इंदौर
कच्चे माल की कीमतें दो साल में तीन गुना बढ़ने से पैकेजिंग इंडस्ट्री के सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ऐसे में यह इंडस्ट्री कोरोगेटेड बॉक्स की कीमतों में इजाफा कर सकती है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार द्वारा कोरोगेटेड बॉक्स पर जीएसटी को कम करके 5% करना चाहिए। हाल ही में इसे 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया है। इंदौर में कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग की एक-दो बड़ी यूनिट और लगभग 50 छोटी यूनिट हैं, जहां 600 लोग सीधे तौर पर काम करते हैं।
- 50 से ज्यादा छोटी-बड़ी कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग की यूनिट हैं इंदौर में
- 75 लाख मीट्रिक टन रिसाइकिल्ड क्राफ्ट पेपर का उपयोग करती है यह इंडस्ट्री सालाना
- 07 लाख से ज्यादा रोजगार हैं इस इंडस्ट्री में
- 100% रिसाइकिल करने योग्य कोरोगेटेड बॉक्स का उत्पादन करती है इंडस्ट्री
दूसरे उद्योगों पर भी असर पड़ेगा
कोरोगेटेड बॉक्स की कीमतों में इजाफे का असर उन उद्योगों पर पड़ने की भी संभावना है, जहां इन बॉक्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। सबसे ज्यादा फार्मा सेक्टर, ई-कॉमर्स सेक्टर, खाद्य उद्योग और कपड़ा उद्योग इसमें शामिल हैं।
इसलिए असर : वेस्ट कटिंग के आयात पर 2.5% कस्टम ड्यूटी भी
कच्चे माल में मुख्यतः आयातित वेस्ट कटिंग शामिल है। प्रति मीट्रिक टन भाव जो पहले 100 डॉलर था, वह बढ़कर 330 डॉलर हो गया है। पिछले बजट में सरकार ने सभी प्रकार के वेस्ट कटिंग के आयात पर 2.5% कस्टम ड्यूटी भी लगा दी है। तेल महंगा होने के साथ ही कंटेनर का किराया भी चार गुना तक बढ़ गया है। इंटरनेशनल क्राफ्ट पेपर और पल्प का भाव सर्वोच्च स्तर पर है। सभी इंटरनेशनल पेपर और पल्प मिलें फुल बुक हैं और डिलीवरी के लिए लंबा समय मांग रहे हैं।
देशी वेस्ट पेपर इंक, वायर भी महंगा
देशी वेस्ट पेपर का भाव भी बढ़ा है। एनर्जी कॉस्ट के साथ ही कच्ची सामग्री में स्टार्च का भाव 4-5 महीने में प्रति किलो आठ रुपए बढ़ा है। इंक, वायर का भाव भी बढ़ा है। दूसरी तरफ उत्पादन खर्च में अधिक वृद्धि से वर्किंग कैपिटल फंड की आवश्यकता पड़ी है।
कम दाम में जमीन उपलब्ध कराए सरकार
फेडरेशन ऑफ कोरोगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष विनीत जैन ने बताया कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग को संकट से बचाने के लिए अब सरकार से ही उम्मीद है। सरकार जीएसटी कम करने के साथ ही कम दाम में जमीन देकर हमारी मदद कर सकती है। प्लास्टिक मुक्त के सपने के लिए यह आवश्यक है।





