी फिल्म दिखाई जाने से अभिव्यक्ति की आज़ादी का छाता उसे क्यों नहीं पनाह दे सकता?

      भारत में विदेशी को भी अभिव्यक्ति और वाक् स्वातंत्र्य की आज़ादी के साथ अनुच्छेद 21 के तहत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता से विधि की स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को उद्योगपति अडानी के खिलाफ होने से अनुच्छेद 19 के उल्लंघन के नाम पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

      गौतम अडानी चाहें तो अमेरिकी अदालत में हिंडनबर्ग के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही करें। अडानी पर आरोप या नरेन्द्र मोदी पर सुरक्षा देने का आरोप होने से संविधान की हेठी नहीं होती। जाॅर्ज सोरोस निजी व्यक्ति को अमेरिकी संविधान में अभिव्यक्ति की आज़ादी है।

      उन्होंने अडानी की आड़ लेते मोदी पर भी आरोप लगा दिया तो सार्वभौमिकता पर भूचाल मानने की क्या संवैधानिकता है। पूरा देश कमर कसकर ऐसी आवाज़ों की मुश्कें बांधने की ज़रूरत क्यों महसूस करे? पानी का बुलबुला यूं ही फूट जाता है। जाॅर्ज सोरोस! उसे मूसलाधार बारिश क्यों समझा जाए? क्या आपदा में चुनावी अवसर खोजने के लिए! 

महान लेखक बोरिस पास्तरनाक की सोवियत रूस में उनकी कृति डा. जिवागो को प्रतिबंधित करने को लेकर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने साहित्य अकादमी के अध्यक्ष की हैसियत में शायद खु्रश्चेव को लिखकर सजा से रियायत देने आग्रह किया था।

      शंकर गुहा नियोगी और अरुंधति राॅय जैसे कई प्रकरणों में दुनिया के मशहूर चिंतक नाॅम चाॅम्स्की सहित सैकड़ों लेखकों, बुद्धिजीवियों ने सरकारों और सुप्रीम कोर्ट तक की आलोचना करने से परहेज़ नहीं किया। उनमें नोबेल पुरस्कार विजेता अमत्य सेन जैसे विश्व प्रसिद्ध भारतीय भी हैं।

       भारतीय आज़ादी के बाद युवा समाजवादी नेता डा. राममनोहर लोहिया ने रंगभेद की नीति के खिलाफ अमेरिका में सक्रिय सड़क आंदोलन में शिकरत करते जेल यातना भुगती थी। तब महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था डा. लोहिया से मिलने से महसूस होता है एक मनुष्य से मिला हूं।

     आज़ादी की लड़ाई के दौरान गांधी को अमेरिकी राष्ट्रपति ने राजनीतिक स्तर पर मदद देने पहल की थी। गांधी ने नहीं कहा आप विदेशी होकर भारतीय मामलों में दखल मत दीजिए। उन्होंने चतुराई से कहा हम अपने मामले खुद हल कर लेंगे। अपनी अमेरिका यात्रा में विवेकानन्द ने भी अमेरिकी श्रमिकों के शोषण का मामला खुले जलसों में उठाया था।

       भारत और नेपाल के बीच आंदोलनों में शिरकत का पारस्परिक इतिहास है। समाजवादी नेताओं जयप्रकाश और लोहिया के नेपाल और नेपाल से विश्वेश्वर प्रसाद कोइराला के भारत आने की आंदोलनकारी घटनाएं रही हैं। उन्नीसवीं सदी में इंग्लैंड के विश्व प्रसिद्ध कवि लाॅर्ड बायरन सांस्कृतिक प्रतिबद्धता के कारण अन्य देश यूनान में हमलावर तुर्की के खिलाफ युद्ध मैदान में खेत रहे।

       गांधी 22 साल तक भारतीय नागरिक रहते दक्षिण अफ्रीका में अंगरेज़ सरकार के खिलाफ इतिहास के आंदोलनकारी हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में प्रधानमंत्री रहते मोदी ने भी तो ‘अब की बार ट्रम्प सरकार‘ का नारा बुलन्द किया था। जो बाइडेन तो नहीं बिफरे। 

अभिव्यक्ति की नागरिक आज़ादी का लोकतांत्रिक विस्तार वैश्विक है। नागरिक आवाज़ को राष्ट्रीयता की बन्दिशों का हवाला देते गला नहीं घोंट दिया जा सकता। अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग जूनियर, अफ्रीका में नेल्सन मंडेला और म्यामांर में आन सांग सू की घोषित तौर पर गांधीवादी सत्याग्रह के सिपाही रहे हैं।

      भारत की अप्रत्यक्ष प्रतिरोध की भूमिका रही है। भारत ने नेल्सन मंडेला को भारत रत्न का खिताब दिया। स्वाधीनता आंदोलन तथा क्रांति में शिरकत करने के कारण विवेकानन्द ने अपनी ही सहयोगी सिस्टर निवेदिता को रामकृष्ण मिशन के कामों से बेदखल तक कर दिया था।

      कोई विवादास्पद फिल्म या रिपोर्ट भी रिलीज़ करे या उद्योगपति नेता सम्बन्धों पर आरोप लगाए। तो लोक व्यवहार में ऐसे आरोप अनदेखी या उपेक्षा के लायक हैं। उन्हें तूल देना गैरआनुपातिक है। आरोप प्रत्यारोप 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट बैंक पर अपनी अपनी पकड़ बनाते मकसद लगें, तो लोकतंत्र में चुनाव की गणित मतलबपरस्त होती है।

       संविधान का आकाश व्यापक और अनंत है। संविधान के रहते नेता और अन्य लोग अपनी सहूलियत का आचरण करते उसे जनमानस के गले क्यों उतारते रहते हैं?

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें