पहली बार इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब जीतने वाली रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू (आरसीबी) की टीम की जीत का जश्न मातम में बदल गया। बुधवार को जब टीम की जीत का जश्न मनाने के लिए हजारों लोग चिन्नास्वामी स्टेडियम में जुटे थे उसी समय स्टेडियम के मुख्य द्वार के बाहर भगदड़ मच गई। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हो गए। अब पुलिस सूत्रों ने बताया है कि चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर ऐसा क्या हुआ था कि भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने 11 मौतों और 33 के घायल होने की पुष्टि की और कहा कि सभी घायल खतरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा, सरकार ने 50 हजार लोगों के जुटने की व्यवस्था की थी लेकिन वहां दो से तीन लाख के करीब लोग जुट गए जिसके कारण यह हादसा हुआ।

पुलिस सूत्रों ने चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ के लिए मुख्य वजह विजय परेड को लेकर असमंजस, फ्री पास, अत्यधिक भीड़ और चिन्नास्वामी स्टेडियम में सीमित सीटों को बताया है। उन्होंने कहा कि आरसीबी टीम के स्वागत के लिए बंगलूरू के क्रिकेट प्रेमी मंगलवार रात से ही सड़कों पर उमड़े हुए थे। बुधवार को राज्य विधानसभा में जब टीम का स्वागत किया गया तब भी भारी भीड़ जमा थी। वहीं, चिन्नास्वामी स्टेडियम में जश्न को लेकर उसके बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस दौरान कई ऐसे लोग जिनके पास स्टेडियम में जाने के लिए वैध टिकट नहीं था, वे टिकट वालों के साथ अंदर घुसने की कोशिश करने लगे, जब उन्हें रोका गया तो अफरातफरी मच गई। इस दौरान स्टेडियम में घुसने के लिए कई लोग उसके गेटों पर चढ़ने की कोशिश करते समय जमीन पर भी गिर गए, तथा कुछ घायल हो गए।

विजय परेड को लेकर प्रशंसकों में अजमंजस
बता दें कि बुधवार को हुई इस घटना की एक वजह विजय परेड को लेकर प्रशंसकों में अजमंजस की स्थिति भी बताई जा रही है। दरअसल, बंगलूरू यातायात पुलिस ने बुधवार को सुबह 11:56 बजे घोषणा की थी कि विजय परेड नहीं होगी, बल्कि स्टेडियम में केवल सम्मान समारोह होगा। इसके बाद, आरसीबी टीम के प्रबंधन ने दोपहर 3.14 बजे एक्स पर एक पोस्ट में घोषणा की कि वे शाम 5 बजे विजय परेड आयोजित करेंगे। विजय परेड के बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम में जश्न मनाया जाएगा। हम सभी प्रशंसकों से पुलिस और अन्य अधिकारियों द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने का अनुरोध करते हैं ताकि सभी लोग शांतिपूर्वक रोड शो का आनंद ले सकें। इसके लिए shop.royalchallengers.com पर निःशुल्क पास (सीमित प्रवेश) भी उपलब्ध हैं। बंगलूरू यातायात पुलिस और आरसीबी टीम प्रबंधन की अलग-अलग घोषणाओं से प्रशंसकों में असमंजस की स्थिति बन गई कि परेड निकाली जाएगी या नहीं।

भीतर घुसने के लिए एक-दूसरे को धक्का देने लगे लोग और गेट भी फांदने की कोशिश की
पुलिस सूत्रों ने बताया कि हालांकि उन्होंने यह साफ कर दिया था कि कोई विजय परेड नहीं निकाली जाएगी। साथ ही केवल टिकट धारकों को ही स्टेडियम में प्रवेश की अनुमति होगी। लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में प्रशंसक स्टेडियम के बाहर एकत्र हो गए और उनमें से कई लोग गेट फांद कर भीतर जाने की कोशिश करने लगे। इस दौरान उनमें से कुछ ने एक-दूसरे को धक्का देना भी शुरू कर दिया।
किसी भी हालत में भीतर घुसना चाहते थे लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हजारों की संख्या में लोगों के पहुंचने और किसी भी हालत में स्टेडियम में प्रवेश करने की कोशिश करने के दौरान स्थिति अचानक अनियंत्रित हो गई और भगदड़ मच गई। घटना के वीडियो फुटेज से पता चलता है कि स्थिति बेहद खतरनाक थी। हादसे के बाद कई वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर जारी हुए हैं जिनमें पुलिसकर्मी एंबुलेंस में डालकर बेहोश पड़े घायलों को अस्पताल पहुंचाते दिख रहे हैं। कई वीडियो में बेहोश लोगों को सीपीआर देते भी देखा जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि सड़कों पर बेहद भीड़ होने के कारण एंबुलेंस भी समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाईं। बाद में घायलों को लेकर उन्हें अस्पताल पहुंचने में भी भीड़ के कारण देर हुई।
चीन का जिक्र कर रघुराम राजन ने किस मौके को भुनाने की कही बात?
पूर्व आरबीआई गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने डोनाल्ड ट्रंप के अंतरराष्ट्रीय छात्र वीजा को प्रतिबंधित करने के फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर बुरा असर पड़ेगा। राजन का मानना है कि भारत के पास इस स्थिति को एक अवसर में बदलने का मौका है। उन्होंने टुडे टीवी के साथ बातचीत में अमेरिकी प्रशासन के कदमों को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया। राजन ने कहा कि इससे अमेरिका और भारत के बीच शैक्षणिक और आर्थिक संबंध कमजोर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को शिक्षा में निवेश बढ़ाना चाहिए। राजन ने व्यापक विकास के लिए संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया।
रघुराम राजन ने अमेरिकी प्रशासन के विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निशाना बनाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका के लिए एक बड़ा निर्यात हैं। राजन के अनुसार, इससे अमेरिका को नुकसान होगा। छात्र अब यह सोचने लगे हैं कि क्या उन्हें अमेरिका में रहना चाहिए या ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे देशों में जाना चाहिए, जो उनका अधिक स्वागत कर सकते हैं।
राजन ने कहा कि हमें इस मुश्किल समय में भी अवसर ढूंढना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर भारत अपनी शिक्षा में निवेश बढ़ाता है तो यह एक अच्छा मौका हो सकता है। राजन ने चीन का उदाहरण दिया, जिसने पिछले 20 वर्षों में शिक्षा में काफी सुधार किया है। उन्होंने कहा कि भारत भी ऐसा कर सकता है। उसे अनुसंधान और विकास में आगे बढ़ने के लिए ऐसा करना चाहिए।
फैसले का हो रहा विरोध
राजन ने कहा कि इस फैसले का विरोध हो रहा है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय भी इसके खिलाफ लड़ रहा है। राजन के अनुसार, विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच लड़ाई में छात्र और अनुसंधान को नुकसान होता है। सरकार की ओर से फंडिंग पर विचार करने के दौरान कई चिकित्सा अनुसंधान रोक दिए गए हैं। इससे शोधकर्ताओं में अनिश्चितता पैदा होती है।
डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत में पुतिन की दो टूक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत की है। दोनों नेताओं में 75 मिनट तक ये बातचीत चली, जिसमें खासतौर से यूक्रेन के रूसी एयरबेस पर ड्रोन हमले और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में चर्चा हुई। ट्रंप ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर बताया कि पुतिन ने सख्ती के साथ यूक्रेन से ड्रोन हमले का बदला लेने की बात कही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बातचीत की है। दोनों नेताओं में 75 मिनट तक ये बातचीत चली, जिसमें खासतौर से यूक्रेन के रूसी एयरबेस पर ड्रोन हमले और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में चर्चा हुई। ट्रंप ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर बताया कि पुतिन ने सख्ती के साथ यूक्रेन से ड्रोन हमले का बदला लेने की बात कही है। पुतिन ने ट्रंप से कहा कि रूस अपने सैन्य हवाई अड्डों पर यूक्रेनी ड्रोन हमले का जवाब देगा। ट्रंप ने पुतिन के साथ वार्ता को अच्छी बताया लेकिन साथ ही ये भी साफ किया कि यह बातचीत ऐसी नहीं थी, जो तुरंत चीजों को शांति की तरफ लेकर जाए।
पुतिन और ट्रंप की ये बातचीत यूक्रेन के रूस में ड्रोन हमले के चार दिन बाद हुई है। रविवार को यूक्रेन ने रूसी एयरबेसों को निशाना बनाते हुए बड़े हमले को अंजाम दिया है। इस हमले में रूस के 40 फाइटर जेट तबाह होने का दावा किया गया है। अरबों डॉलर के नुकसान के बाद रूस की ओर से यूक्रेन पर बड़े हमले का अंदेशा जताया जा रहा है। अब व्लादिमीर पुतिन ने साफ किया है कि उनकी ओर से जवाबी हमला होगा। पुतिन की यह वॉर्निंग यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की टेंशन बढ़ाएगी, जो ड्रोन अटैक के बाद से जश्न के मूड में हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा
रूस ने यूक्रेन के ड्रोन अटैक के बाद अभी तक कोई आक्रामकता नहीं दिखाई है लेकिन रक्षा एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ा हो सकता है। इस दावे के पीछे सैटेलाइट तस्वीरों में सैन्य मूवमेंट और एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती है। इससे ना सिर्फ यूक्रेन बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका में भी चिंता है। माना जा रहा है कि ट्रंप की बुधवार को पुतिन से बातचीत करने की वजह भी यही है।
सोने की कीमतों में आने वाली है बड़ी गिरावट
क्वांट म्यूचुअल फंड ने सोने की कीमतों में गिरावट की आशंका जताई है, लेकिन लंबी अवधि के निवेश के लिए इसे अच्छा विकल्प बताया है। फंड हाउस ने निवेशकों को बिटकॉइन में भी निवेश करने की सलाह दी है, खासकर जो ज्यादा जोखिम ले सकते हैं। इसके साथ ही, जून में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।
आने वाले दो महीनों में सोने की कीमतों में 12-15% तक की गिरावट आ सकती है। क्वांट म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को यह सलाह दी है। हालांकि, उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए सोना अभी भी अच्छा विकल्प है। फंड हाउस ने यह भी कहा है कि जो निवेशक ज्यादा जोखिम ले सकते हैं, उनके लिए बिटकॉइन आकर्षक निवेश हो सकता है। इसके अलावा, जून के महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 10-12% की बढ़ोतरी की संभावना है, खासकर उभरते बाजारों में जोखिम बढ़ने पर ऐसा हो सकता है। क्वांट म्यूचुअल फंड निवेशकों को अपनी संपत्ति को संतुलित रखने की सलाह दी है। टाटा गोल्ड ईटीएफ, एलआईसी एमएफ गोल्ड ईटीएफ और यूटीआई गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जैसे गोल्ड म्यूचुअल फंड ने अलग-अलग समय में अच्छा प्रदर्शन किया है।
क्वांट म्यूचुअल फंड के ये अनुमान ऐसे समय आए हैं जब बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के सराफा बाजार में सोने की कीमत 260 रुपये बढ़कर 99,260 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। वैश्विक बाजारों में मजबूती के संकेतों के बीच इसमें मामूली तेजी आई। 99.5 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 100 रुपये बढ़कर 98,700 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई।
सोच-समझकर पैसा लगाने की जरूरत
क्वांट म्यूचुअल फंड का मानना है कि अभी बाजार में उतार-चढ़ाव चल रहा है। लिहाजा, निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। फंड हाउस का कहना है कि सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है, लेकिन लंबी अवधि के लिए यह अभी भी फायदेमंद है।
क्वांट म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपने पोर्टफोलियो में सोने को जरूर शामिल करें। उनका कहना है कि अभी के आर्थिक माहौल में सोना स्थिरता प्रदान कर सकता है।
दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में बिटकॉइन उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो ज्यादा जोखिम ले सकते हैं। फंड हाउस का कहना है कि ग्लोबल लिक्विडिटी में कमी से क्रिप्टोकरेंसी पर थोड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन, भविष्य में इसकी संभावनाएं अच्छी हैं।
चिन्नास्वामी भगदड़ घटना पर रो पड़ा विराट कोहली का दिल
आरसीबी के सम्मान समारोह के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों की संख्या में घायल हुए। जब यह घटना हुई उस में आरसीबी की टीम स्टेडियम के अंदर आईपीएल 2025 के खिताब जीतने का जश्न मना रही थी, लेकिन जैसी ही भगदड़ की खबर टीम को मिली खुशी का माहौल गम में बदल गया।

