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वर्तमान सत्ता असामाजिक तत्वों के हाथ !

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Nirmal Kumar Sharma - YouTube

निर्मल कुमार शर्मा

ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों की गुलामी के जुए में सैकड़ों साल पिसने वाले इस देश को स्वतंत्र कराने में शहीद-ए-आजम भगतसिंह, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस,अशफाक उल्ला,पंडित रामप्रसाद बिस्मिल,चन्द्र शेखर आजाद जैसे हजारों रणबांकुरों ने अपनी जान को हँसते-हँसते न्योछावर कर दिए थे,लेकिन इन सपूतों से इतर सुभाष चंद्र बोस,महात्मा गाँधी,जवाहर लाल नेहरू,बल्लभ भाई पटेल,अबुल कलाम आजाद,सरहदी गांधी आदि ऐसे स्वातंत्र्य वीर भी इसी देश के थे,जो इस देश को स्वतंत्र कराने में अपना अप्रतिम योगदान दिए,कईयों ने हंसते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर तक कर दिए ! देश के स्वतंत्र होने के बाद सत्तासीन होनेवाले नेताओं में डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद, बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,आचार्य जे बी कृपलानी आदि लोग इस देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए सतत अपनी कर्मठता,ईमानदारी,प्रतिबद्धता,सच्चरित्रता व अपनी मधुर वाणी में,अपनी भाषा की मर्यादा व गरिमा बनाकर रखते हुए भारतीय आम जनता,किसानों,मजदूरों आदि को संबोधित करते हुए अपने देशहित के कार्यों को कुशलतापूर्वक संपादित करते रहे,लेकिन वर्तमान समय में केंद्र व तमाम राज्यों में एक ऐसी विचारधारा की पार्टी सत्तारूढ़ हो गई है,जिसका इस देश को ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों से मुक्त कराने में अंशमात्र का भी योगदान नहीं रहा है !
ऐतिहासिक और पुष्ट लिखित साक्ष्य हैं कि वर्तमान सत्ता के कर्णधारों के वैचारिक समानधर्मी पूर्वज उल्टा देशद्रोही,राष्ट्रहंता स्वतंत्रता आंदोलन में ब्रिटिश साम्राज्य वादियों का साथ दिए थे ! ये भी ऐतिहासिक साक्ष्य है कि ये इस राष्ट्रराज्य के कट्टर दुश्मन इस देश के किसानों, मजदूरों व देशभक्त युवकों को प्रताड़ित करनेवाले दुश्मन ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों से गुप्त समझौता कर लिए थे ! यह भी कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आवाहन पर इस देश को मुक्त कराने के लिए उनके द्वारा स्थापित की गई आजाद हिन्द फौज में भर्ती होने वाले युवकों की हत्या तक करवा रहे थे ! और यही दलाल ब्रिटिश साम्राज्यवाद को स्थायित्व प्रदान करने के लिए अंग्रेजी सेना में भर्ती होने के लिए भारतीय युवकों से आग्रह कर रहे थे ! आज ऐसे ब्रिटिश साम्राज्यवाद के दलाल, देशद्रोही,विभीषण और भारतीय राष्ट्र राज्य के दुश्मन अपने छल-बल,धार्मिक व जातीय वैमनस्यता व कुटिलता का बीज बोकर,दंगे-फसाद कराकर इस देश के कुछ राज्यों व भारत की केन्द्रीय सत्ता पर कब्जा जमाने में सफल हो गए हैं ! इनके व्यवहार में न इनकी अपनी भाषा की मर्यादा है,न इनके व्यवहार में जरा भी शालीनता है,न इनका कोई चरित्र है,आज भारतीय राजनैतिक सत्ता के शीर्ष पर ऐसे ही अशिष्ट,मवाली,गुँडे,मॉफिया, अशिक्षित,दंगाई, हत्यारे,बलात्कारी, विलासी चरित्र वाले कुछ असामाजिक तत्वों हम का एक गैंग भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान पर कब्जा कर लिया है ! उदाहरणार्थ लखीमपुर खीरी में कुछ गुँडों और असामाजिक तत्वों द्वारा अपनी मूलभूत सुविधाओं की शांतिपूर्वक मांग करने वाले कुछ भारतीय किसानों को अपनी बड़ी गाड़ियों से कुचलकर मार दिए थे ! इन भारतीय किसानों की जघन्यतम् हत्या करनेवाला गुंडा अभी भी गुजरात दंगों का मुख्य अपराधी नरेंद्र मोदी नीत केन्द्रीय सरकार के मंत्रीमंडल में गृहराज्यमंत्री जैसे पद पर अभी भी बेशर्मी से बैठा है !
वर्तमान गृहराज्यमंत्री और भारतीय राष्ट्र राज्य का गृहमंऊ दोनों असामाजिक, दंगाई पृष्ठभूमि के व्यक्ति हैं, गृहराज्यमंत्री जो अपनी न्यायोचित माँग पर इस देश के प्रदर्शनकारी अन्नदाताओं को बिल्कुल गली-मुहल्लों के गुँडों की भाषा का प्रयोग करते हुए,धमकाते हुए कुछ दिन पूर्व कहा था ‘तुम लोग सुधर जाओ,नहीं तो तुम लोगों को ठीक करने में हमें केवल सिर्फ दो मिनट लगेंगे ! ‘,बाकायदा वह सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि ‘ सांसद या मंत्री बनने से पूर्व वह क्या था ? ‘इसके अलावे वह अपनी कार से अपना अंगूठा नीचे करके इस राष्ट्र राज्य को अपना ठेंगा दिखाने की अभद्रता पूर्ण नीच हरकत करने से भी नहीं चूका था ! इसी अशिष्टता को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा का सत्तासीन मुख्यमंत्री सरेआम प्रदर्शकारी किसानों को ठोकने के लिए एक सशत्रधारी संगठन बनाने के लिए शठे शाठे समाचरेत का सार्वजनिक रूप से उपदेश तक दिया था ! उसके इस नीचतापूर्ण बयान के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ असामाजिक तत्व एक किसान को लाठियों से निर्मम प्रहार करते हुए जघन्यतम् हत्या तक कर दिए थे ! कुछ समय पूर्व उत्तर प्रदेश का अपराधिक पृष्ठभूमि का मुख्य मंत्री अपनी पुलिस को अपने विरोधियों को ठोकने की सलाह तक दे दिया था ! पिछले सालों में दिल्ली दंगों को कराने में अपनी अहम भूमिका अदा करनेवाले कपिल मिश्रा जैसे गुँडे ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों से दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में ‘दो दिन में रास्ता साफ करा देने की ‘धमकी दे दिया था ! उससे दो कदम आगे बढ़ते हुए अनुराग ठाकुर जैसा अशिष्ट गुंडा मंत्री ‘गोली मारो….को ‘जैसा बयान दिया था ! इसी प्रकार मोदी मंत्रीमंडल में शामिल एक और गुंडे पृष्ठभूमि से आए मंत्री प्रवेश वर्मा ने मोदीराज नीत काले कानून नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में दिल्ली के शाहीनबाग स्थित शालीनतापूर्वक प्रदर्शन कर रही मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ धार्मिक वैमनस्यता पूर्ण व घोर नफरती बयान दिया था कि ‘लाखों लोग शाहीन बाग में इकट्ठा होते हैं,दिल्ली के लोगों को सोच-समझकर फैसला लेना होगा ! वह मतलब मुस्लिम ही आपके घरों में घुसेंगे,आपकी बहनों और बेटियों के साथ बलात्कार करेंगे ! मोदी और अमित शाह आपको बचाने नहीं आएंगे ! ‘ आश्चर्य यह की बात है कि गुजरात दंगों के मुख्य मास्टरमाइंड नरेंद्र मोदी के मंत्रीमंडल में ये तीनों असामाजिक तत्व है अभी भी बाकयदा मंत्री पद पर विराजमान हैं !

         हकी़कत यही है कि हमारे देश में और दुनिया के अन्य देशों में भी,जो भी सत्तासीन होता है,उसे यह निर्धारित करने का विशेषाधिकार मिल जाता है कि उसके द्वारा शासित राज्य में कौन व्यक्ति देशभक्त है और कौन देशद्रोही या राष्ट्रद्रोही है ?यह निर्धारण प्रक्रिया इस बात में अन्तर्निहित है कि कौन व्यक्ति सत्ता के कर्णधारों के कितना नजदीक है और वह सत्ता की चाटुकारिता में कितना प्रशस्तिगीत गा रहा है और दूसरे व्यक्ति के खून में अपना जमीर बेचकर,अपना स्वाभिमान ताक पर रखकर,अपना सिद्धांत गिरवी पर रखकर,न सत्ता की चाटुकारिता पसंद है,न वह सत्ता से नजदीकियां बनाना पसंद करता है,वह निर्भीकतापूर्वक बिना लाग-लपेट के जो सत्य-परक तथ्य और बात है,वही बोलता और लिखता भी है,तो निश्चित तौर पर इसमें प्रथम चाटुकारिता चरित्र वाले का व्यक्तियों को सत्ता की नजरों में देशभक्त और दूसरे चरित्र के व्यक्तियों को जो निडर होकर अपनी सत्य,निष्पृह तथा निष्पक्ष व यथार्थपरक बात कहते हैं,वे सत्ता के कर्णधारों की नजरों में निश्चित रूप से सदैव देशद्रोही या राष्ट्द्रोही साबित हो जाते हैं !
             ये दोनों शब्द समय और सत्ता के सापेक्ष होते हैं,एक ही व्यक्ति एक समय में देश का सबसे बड़ा देशद्रोही होता है और वही व्यक्ति सत्ता बदलते ही देशभक्त ही नहीं लोकमान्य,राष्ट्रपिता, शहीद-ए-आजम आदि उद्दात,असीम और अनन्त सम्मान का हक़दार हो जाता है ! इसका सर्वोत्तम उदाहरण हमारे देश के ती महान सपूतों ही का नाम क्रमशः लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ,महात्मा गाँधी और शहीद-ए-आजम भगतसिंह उदाहरण है के तौर पर लिए जा सकते हैं !  थे,ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों के समय में सबसे पहला देशद्रोह का मुकदमा लोकमान्य बालगंगाधर तिलक पर चला था,दूसरा महात्मा गाँधी पर और तीसरा शहीद-ए-आजम भगतसिंह पर ! गाँधीजी पर ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने एक पत्रिका वीकली जनरल में यंग इंडिया नामक लेख लिखने के कथित जुर्म में देशद्रोह का मुकदमा चलाया था । इनमें से प्रथम दो तो बच गये थे, लेकिन तीसरे शहीद-ए-आजम भगतसिंह को क्रूर,शोषक और फासिस्ट ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों ने सुनियोजित रूप से फर्जी मुकदमे चलाकर आधे-अधूरे ट्रायल करके समय से एक दिन पूर्व ही फांसी पर लटका कर अपने रास्ते के रोड़े बने शहीद-ए-आजम भगतसिंह की बुलंद आवाज़ को सदा के लिए अवरूद्ध कर दिया था ! अभी 2010 में एक ऐसे डॉक्टर,डॉक्टर विनायक सेन पर,तत्कालीन कांग्रेस के सत्ताधारियों ने देशद्रोह का मुकदमा चलाया था,जिन्होंने इस देश में साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा बड़े धन्नासेठों और उद्योगपतियों के हित के लिए अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहे और जिनके वंशमूल का नामोनिशान मिटा देने को आतुर ये सत्ताधारी व्यग्र हैं,भारत के उन आदिम आदिवासी,जातियों और जनजातियों जिनको पूंजीपतियों के समर्थक सत्ताधारियों द्वारा नक्सली करार दिया गया है,की सेवा करने वाले उस डॉक्टर बिनायक सेन पर कथित नक्सलियों की मदद करने का क्षद्म और झूठा आरोप लगाया,जिसे भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया था ।             
         कालांतर में देश की स्वतंत्रता के पश्चात ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के समय के कथित तीनों देशद्रोही लोग स्वतंत्र भारत में क्रमशः लोकमान्य, दूसरे राष्ट्रपिता के नाम से और तीसरे शहीद-ए-आजम के सर्वोच्च सम्मान से आज सम्पूर्ण भारत की जनता-जनार्दन द्वारा ससम्मान स्मरण किए जाते हैं ! इसलिए सत्ता के वर्तमान कर्णधारों द्वारा अपने विरोधी परन्तु सत्यनिष्ठ लोगों के विचारों के दमन करने हेतु देशद्रोही,राष्ट्रद्रोही या कुछ भी अनर्गल आरोप लगाना आश्चर्य की बात नहीं है ! सत्ताधारी और सत्ता के चाटुकार खुद देशद्रोह का निर्लज्जता पूर्वक कार्य करते रहते हैं,मसलन अपनी गलत नीतियों से लाखों किसानों को आत्महत्या को बाध्य करना,सरेआम सत्ता के चाटुकारों और गुँडों द्वारा निर्दोष लोगों की पीट-पीटकर हत्या करना,समाज के अमन-चैन में पलीता लगाकर धार्मिक वैमनष्यता फैलाकर दंगे करने की साजिश करना,जिसमें सरेआम सत्ता के पालित गुँडों द्वारा कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक का कर्तव्यनिर्वहन करते समय दिनदहाड़े निर्मम हत्या करना ही असली देशद्रोह और राष्ट्रद्रोह है । लेकिन इसके ठीक उल्टा आज सत्ता के मद में चूर सत्ताधारियों से अपनी बात निर्भीकता पूर्वक कहना और अन्याय के खिलाफ बोलना ही देशद्रोह है और कन्हैया कुमार,उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य पर अनेक झूठे आरोप लगाकर देशद्रोह का मुकदमा चलाना तो कुछ नहीं है !
