इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के आईईटी (इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) संस्थान में जेन-Z आंदोलन की तैयारी चल रही थी। इसका खुलासा एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है।
नेपाल में हुए युवाओं के जेन-Z आंदोलन की तरह इंदौर में बड़ा आंदोलन करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए गढ़ बना था मध्यप्रदेश में इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी का आईईटी (इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) संस्थान। यह चौंकाने वाला खुलासा रैगिंग के मामले में एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है।
इंदौर के प्रतिष्ठित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) कैंपस में रैगिंग का एक मामला सामने आया, जो धीरे-धीरे एक बड़ी साजिश में बदल गया. एंटी रैगिंग कमेटी की गहन जांच ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं. कुछ सीनियर छात्र, जो पहले ही रैगिंग और अनुशासनहीनता के कारण हॉस्टल से बाहर और एक सेमेस्टर के लिए डिबार हो चुके थे, अब जूनियर छात्रों पर दबाव डालकर इंदौर शहर को अशांत करने की योजना रच रहे थे. यह साजिश नेपाल में हाल ही में हुए जेन-जी (Gen-Z) प्रोटेस्ट की तर्ज पर तैयार की गई थी, जिसमें सोशल मीडिया के जरिए हिंसा भड़काने का प्लान था. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राकेश सिंघई ने खुद इसकी पुष्टि की है कि सीनियर छात्रों की प्लानिंग बिल्कुल नेपाल के आंदोलन जैसी चल रही थी.
मामला 23 सितंबर की रात का है. लगभग 50 छात्र देर रात हॉस्टल लौटे. हॉस्टल गार्ड ने उन्हें रोककर पूछताछ की, तो उन्होंने गोल-मोल जवाब दिए. शक होने पर गार्ड ने उच्च अधिकारियों को सूचना दी, जिससे जांच शुरू हुई. पता चला कि ये छात्र शिव सागर रेस्टोरेंट गए थे, जहां सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों को बुलाया था. वहां थर्ड ईयर के छात्र अमन पटेल ने जूनियर छात्रों को उनके पर्सनल जीमेल अकाउंट के अलावा फेक जीमेल आईडी और एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट खुलवाए. सीनियर्स ने साफ निर्देश दिए कि ज्यादा से ज्यादा फेक आईडी बनाओ, ताकि भ्रामक पोस्ट वायरल हो सकें. अमन पटेल ने मैसेज किया, “जैसे ही हम मैसेज करेंगे, तुम्हें उसे रीट्वीट करना होगा, हैशटैग लगाकर वायरल करना होगा. जैसा नेपाल में जेन-जी प्रोटेस्ट हुआ, वैसा ही यहां करना है.”
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में यह है
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि संस्थान के सीनियर छात्रों ने फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स पर दबाव डालकर उनसे फेक आईडी बनवाने और सोशल मीडिया पोस्ट वायरल करने के लिए कहा था। साथ ही कहा गया था कि नेपाल में हुए जेन-Z स्टाइल प्रोटेस्ट की तर्ज पर विरोध की तैयारी करनी है। सभी से कम से कम दो ट्विटर अकाउंट बनाने और सभी सीनियर्स के मैसेज को रीट्वीट करने के लिए कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि ऐसा नहीं करने पर बाहर कर देंगे। सभी से फेक ईमेल आईडी भी बनवाई गईं।
नेपाल में हुए युवाओं के जेन-Z आंदोलन की तरह इंदौर में बड़ा आंदोलन करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए गढ़ बना था मध्यप्रदेश में इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी का आईईटी (इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) संस्थान। यह चौंकाने वाला खुलासा रैगिंग के मामले में एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में हुआ है।
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में यह है
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि संस्थान के सीनियर छात्रों ने फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स पर दबाव डालकर उनसे फेक आईडी बनवाने और सोशल मीडिया पोस्ट वायरल करने के लिए कहा था। साथ ही कहा गया था कि नेपाल में हुए जेन-Z स्टाइल प्रोटेस्ट की तर्ज पर विरोध की तैयारी करनी है। सभी से कम से कम दो ट्विटर अकाउंट बनाने और सभी सीनियर्स के मैसेज को रीट्वीट करने के लिए कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि ऐसा नहीं करने पर बाहर कर देंगे। सभी से फेक ईमेल आईडी भी बनवाई गईं।
रैगिंग नहीं, पूरी संगठित प्लानिंग हो रही थी एंटी रैगिंग कमेटी ने कहा है कि IET में मामला सिर्फ रैगिंग का नहीं बल्कि सीनियर्स की संगठित प्लानिंग का है। इसके लिए बाकायदा नियमित मीटिंग की जाती थीं।
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रेस्टोरेंट में हुई मीटिंग में यह हुआ था तय एंटी रैगिंग कमेटी ने बताया कि शिवसागर रेस्टोरेंट में जाने के लिए अमन पटेल का मैसेज आया था। यहां प्रथम वर्ष के छात्रों से उनके पर्सनल जीमेल के अलावा अलग से फेक जीमेल और ट्विटर अकाउंट खुलवाए गए।
सभी को ज्यादा से ज्यादा फेक आईडी बनाने के लिए कहा गया और निर्देश दिया गया कि सबको कम से कम दो ट्विटर अकाउंट बनाने हैं और जो भी मैसेज सीनियर्स करेंगे, उन्हें अधिक से अधिक रीट्वीट करना होगा, ताकि हैशटैग वायरल हो सके।
यह भी कहा गया कि जैसा नेपाल में जेन-Z जैसा प्रोटेस्ट हुआ था वैसा ही प्रोटेस्ट यहां भी करना है।
अमन पटेल के कहने पर प्रथम वर्ष के छात्र विवेक शर्मा ने प्रथम वर्ष के सभी छात्रों के मोबाइल से इस संबंध में किए हुए सभी व्हाट्सएप मैसेज भी डिलीट करवा दिए।
प्रथम वर्ष के छात्र उमंग अग्रवाल ने फर्स्ट ईयर का “सीनियर इंट्रोडक्शन” नाम से ग्रुप भी बनाया था।
जांच समिति ने तृतीय वर्ष के छात्र अमन पटेल से भी बात की। अमन पटेल और अन्य प्रथम वर्ष के छात्रों ने माना कि शिवसागर रेस्टोरेंट में प्रथम वर्ष के छात्रों से हुई मीटिंग में अमन पटेल, आदर्श मकवाना, आदित्य शर्मा, सुनील अहिरवार, नमन पांडे, यशच्ची मिश्रा, धवल चौधरी आदि सहित कई अन्य द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्र भी उपस्थित थे।
एंटी रैगिंग कमेटी ने केस दर्ज करने की सिफारिश की एंटी रैगिंग कमेटी ने यूनिवर्सिटी से कहा है कि मामला बेहद गंभीर है और दोषी छात्रों पर कई धाराओं में केस दर्ज होना चाहिए। कमेटी ने कहा कि छात्रों पर एफआईआर दर्ज कराई जाए और साथ ही साइबर सेल के माध्यम से शिवसागर रेस्टोरेंट में शामिल होने वाले अन्य वरिष्ठ छात्रों की भी पहचान कर उन्हें सजा दी जाए।
अमन पटेल (पिता अशोक पटेल), आदर्श मकवाना (पिता राधेश्याम मकवाना), आदित्य शर्मा (पिता राजीव शर्मा), अनुज पटेल (पिता अशोक पटेल) और उमंग अग्रवाल (पिता दिनेश अग्रवाल) के खिलाफ BNS की उचित धाराओं में रैगिंग, छात्रों को धमकाने, फेक जीमेल आईडी और ट्विटर अकाउंट बनाने के लिए मजबूर करने, संस्थान के खिलाफ माहौल पैदा करने (जैसा कि नेपाल में हुआ) और डिजिटल साक्ष्य मिटाने के आरोपों में केस दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
एबीवीपी से जुड़ा पटेल मुख्य प्लानर इस पूरे मामले में सामने आया है कि इस मामले का मुख्य प्लानर और आरोपी अमन पटेल है। यह एबीवीपी का पदाधिकारी बताया जा रहा है। राष्ट्रीय कला मंच के बैनर तले इसने गरबे का भी आयोजन किया था और जूनियर को इसके पास खरीदना अनिवार्य किया था। वहीं, बताया जा रहा है कि एबीवीपी का नाम आने के बाद इसमें अब यूनिवर्सिटी प्रबंधन बचाव की मुद्दा में आ गया है।
एंटी रैगिंग कमेटी के 13 सदस्यों ने इसकी विस्तृत जांच की. रिपोर्ट में पाया गया कि सीनियर छात्र अमन पटेल, आदर्श मकवाना, आदित्य शर्मा और अनुज पटेल (अमन का छोटा भाई, जो फर्स्ट ईयर का छात्र है लेकिन हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहा था) मुख्य आरोपी हैं. अनुज जूनियर छात्रों की सारी बातें अपने बड़े भाई अमन तक पहुंचा रहा था. इन सीनियर्स ने फर्स्ट ईयर के छात्रों को धमकाया कि अगर निर्देश नहीं मानोगे, तो बैच से बाहर कर देंगे. जूनियर छात्र विवेक शर्मा को अमन पटेल ने फर्स्ट ईयर के सभी छात्रों के मोबाइल से व्हाट्सएप मैसेज डिलीट करवाए, ताकि डिजिटल साक्ष्य मिट जाएं. इतना ही नहीं, अमन पटेल, आदर्श मकवाना और आदित्य शर्मा ने जूनियर छात्रों को हॉस्टल के सीसीटीवी कैमरे तोड़ने का आदेश दिया, लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी.