आरसीबी के सम्मान समारोह के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों की संख्या में घायल हुए। जब यह घटना हुई उस में आरसीबी की टीम स्टेडियम के अंदर आईपीएल 2025 के खिताब जीतने का जश्न मना रही थी, लेकिन जैसी ही भगदड़ की खबर टीम को मिली खुशी का माहौल गम में बदल गया। इस दुख घटना पर आरसीबी और कर्नाटक क्रिकेट की तरफ से संयुक्त रूप से बयान जारी कर मृतकों की प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। ऐसे में अब आरसीबी के सबसे बड़े खिलाड़ी विराट कोहली ने भी भगदड़ की घटना पर अपना दुख जाहिर किया है।
विराट कोहली ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर आरसीबी के बयान को शेयर कर हुए लिखा, ‘मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं। पूरी तरह से टूट गया हूं।’ इस दुखद घटना के बाद फैंस को विराट कोहली की प्रतिक्रिया का इंतजार था। विराट कोहली ने जिस तरह से सोशल मीडिया पर अपनी बात उससे साफ पता चलता है कि उन्हें भगदड़ की घटना से कितना दुख हुआ है।
पूर्व क्रिकेटरों ने भी जताया शोक
विराट कोहली के अलावा भारतीय क्रिकेट टीम के कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी दुख जाहिर किया। भारतीय दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। इसके अलावा हरभजन सिंह, इरफान पठान और शिखर धवन से पूर्व क्रिकेटर इस घटना के बारे में जान कर पूरी तरह से स्तब्ध हो गए। भगदड़ की घटना पर आरसीबी के पूर्व क्रिकेटर एबी डिविलियर्स ने भी अपना दुख प्रकट किया।
बता दें कि आईपीएल 2025 के फाइनल में आरसीबी ने पंजाब किंग्स को 6 विकेट से करारी मात दी। 18 साल में आरसीबी का यह पहला आईपीएल ट्रॉफी था। आरसीबी के चैंपियन बनते ही आधी को बेंगलुरु में फैंस जश्न मनाने सड़क पर उतर गए और जमकर आतिशबाजियां की। बुधवार को आरसीबी की तरफ से एक विक्ट्री परेड निकाला जाना था, लेकिन अनियंत्रित भीड़ कारण इसे टाल दिया गया। आरसीब की पूरी टीम पहले विधान सभा पहुंची जहां मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। इस हजारों की संख्या में फैंस विधान के पास जमा हो गए थे। ऐसा ही हाल चिन्नास्वामी स्टेडियम का भी था जहां टीम जीत का जश्न मनाने पहुंची थी, लेकिन भगदड़ की दुखद घटना ने रंग में भंग डाल दिया।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग, क्या बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने कहा कि भारत में बने हथियार शक्तिशाली साबित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये हथियार किसी से कम नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के साथ हालिया संघर्ष में ड्रोन के इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ हथियार सरकार की प्राथमिकता होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने कहा कि भारत में बने हथियार शक्तिशाली साबित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये हथियार किसी से कम नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के साथ हालिया संघर्ष में ड्रोन के इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ हथियार सरकार की प्राथमिकता होंगे।
पाकिस्तान ने खुद माना नुकसान
पीएम मोदी ने अपने मंत्रिपरिषद से ऊंचे लक्ष्य रखने और उन्हें पाने के लिए कड़ी मेहनत करने को कहा। बैठक में एक प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ भारत की ताकत को दर्शाया गया। यह भी बताया गया कि पाकिस्तान ने खुद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुए नुकसान को माना है। एक अन्य प्रेजेंटेशन में अलग-अलग मंत्रालयों की खास उपलब्धियों को दिखाया गया। सरकार इन उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएगी, क्योंकि 9 जून को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा हो रहा है।
पीएम मोदी ने बैठक में कहा कि ये हथियार किसी से भी कम नहीं हैं। उन्होंने बदलते युद्ध के तरीकों पर भी बात की। उनका इशारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष में ड्रोन के इस्तेमाल की ओर था। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ हथियार और प्लेटफॉर्म सरकार की प्राथमिकता होंगे।
