एचएल दुसाध
भीषण प्रतिकूलता के मध्य जान को जोखिम में डालकर राजनीति कर रहे राहुल गांधी को पांच महीने के अन्तराल के बाद फिर जान से मारने की धमकी मिली है।पिछली धमकी 2025 के सितंबर में केरल के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व नेता नेता प्रिंटू महादेवन की ओर से आई थी। तब उन्होंने एक लाइव टीवी डिबेट में राहुल गांधी की छाती में गोली मारने की धमकी दी थी। अब इस आशय का एक सनसनीखेज वीडियो राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा से वायरल हुआ है, जिसमें एक युवक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित देश के 25 सांसदों को सरेआम गोली मारने की धमकी दिया है।वीडियो में आरोपी के पीछे दीवार पर पीएम मोदी और स्पीकर ओम बिरला की हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर लगी हुई है।
धमकी देने वाला व्यक्ति लोकसभा में ओम बिड़ला के खिलाफ विपक्ष के सांसदों के व्यवहार से नाराज था। वीडियो में वह सरेआम कह रहा है कि राहुल गांधी को घर में घुसकर मारूंगा और अपना दुस्साहस भी दिखा रहा है कि मुझे जेल भेजना हो तो भेज दो। उसने राहुल गांधी को धमकी देते हुए कहा है,’25 सांसदों ने ओम बिड़ला के खिलाफ जो बदतमीजी की है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। अगर ऐसी घटना दोबारा हुई, तो हम उन सांसदों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ करेंगे। मेरा मानना है यह घटना राहुल गांधी के आदेश पर हुई है। राहुल गांधी ध्यान से सुन लो, अगर ऐसी घटना दोबारा हुई, हम तुम्हें तुम्हारे घर में घुसकर गोली मारेंगे।’
सोशल मीडिया पर वीडियो आने के बाद, कोटा में पुलिस ने तत्परता से एक्शन लिया और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस के हत्थे चढ़े इस व्यक्ति की पहचान राज आमेर के रूप में हुई है। पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राज कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ चार अलग-अलग मामले दर्ज हैं। बीजेपी और करणी सेना के नेताओं ने कह दिया है कि उससे उनका दूर-दूर का कोई सम्बन्ध नहीं है। वहीं आरोपी ने हिरासत में आने के बाद गिड़गिड़ाते हुए कहा है कि उसे इस वायरल वीडियो की कोई जानकारी नहीं है। एक फ़र्जी वीडियो बनाकर उसके खिलाफ साजिश रची गई है। खुद को सनातनी बताते हुए उसने कहा है कि वह भारत को एक हिन्दू राष्ट्र के रूप में देखना चाहता है!
जिन हालातों में गोडसे ने गांधी को गोली मारी, पैदा किये जा रहे हैं वैसे हालात!
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की ओर से कहा गया है, ‘ ओम बिड़ला का लाडला बीजेपी नेता बीजेपी नेता खुलेआम नेता विपक्ष राहुल गांधी और 25 सांसदों को घर में घुसकर गोली मारने की धमकी दे रहा है। ये नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नफरती सोच का नतीजा है। सोशल मीडिया पर इस गुंडे की बहुत सी फोटो और वीडियो वायरल है, जिसमे वह ओम बिड़ला के साथ नजर आ रहा है।सवाल है: क्या वह ओम बिड़ला के शह पर राहुल गांधी को धमकी दे रहा है? आखिर इस गुंडे की इतनी हिम्मत कैसे हुई की उसने ओम बिड़ला का नाम लेते हुए धमकी भरा वीडियो बनाया ?
इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और इस बात की जांच की जाए कि किसके कहने पर यह धमकी दी गई !’ इस पर कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा है, ’ देश का दुर्भाग्य है कि सत्ताधारी पार्टी नफरत, शत्रुता और विद्वेष की जहरीली संस्कृति को बढ़ावा दे रही है!’ इस घटना पर अख़बारों की राय का सही प्रतिबिम्बन देशबंधु की सम्पादकीय के इस अंश में हुआ है! ‘राहुल को विभिन्न अवसरों पर दी गई कई धमकियों में से यह ताज़ातरीन धमकी भाजपा के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करती है- इस के बाद कांग्रेस ने पूछा था कि क्या यह राहुल गांधी के खिलाफ रची जा रही कोई बड़ी, भयावह साज़िश है?
