भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ चीचली स्थित कुम्हार मोहल्ले में इन दिनों प्रदेश की दीवाली रोशन करने की तैयारियां जोरों पर हैं. हर साल की तरह यहां के कुम्हार मिट्टी के दीयों से रोशनी का संसार रचते हैं. आमतौर पर इस मोहल्ले में हर साल करीब 12 लाख दीये तैयार होते हैं लेकिन इस बार मौसम ने थोड़ी मुश्किल बढ़ा दी. ज्यादा बारिश की वजह से मिट्टी ठीक से सूख नहीं पाई और इस बार केवल 10 लाख दीये ही बन पाए हैं.
कुम्हारों ने कहा कि दीयों के लिए बैतूल के जंगलों से खास मुलायम और साफ चिकनी मिट्टी मंगवाई जाती है. दीये बनाने का काम मेहनत और समय मांगता है. मिट्टी लाना, उसे गूंथना, चाक पर आकार देना, धूप में सुखाना और फिर भट्ठी में पकाना, हर कदम पर कौशल और धैर्य चाहिए
मिट्टी से रोशनी तक का सफर
कुम्हारों के मुताबिक, दीयों के लिए बैतूल के जंगलों से खास मुलायम और साफ चिकनी मिट्टी मंगवाई जाती है. दीये बनाने का काम मेहनत और समय दोनों मांगता है. मिट्टी लाना, गूंथना, चाक पर आकार देना, धूप में सुखाना और फिर भट्ठी में पकाना, हर कदम पर कौशल और धैर्य चाहिए. मगर इस साल मौसम के साथ-साथ बाजार के हालात ने भी उनकी मेहनत का मोल कम कर दिया है. फुटकर में एक दीया दो रुपये का और थोक में मात्र एक रुपये का बिक रहा है. पहले के मुकाबले प्रॉफिट मार्जिन काफी घट गया है. कुम्हार परिवारों का कहना है कि पहले जहां दीये बनाने का सीजन पूरे मोहल्ले में रौनक भर देता था, अब मॉल संस्कृति और ऑनलाइन शॉपिंग के कारण उनका धंधा मंदा पड़ गया है.
मॉल कल्चर न पड़ जाए भारी
लोग अब बाजारों से सजे-धजे बिजली के लैंप या सजावटी लाइटें खरीदने लगे हैं, जिससे पारंपरिक दीयों की मांग घट रही है लेकिन फिर भी बैरागढ़ चीचली के कुम्हार हिम्मत नहीं हारते. वे इस हुनर को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रहे हैं. बच्चों को चाक चलाना और मिट्टी से दीप बनाना सिखा रहे हैं. उनके लिए यह सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि परंपरा और संस्कृति की विरासत है.
घर की असली रोशनी मिट्टी से
दीवाली के मौके पर कुम्हारों की एक ही अपील है कि मिट्टी के दीये जरूर खरीदें ताकि हमारी मेहनत और परंपरा दोनों बची रहे. यह कहानी सिर्फ रोशनी की नहीं बल्कि उन हाथों की भी है, जो हर साल हमारे त्योहारों में उजाला भरते हैं. भोपाल में तैयार होने वाले दीयों की सप्लाई पूरे मध्य प्रदेश में होती है या यूं कहें कि इन दीयों की वजह से हमारा अजब-गजब एमपी दीवाली पर रोशन होता है.