अनिल अंबानी को मिली इस सफलता के बाद रॉकेट बन गया ये शेयर
अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर में जबरदस्त उछाल आया है। कंपनी को पिछली तिमाही में भारी मुनाफा हुआ है। रिलायंस डिफेंस ने राइनमेटॉल एजी के साथ साझेदारी की है। कंपनी ने 155 मिमी आर्टिलरी गोला-बारूद का सफल डिजाइन तैयार किया है। कंपनी को रक्षा मंत्रालय से 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है।
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के शेयर हवा से बात कर रहे हैं। बुधवार को यह शेयर 11.27 फीसदी उछलकर 380.50 रुपये पर बंद हुआ। एक समय यह अपने 52 हफ्तों के ऊंचे स्तर 385.90 रुपये तक पहुंच गया था। इस तेजी के कई कारण हैं। कंपनी ने जनवरी-मार्च 2025 तिमाही में 4,387 करोड़ रुपये का कर पश्चात लाभ (PAT) दर्ज किया है। जबकि पिछली तिमाही में उसे 3,298 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा था। इसके अलावा कंपनी ने रक्षा क्षेत्र में एक रणनीतिक साझेदारी भी की है। इसने भारत में गोला-बारूद के स्वदेशी डिजाइन और विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इससे आने वाले वर्षों में इसे 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अवसर मिलने की उम्मीद है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के शेयर पिछले एक महीने में करीब 46 फीसदी बढ़े हैं। कंपनी ने हाल ही में शेयर बाजारों को सूचित किया कि जनवरी-मार्च 2025 तिमाही के लिए उसका कर पश्चात लाभ (PAT) 4,387 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछली तिमाही में 3,298 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।
धड़ाधड़ कर रही है पार्टनरशिप
कंपनी का समेकित EBITDA (514 करोड़ रुपये की असाधारण आय के लिए समायोजित) चौथी तिमाही में बढ़कर 8,876 करोड़ रुपये हो गया। यह तीसरी तिमाही में 1,136 करोड़ रुपये था जो 681 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है।
रिलायंस डिफेंस लिमिटेड और डसेलडोर्फ स्थित राइनमेटॉल एजी (एक प्रमुख जर्मन हथियार निर्माता) ने गोला-बारूद के क्षेत्र में एक रणनीतिक साझेदारी की है। कंपनी ने कहा कि यह रिलायंस डिफेंस के लिए तीसरी बड़ी साझेदारी है, जो डसॉल्ट एविएशन और फ्रांस के थेल्स ग्रुप के साथ सफल रणनीतिक गठबंधन के बाद हुई है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ईपीसी सेवाएं प्रदान करने और दिल्ली में बिजली वितरण के व्यवसाय में लगी हुई है। यह रक्षा क्षेत्र और मेट्रो, टोल रोड और हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों में परियोजनाओं को लागू, संचालित और बनाए रखती है। इसने मुंबई मेट्रो लाइन वन परियोजना को भी निष्पादित किया है। मार्च 2025 तक, कंपनी में प्रमोटरों की 16.50 फीसदी हिस्सेदारी थी।
अगली पीढ़ी के गोला-बारूद बना रही कंपनी
अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अगली पीढ़ी के 155 मिमी आर्टिलरी गोला-बारूद को सफलतापूर्वक डिजाइन और विकसित करने वाली पहली भारतीय निजी क्षेत्र की फर्म बनकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जो लंबी दूरी की जमीनी युद्ध के लिए महत्वपूर्ण श्रेणी है।
पूर्वोत्तर में बिगड़े हालात: सिक्किम का लाचेन गांव पूरी तरह से कटा; नौ लाख लोग प्रभावित, अब तक 50 की मौत
मानसून ने समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र को कवर कर लिया है और वहां पिछले कई दिनों से भारी बारिश हो रही है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर मिजोरम समेत सभी राज्यों में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। पूर्वोत्तर के राज्यों में बाढ़ और बारिश से नौ लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। मूसलाधार मानसूनी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्यों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। जानें ताजा अपडेट्स…

