कर्मचारियों की सेवानिवृत्त आयु सीमा में वृद्धि नहीं बल्कि बेहतर पेंशन विकल्प दे शिवराज सरकार
रीवा 13 फरवरी । मध्य प्रदेश राज्य सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्त आयु सीमा में चुनावी साल में फिर वृद्धि की जा रही है। जिसे लेकर प्रदेश के लाखों नौजवानों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है वहीं शासकीय कर्मचारियों ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी नाराजगी जताई है। विंध्यांचल जन आंदोलन के अध्यक्ष अजय खरे ने कहा है कि शासकीय कर्मचारियों को अधिवार्षिकी आयु पूरा करने पर बेहतर पेंशन विकल्प देने की जगह शिवराज सरकार वृद्धावस्था में भी उन से काम लेने पर आमादा है जिसके चलते लाखों नौजवानों को शासकीय नौकरियों से वंचित होना पड़ रहा है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के द्वारा सन 2018 में भी विधानसभा चुनाव के कुछ माह पहले शासकीय कर्मचारियों को अपने प्रभाव में लेने के लिए उनकी सेवानिवृत्त आयु में 2 वर्ष की वृद्धि करते हुए उसे 60 की जगह 62 वर्ष कर दिया था, इसके बावजूद शिवराज सरकार को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। करीब 16 माह बाद 24 कांग्रेसी विधायकों का दल बदल करा कर शिवराज सिंह चौहान फिर से मुख्यमंत्री बन गए लेकिन उन्हें अभी भी यही लगता है कि सेवानिवृत्त आयु सीमा में फिर वृद्धि करके शासकीय कर्मचारियों का विश्वास अर्जित कर नवंबर 2023 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में उन्हें बहुमत हासिल हो जाएगा। इधर देखने को मिल रहा है कि शासकीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में 1 वर्ष की वृद्धि का प्रस्ताव का चारों तरफ से विरोध शुरू है। खास तौर से पढ़ी लिखी युवा पीढ़ी बेहद नाराज है जो लाखों की संख्या में रोजगार का इंतजार करते करते आयु सीमा से बाहर होती जा रही है। सरकारी कर्मचारी भी उम्र के अंतिम पड़ाव में अपने घर परिवार और समाज के लिए उचित समय पर सेवानिवृत्ति चाहते हैं। शासकीय कर्मचारियों की सेवानिवृत्त आयु सीमा में यदि 1 वर्ष की वृद्धि का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो आगे वो 63 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे। प्रदेश में वैसे भी बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है। सरकार की गलत नीतियों के चलते नौजवान रोजगार के इंतजार में बूढ़ा हो चला है। श्री खरे ने कहा कि मध्यप्रदेश के करोड़ों मतदाताओं ने सरकार की मनमानी रीति नीति के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बदलाव का संकल्प ले रखा है।





