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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में गर्भावस्था परीक्षण अत्यंत अपमानजनक आपराधिक कृत्य 

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रीवा । मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के गढ़सराय क्षेत्र में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के तहत सामूहिक विवाह से पहले लड़कियों के गर्भावस्था परीक्षण कराए जाने का मामले को नारी चेतना मंच ने अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक बताया है। यह गरीब जरूरतमंद परिवार की लड़कियों का सरासर अपमान है। देश में किसी भी लड़की के विवाह के समय गर्भावस्था परीक्षण नहीं होता है। शासन प्रशासन को केवल यह पता करना चाहिए कि वर वधु इस योजना का दुबारा लाभ तो नहीं ले रहे हैं। लड़कियों का विवाह पूर्व इस तरह का गर्भावस्था परीक्षण कराया जाना अपने आप में नारी समुदाय का क्रूर मजाक है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक तरफ नारी को लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी कहकर संबोधित करते हैं वहीं दूसरी तरफ उनकी प्रशासनिक व्यवस्था के दौरान शादी के समय लड़कियों को मिलने वाले ₹55000 के लिए गर्भावस्था परीक्षण कराकर अपमानित किया जाता है। नारी चेतना मंच के संयोजक अजय खरे , नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री मीरा पटेल, सुधा सिंह ने कहा है कि किसी भी शादी के दौरान लड़कियों का गर्भावस्था परीक्षण नहीं होता है। यह ज़रूर पता किया जाता है कि वर वधु की न्यूनतम आयु शादी योग्य और उनके बीच आपसी सहमति है। प्रशासन को यह भी देखना है कि इस योजना का लाभ उठा चुके शादीशुदा जोड़ों को दोबारा इसका लाभ नहीं मिल सके। कोई अपात्र लड़का लड़की को इस योजना का लाभ नहीं मिले। संबंधित छानबीन के दौरान गर्भावस्था परीक्षण या कौमार्य परीक्षण जैसी बातें अत्यंत आपत्तिजनक अपमानजनक एवं आपराधिक कृत्य हैं। जिस तरह लड़कों के बारे में जानकारी जुटाई जाती है कि उसकी पहले शादी तो नहीं हुई है ,उसी तरह लड़कियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जाती है। लेकिन क्या शादी से पहले लड़कों का किसी तरह का मेडिकल परीक्षण कराया जाता है जिस तरह से लड़कियों का गर्भावस्था परीक्षण या कौमार्य परीक्षण कराकर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। नारी चेतना मंच ने कहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को संबंधित अप्रिय घटना के लिए प्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों से क्षमा याचना करते हुए गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करना चाहिए।

डिंडोरी कन्या विवाह योजना में शादी से पहले कराया गया प्रेग्नेंसी टेस्ट

मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना विवादों में आ गई है। बताया जाता है कि सामूहिक विवाह से पहले युवतियों के स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने का मामला सामने आया है। इस योजना के लिए कई लोगों ने आवेदन किया था। लेकिन 219 जोड़ों को ही इसका लाभ मिल पाया है। प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने पर जोड़ों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए। कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे युवतियों की निजता का हनन बताया है। वहीं बीजेपी जांच को सही ठहराते नजर आ रही है।

जानकारी के मुताबिक यह आयोजन बजाग जनपद और करंजिया जनपद क्षेत्र के मध्य गाड़ासरई में आयोजित किया गया था। बजाग जनपद क्षेत्र की ग्राम बछरगांव निवासी युवती ने आरोप लगाया है कि उसने इस सामूहिक विवाह के लिए आवेदन किया था। लेकिन शादी से पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ प्रेग्नेंसी टेस्ट स्वास्थ्य केंद्र में किया गया। जिसमें वह पॉजिटिव आई और उसका नाम योजना से हटा दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा- डिंरोरी में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत किए जाने वाले सामूहिक विवाह में 200 से अधिक बेटियों का प्रेग्नेसी टेस्ट कराई जाने का समाचार सामने आया है। मैं सीएम से जानजा चाहता हूं कि क्या यह समाचार सत्य है? यदि यह समाचार सत्य है तो यह तो मध्य प्रदेश की बेटियों का घोर अपमान किसके आदेश पर किया गया ? क्या सीएम की निगाह में गरीब और आदिवासी सामुदाय की बेटियों की कोई मान मर्यादा नहीं है क्या?।

Ramswaroop Mantri

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