असम समेत पूर्वोत्तर के सभी सात राज्यों और सिक्किम में पिछले छह दिनों से लगातार हो रही बारिश से बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति और गंभीर हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कई सड़कें बंद हैं। ब्रह्मपुत्र समेत सात नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और सैकड़ों घर गिर गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। बारिश-बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 50 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सबसे अधिक असम के 19 लोग शामिल हैं। 1,500 से अधिक जलमग्न हुए हैं, लगभग 9 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों लोग राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं।
उत्तरी सिक्किम के चाटन में बारिश के कारण जगह-जगह हुए भूस्खलन से कई लोग फंस गए हैं। सेना और वायुसेना फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान चला रही है। रास्ते में फंसे 113 सैलानियों को दुर्गम रास्तों के जरिये लाचेन गांव तक पहुंचाया गया है, लेकिन भूस्खलन की वजह से यह गांव पूरी तरह से कट गया है। इन सैलानियों को निकालने के लिए चलाया गया अभियान बुधवार को खराब मौसम के कारण रोकाना पड़ा। अधिकारियों के मुताबिक, असम में 19, जबकि अरुणाचल प्रदेश में 12, मेघालय में 6, मिजोरम में 5, सिक्किम में 4, त्रिपुरा में 2 और नगालैंड और मणिपुर में एक-एक मौत हुई है।
पीएम आज अरावली की भूमि पर हरियाली के लिए शुरू करेंगे पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बृहस्पतिवार को अरावली पर्वतमाला में बंजर भूमि को उपयोग लायक बनाने के उद्देश्य से एक विशाल परियोजना का शुभारंभ करेंगे। इसके तहत 29 जिलों में करीब एक हजार नर्सरी विकसित की जाएंगी। इस मौके पर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों से इस अभियान में शामिल होंगे।

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण दिल्ली के रिज क्षेत्र में पौधे लगाएंगे, जो गुजरात से राष्ट्रीय राजधानी तक 700 किमी फैली पर्वत शृंखला का हिस्सा है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत के जलवायु लक्ष्य को पूरा करने में अहम साबित होगी। सरकार ने मार्च 2023 में अरावली ग्रीन वॉल पहल पेश की थी। इसका लक्ष्य गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में लगभग 64 लाख हेक्टेयर भूमि को शामिल करते हुए पांच किमी चौड़ी हरित पट्टी बफर जोन स्थापित करना है। इसके भीतर, लगभग 42% भूमि बंजर है। नई पहल को इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि वनों की कटाई, खनन, पशुओं के चरने और मानव अतिक्रमण से मरुस्थलीकरण की स्थिति और खराब हो रही है।
चार राज्यों से लगती है अरावली की 700 किलोमीटर की सीमा
गौरतलब है कि अरावली की 700 किलोमीटर की सीमा चार राज्यों से लगती है, जिसमें दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा की सीमाएं शामिल हैं। इसमें 29 जिले, चार बाघ अभयारण्य और 22 वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।
एक पेड़ मां के नाम का दूसरा चरण होगा शुरू
पीएम मोदी अरावली पर्वत शृंखला को हराभरा करने की पहल की शुरुआत के साथ एक पेड़ मां के नाम का दूसरा चरण का भी आगाज करेंगे। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान एक व्यापक जन अभियान बन गया है, जिसे पीएम मोदी ने पहली बार 5 जून 2024 को शुरू किया था। अब इस अभियान को 2025 में भी आगे बढ़ाया जा रहा है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के तहत अब तक 109 करोड़ पेड़ लगाए जा चुके हैं।
‘हम महात्मा गांधी की अहिंसा की विरासत के वारिस हैं, लेकिन..’