प्रथम वर्ष के छात्र उमंग अग्रवाल ने फर्स्ट ईयर का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसका नाम “सीनियर इंट्रोडक्शन” रखा गया. यह ग्रुप साजिश का केंद्र था. सीनियर्स का मकसद था रैगिंग की सजा से बदला लेना. पहले इन्हें हॉस्टल से निकाल दिया गया था और सेमेस्टर डिबार कर पेनाल्टी लगाई गई थी. इसी गुस्से में इन्होंने जूनियर छात्रों को अपना हथियार बनाया. कमेटी ने इन्हें रैगिंग, धमकी, फेक अकाउंट बनवाने, डिजिटल साक्ष्य मिटाने और हिंसा भड़काने के लिए दोषी ठहराया. कमेटी ने इनके खिलाफ बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा की है. पुलिस को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है, और एफआईआर दर्ज करने के लिए थाने में आवेदन दिया गया.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है. कुलपति प्रोफेसर राकेश सिंघई ने कहा, “यह केवल रैगिंग का मामला नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग से शहर में अराजकता फैलाने की साजिश है. नेपाल के जेन-जी प्रोटेस्ट में युवाओं ने फेक अकाउंट्स और वायरल पोस्ट से बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काई थी. यहां भी यही प्लान था – फेक आईडी से उत्तेजक मैसेज फैलाकर प्रदर्शन शुरू करना.” उन्होंने बताया कि एंटी रैगिंग कमेटी ने शिव सागर रेस्टोरेंट के डीवीआर (रिकॉर्डिंग डिवाइस) को जब्त करने के लिए पुलिस को पत्र लिखा है. इससे और सबूत मिल सकते हैं.
यह घटना न केवल DAVV के लिए बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है. रैगिंग, जो पहले शरारत समझी जाती थी, अब सोशल मीडिया के साथ मिलकर खतरनाक साजिशों का रूप ले रही है. जेन-जी प्रोटेस्ट नेपाल में छात्रों के अधिकारों के नाम पर हिंसक प्रदर्शनों के रूप में जाना जाता है, जहां फेक न्यूज और वायरल कैंपेन ने माहौल बिगाड़ दिया. इंदौर जैसे शांतिपूर्ण शहर में ऐसी साजिश रचने की कोशिश ने सबको चौंका दिया. छात्रों के मनोबल पर असर पड़ा है, और अभिभावक चिंतित हैं.
प्रशासन अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. विश्वविद्यालय में रैगिंग रोकने के लिए नई गाइडलाइंस लाई जा रही हैं, जैसे नियमित काउंसलिंग, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और सीनियर-जूनियर इंटरैक्शन पर नजर. पुलिस जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी. यह मामला सिखाता है कि शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और जागरूकता कितनी जरूरी है. अगर समय रहते शक को नजरअंदाज किया जाता, तो शहर में बड़ा हादसा हो सकता था. अब उम्मीद है कि यह घटना अन्य संस्थानों के लिए उदाहरण बनेगी, और छात्र सुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर सकेंगे. समाज को भी सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग पर जोर देना होगा, ताकि युवा ऊर्जा रचनात्मक दिशा में लगे.
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