प्रेमसिंह सियाग
पावर प्लांट भी लगे हुए है
कोयला ढुलाई के लिए पर्याप्त रेलवे कोच भी है
कोयले के भंडार भी पर्याप्त है
फिर बिजली का संकट क्यों?
आपको यह सवाल बिल्कुल नहीं करना है!
आपको पुरानी लालटेन मिले तो साफ कर लें।अगर न मिले तो किसी दवाई की शीशी को धोकर उसमे केरोसिन भर लें व ढक्कन में छेद करके सूत की भाट सेट कर लें।
अगर गर्मी लग रही है तो हाथ से हिलाने वाली पंखी/बनी लें और हिलाकर हवा का आनंद लें।अगर हवा गर्म लग रही है झोंपड़ी के ऊपर दो-चार बाल्टी पानी उछाल दें।
टीवी को साफ करके कपड़ा ओढ़ा दें!हाँ जी न्यूज पर अब्दुल को टाइट होते हुए देखने का मलाल रहेगा लेकिन अगर पावर बैंक हो तो मोबाइल में देखकर ही लुत्फ ले सकते हो!
रेफ्रिजरेटर को खाली करके ढककर कोने में रख दें व उसके ऊपर अपनी शादी वाली तस्वीर रख दें ताकि भविष्य में जब पर्याप्त बिजली आएं तो फोटो देखकर याद आ जाएं कि दहेज में फ्रीज भी मिला था!
हाथ से चलाने वाली चक्की को धूल झाड़कर,धोकर तैयार कर लें!अनाज पीसते समय,चक्की को घुमाते हुए दिमाग मे एक बात घुसायें रखें कि हर राउंड से अब्दुल की चूड़ी टाइट होती जा रही है तो बिना थकान के ही यह काम होता जाएगा!
अगर बिना बिजली के पंप/मोटर से से पानी निकालने में परेशानी हो तो पुराने कुएं,जोहड़,तालाब का उपयोग शुरू करिये!वो तालाब में मेला,कुएं वाली पनघट!एकदम तनातन संस्कृति जीवित होती जाएगी!मन मे “रामराज्य”हिन्दू राष्ट्र”गुनगुनाते रहना है ताकि विश्वगुरु बनाने के प्रयास को बल मिलता रहे!
इस मिक्सी के चक्कर मे सिलबट्टे की चटनी का स्वाद व संस्कृति ही खत्म हो गई!
जब से बिलोने की मशीन आयी है तब से हमारी अति प्राचीन महान संस्कृति वाली मथानी, गिड़गिड़े आदि के बुरे दिन आ गए थे!
इस तरह का विमर्श गांव-गुहाड़ में शुरू कर दो बिजली का संकट छू-मंतर हो जाएगा!
एक ही बात ध्यान रखनी है कि सरकारों से नहीं लड़ना है बल्कि बिजली संकट से लड़ना है!यह कार्य ऊपर बताए उपायों से किया जाना संभव है!
अगर सरकारों से लड़ने की कोशिश की तो कोयले की कमी के नाम पर आदिवासियों को उजाड़कर जंगलों को अडानी के हवाले कर दिया जाएगा और बिजली महंगी करके आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी!
आदिवासियों को उजाड़ने का पाप अपने माथे नहीं लेना है व हंगामा करके बिजली की दरें नहीं बढ़ानी है।ज्ञात रहे हमे सिर्फ और सिर्फ बिजली संकट से लड़ना है!
प्रेमसिंह सियाग