         पिछले सालों में 6300 लोगों पर कथित राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया है,उन लोगों पर यूपीपीए मतलब अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट लगाकर उन्हें जेलों में ठूँस दिया गया है,जबकि उनमें से मात्र 2 प्रतिशत लोगों पर ही सजा निर्धारित हो पाई है। आज मृणाल पांडेय,सिद्धार्थ वर्धराजन,राजदीप सरदेसाई,परेशनाथ आदि जैसे पत्रकारों और कांग्रेस नेता शशि थरूर जैसे नेताओं पर राजद्रोह का केस चल रहा है। इसके अलावे वाशिंगटन पोस्ट जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र के अनुसार कम्प्यूटर हैक करके रोना विल्सन जैसे लोगों की छलपूर्वक गिरफ्तारी करने के बाद इस देश के अलग-अलग जगहों से 15 अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं,डॉक्टरों,वकीलों आदि की गिरफ्तारियां की गईं हैं,इन सभी पर आरोप है कि इन सभी लोगों का सम्बंध उक्त श्री रोना विल्सन से है,इन गिरफ्तार लोगों में इंसानियत पर कविता लिखनेवाले 82 वर्षीय कवि श्री वरवरा राव, आईआईएम अहमदाबाद के 71वर्षीय प्रोफेसर आनन्द तेलतुंबड़े,प्रोफेसर श्रीमती शोमा सेन, आजीवन आदिवासियों और बेसहारा लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करनेवाले 84 वर्षीय स्टैन स्वामी,विकलांगों की मदद करनेवाले वर्नन गोंजाल्विस और वकील अरूण फरेरा,  सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा,महेश राउत,नताशा नरवाल,हैनी बाबू,सुधीर ढावले,गौतम गिलानी,देवांगना कालिता,सुरेंद्र गाडगिल आदि जैसे परोपकारी व नेकदिल लोगों को गिरफ्तार करके पिछले दो सालों से उन्हें जेलों में गैरकानून रूप से सड़ाया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि पिछले दिनों मोदी के जेल में आजीवन आदिवासियों और बेसहारा लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करनेवाले 84 वर्षीय स्टैन स्वामी की हाथ-पैरों में हथकड़ी-बेड़ियों में जकड़े हुए दु:खद मौत हो चुकी है ! सच्चाई यह है कि आज अगर भगवान कृष्ण, मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम,लोकमान्य बालगंगाधर तिलक,महात्मा गाँधी,नेताजी सुभाषचंद्र बोस,चन्द्रशेखर आजाद और शहीद-ए-आजम भगत सिंह भी जिन्दा होते और इन सत्ताधारियों के कुकृत्यों पर विरोध में अपनी आवाज उठाते तो, निश्चित तौर पर ये सत्ताधारी उनको भी देशद्रोही और राष्ट्रद्रोही घोषित कर उनको गिरफ्तार कर उन पर अवश्य मुकदमा चलाकर उन्हें भी आजीवन जेल की सजा दे देते ! या स्टेन स्वामी की तरह हाथ-पैरों में लोहे की मजबूत हथकड़ी-बेड़ियों में जकड़े मौत के घाट उतार देने का कुकृत्य करने में कतई संकोच नहीं करते ! 
           बिडम्बना देखिए देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरेआम उत्तेजक बयानबाजी करके और भाषण देकर दंगा फैलाकर सैकड़ों लोगों की सांप्रादायिक गुँडों से हत्या करानेवाले वाले कपिल मिश्रा,प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे दंगाई आज कथित सबसे बड़े देशभक्त बने बैठे हैं ! और उत्तर प्रदेश का मठाधीश मुख्यमंत्री का पिछला संपूर्ण जीवन अपराधों,दंगा कराने के प्रयास करने,सांप्रादायिक उत्तेजक,जहर उगलने वाले भाषण देने और हत्यारे के रूप में दर्जनों मुकदमें का आरोपी आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर ठाट से बैठा दिया गया है ! सबसे बड़ी बिडम्बना तो गुजरात के दो आतताइयों, दंगाईयों को जिन्हें इस देश का माननीय सुप्रीमकोर्ट इस राष्ट्र राज्य के लिए सबसे बड़ा दुश्मन मानता था,वे आज प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के पद पर बैठे हुए हैं ! ऐसे हत्यारों,दंगाइयों से इस देश का भला कैसे और क्यों हो जाएगा ! वास्तव में आज भारतीय लोकतंत्र और यहाँ की गरीब जनता की भलाई का जिम्मा ऐसे भ्रष्ट,असामाजिक,फॉसिस्ट प्रकृति के कथित नेताओं के हाथ सत्ता चली गई है,जो किसी भी दृष्टिकोण से इस देश की सत्ता की बागडोर संभालने लायक ही नहीं हैं ! भारतीय जनमानस में एक कहावत बहुत मशहूर है कि 'वे भेड़ें कैसे सुरक्षित रह सकतीं हैं,जिनके रखवाले भेड़िए हों । ' यह यक्ष प्रश्न है !
       -निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड, अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ', गाजियाबाद, उप्र,

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