आतंक के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति का संदेश लेकर भारतीय सांसद की टोली अमेरिका पहुंची, जिसका नेतृत्व कांग्रेस सांसद शशि थरूर कर रहें है। इस दौरान वॉशिंगटन डीसी स्थित नेशनल प्रेस क्लब में एक अहम बातचीत के दौरान शशि थरूर ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति, कश्मीर में विकास, पाकिस्तान की नापाक हरकतों और भारत की सैन्य कार्रवाई पर विस्तार से बात की।
थरूर ने कहा कि हम अपनी सच्चाई दुनिया के सामने रख रहे हैं। जिनसे भी मिले, सबने आतंकवाद की निंदा की और भारत के जवाबी कार्रवाई के अधिकार को सही ठहराया। थरूर ने कहा कि हमारा ध्यान देश की आर्थिक प्रगति पर है और यह आतंकी हमला उसी से ध्यान भटकाने की कोशिश थी।
विज्ञापन
आतंक के आगे नहीं झुकेंगे- थरूर
थरूर ने पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई को गैरजिम्मेदार और आम नागरिकों पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि 88 घंटे बाद पाकिस्तान खुद पीछे हटा और युद्ध रोकने की पेशकश की। हम तो शुरू से ही इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि हम महात्मा गांधी की अहिंसा की विरासत के वारिस हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि डर के साये में जीएं। आतंकवाद के आगे झुकेंगे नहीं, जवाब देंगे।
कश्मीर में शांति और टूरिज्म का बढ़ता ग्राफ- थरूर
बातचीत के दौरान थरूर ने बताया कि पिछले साल कश्मीर में अमेरिका के एलीट स्की टाउन ‘एस्पेन’ से भी ज्यादा पर्यटक आए और इस साल के शुरुआती महीनों में टूरिज्म में 100% बढ़ोतरी हुई। यह कश्मीर में शांति और विकास का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने हमले में पुरुषों को पत्नी-बच्चों के सामने मारा, महिलाओं को छोड़ दिया ताकि वे जाकर खौफ की कहानी सुनाएं। उन्होंने कहा कि सिंदूर का रंग खून से मिलता-जुलता है। जब महिलाओं का सिंदूर छीन लिया गया, तो हमने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए उस अपमान का जवाब दिया। यही हमारे जवाबी हमले का मकसद था, आतंक को मुंहतोड़ जवाब।
भारत पर हथियारों की निर्भरता का सच
इसके साथ ही थरूर ने यह भी साफ किया कि भारत अब रूस पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। हमने हथियार खरीद में विविधता लाई है। अमेरिका से भी हथियार लिए हैं और भविष्य में भी लेने को तैयार हैं। पाकिस्तान की तरह नहीं कि 81% हथियार सिर्फ चीन से ले।
पाकिस्तानी कबूलनामे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने दक्षिण पाकिस्तान के हैदराबाद से लेकर उत्तर-पश्चिम में पेशावर तक हमले किए। पाकिस्तान ने खुद माना कि भारत के हमले इतने असरदार थे कि उन्हें खुद पहल कर युद्ध रोकना पड़ा।
विशिष्ट सेवा सम्मान-परम विशिष्ट सेवा सम्मान से नवाजे गए 92 सैन्य अधिकारी; राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिफेंस इन्वेस्टिचर सेरेमनी 2025 (फेज-2) के दौरान सशस्त्र बलों, भारतीय तटरक्षक बल और सीमा सड़क संगठन के 92 अधिकारियों और जवानों को उनके असाधारण सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया। इस समारोह में भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार और सदर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश के उच्चतम शांति कालीन सैन्य सम्मान परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) से नवाजा गया।

इनके अलावा हाल ही में अंडमान और निकोबार कमांड के प्रमुख बने लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश सिंह राणा, ले. जनरल अमरदीप सिंह औजला, एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी, एयर मार्शल नागेश कपूर को भी विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) से नवाजा गया। साथ ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चर्चा में रहे ले. जनरल राजीव घई को उत्तम युद्ध सेवा मेडल (यूवाईएसएम) से नवाजा गया। यह मेडल ऑपरेशन या युद्ध के समय बेहतर काम करने वालों को दिया जाता है।
विज्ञापन
किसे मिला अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम)?
वहीं बात अगर अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) मेडल की करें तो इस बार ये मेडल लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार को मिला। लेफ्टिनेंट कुमार 2025 की गणतंत्र दिवस परेड के कमांडर थे। बता दें कि यह मेडल भी बहुत अहम होता है और बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है।
कुल कितने लोगों को क्या-क्या मेडल मिले?
अब बात अगर इस समारोह में मेडल पाने वाले सभी अधिकारियों की करें तो, कुल मिलाकर 30 अधिकारियों को परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम) दिया गया। वहीं पांच अधिकारियों को उत्तम युद्ध सेवा मेडल (यूवाईएमएम) दिया गया, जबकि कुल 57 अधिकारियों को अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने सराहा
राष्ट्रपति द्वारा सेना के अधिकारियों को मिले सम्मान के बाद रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सैनिकों का मनोबल बढ़ाया। जहां रक्षा मंत्रालय ने लिखा कि यह सम्मान हमारे जवानों की बहादुरी, समर्पण और कड़ी मेहनत को सलाम करने का तरीका है। यह पदक सिर्फ सम्मान नहीं हैं, बल्कि उनके त्याग और देशभक्ति की पहचान हैं।
आपदा के कारण घर छोड़ने वालों में तीसरी बड़ी आबादी भारतीय
भारत में 2015 से 2024 के बीच बाढ़ और तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वजह से 3.2 करोड़ लोगों को अपने ही देश में अपने रहने की जगह बदलने को मजबूर होना पड़ा। अपने ही देश में दर-ब-दर होने वालों की यह संख्या दुनिया में तीसरी सबसे अधिक है। इस तरह के आबादी के विस्थापन में चीन पहला और फिलीपीन दूसरा देश है। विश्व पर्यावरण दिवस से पूर्व यह खुलासा जिनेवा स्थित आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र (आईडीएमसी) की ताजा रिपोर्ट में हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्राकृतिक आपदाओं की वजह से दुनिया में 2015-24 बीच 210 देशों में कुल 26.48 करोड़ लोगों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। इस तरह से आपदा की वजह से घर छोड़ने (आपदा विस्थापन) वालों में पूर्वी और दक्षिण एशिया के लोग सबसे अधिक रहे। दुनिया में देशों के स्तर पर विस्थापन पर नजर डाले तो बांग्लादेश, चीन, भारत, फिलीपीन और अमेरिका में बीते 10 साल में सबसे अधिक आंतरिक विस्थापन के मामले देखने को मिले। इस सूची में 4.69 करोड़ विस्थापित लोगों के साथ चीन अव्वल रहा तो 4.61 करोड़ लोगों के विस्थापन के बाद फिलीपीन दूसरे नंबर पर रहा।
2024 में दुनियाभर में 4.58 करोड़ लोग हुए विस्थापित
आईडीएमसी की रिपोर्ट चेताती है कि यदि मौजूदा जलवायु स्थितियां बनी रहीं, तो भविष्य में हर साल औसतन 3.2 करोड़ लोग नदी और समुद्री तटों की बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी आपदाओं के कारण विस्थापित हो सकते हैं। यह खतरा 100% बढ़ जाएगा।
दुनियाभर में महज 2024 में ही 4.58 करोड़ लोगों को आपदाओं के चलते घर छोड़ना पड़ा। यह विस्थापन अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। यह बीते 10 साल के औसत 2.65 करोड़ से काफी ऊपर है। भारत में 2024 में 54 लाख लोगों को बाढ़, तूफान और अन्य आपदाओं के कारण विस्थापित होना पड़ा और विस्थापन का यह आंकड़ा 12 वर्षों में सबसे अधिक रहा।
दक्षिण एशियाई देशों में अगले 10 साल में गर्मी का कहर : विश्व बैंक
दक्षिण एशियाई देशों में अगले दशक में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जोखिम से लचीलेपन तक : दक्षिण एशिया में लोगों और फर्मों को अनुकूलन में मदद करना शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में विश्व बैंक ने चेताया है कि दक्षिण एशिया चरम मौसम में तेजी से बढ़ोतरी झेल रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस से पूर्व मंगलवार को जारी विश्व बैंक की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक लगभग 90% आबादी के गर्मी से जूझने की आशंका है।
रिपोर्ट में सुझाया कि दक्षिण एशियाई देशों की सरकारें नीतिगत सुधारों से लोगों और व्यवसायों को चरम मौसम से निपटने में मदद कर सकती हैं। विश्व बैंक की दक्षिण एशिया क्षेत्र की प्रमुख अर्थशास्त्री फ्रांजिस्का ओहन्सोर्ग ने कहा कि निजी क्षेत्र अगर पूरी तरह अनुकूलन करे तो क्षेत्र में संभावित जलवायु क्षति का एक-तिहाई हिस्सा टाला जा सकता है।