क्या भाजपा आपराधिक धमकियों, हिंसा और यहां तक कि जान से मारने की धमकियों की राजनीति का समर्थन करती है? क्या भाजपा विपक्ष के नेता (जो संवैधानिक पद पर हैं) और अन्य विपक्षी नेताओं- जो उसके कुशासन के खिलाफ आवाज उठाते हैं, के ख़िलाफ़ हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है और क्या भाजपा यानी मोदी-शाह की इसमें सहमति है?
हालांकि कांग्रेस की शिकायत के बावजूद नेता प्रतिपक्ष की जान लेने की धमकी देने वाले इस व्यक्ति पर कोई कठोर कार्रवाई की गई हो, ऐसी ख़बर नहीं है। बहरहाल, राहुल को मिली ताज़ा धमकी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे देश में एक और गोडसे तैयार करने जैसा बताया है। उन्होंने ने लिखा कि आरएसएस-भाजपा का गलियारा ‘गोडसे फैक्ट्री’ है। राहुल गांधी और ‘25 सांसदों’ के खिलाफ तथा कथित करणी सेना द्वारा जारी की गई धमकी कोई छिटपुट घटना नहीं है।
यह एक सोची-समझी और धूर्तता से भरपूर योजना का हिस्सा है। सबसे पहले, किरन रिजिजू ने सार्वजनिक रूप से झूठ बोला और देश को गुमराह किया कि कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में ओम बिड़ला को गाली दी। फिर, विभिन्न मंचों पर भाजपा सांसदों ने एक समान बात दोहराना शुरू कर दिया कि राहुल गांधी ‘भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा’ हैं। यह विपक्ष को बदनाम करने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों- विशेष रूप से राहुल गांधी- के ख़िलाफ़ हिंसा को वैध ठहराने का एक सुनियोजित अभियान है। कट्टरपंथ का यही तरीका है- वे एक झूठ गढ़ते हैं, उसे बार-बार दोहराकर फैलाते हैं, राजनीतिक सत्ता के बल पर उसे वैधता प्रदान करते हैं, और तब तक उसका प्रसार करते हैं जब तक कि उनके अनुयायी घृणा और हिंसा के लिए उकसाए न जाएं। इसी तरह उस समय गोडसे का निर्माण हुआ था। इसी तरह आज एक और गोडसे को उकसाया जा रहा है।
पवन खेड़ा ने पूरे हालात का सही चित्र खींचा है। 30 जनवरी, 1948 से पहले गांधी जी के खिलाफ भी कई बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें हिन्दू विरोधी दिखाया गया था, जिसके बाद दक्षिणपंथियों ने गांधी जी की हत्या की षड्यंत्र रचा, जिसे नाथूराम गोडसे ने अंजाम दिया। संघ और उससे जुड़े लोग अब भी इसे हत्या न कहकर गांधी वध कहते हैं। शब्दों के इस हेरफेर में भी बड़ी चालाकी है। वध और हत्या दोनों ही किसी के प्राण लेने की क्रियाएं हैं, लेकिन वध आमतौर पर न्याय, धर्म या समाज की भलाई के लिए किसी दुष्ट या अत्याचारी को मारने को कहते हैं (जैसे- कंस वध, महिषासुर वध) वध को नैतिक आधार दिया गया है।
जबकि हत्या किसी निर्दोष, निहत्थे या सामान्य व्यक्ति को स्वार्थ, द्वेष या आपराधिक भावना से जान से मारना है। अब सोचिए किस चालाकी से गांधी वध शब्द का इस्तेमाल कर संघ गांधी जी को अत्याचारी या दुष्ट बताता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भले ही अलग-अलग मौकों पर मोदी राजघाट जाएं, लेकिन गोडसे का महिमामंडन करने वालों का वे आज तक बाल भी बांका नहीं कर पाये हैं। अब राहुल गांधी के खिलाफ माहौल बनाने वालों पर भी मोदी सरकार कोई कार्रवाई करेगी, इसकी कोई उम्मीद नहीं है। दरअसल, इस बार बजट सत्र में राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष मोदी सरकार पर भारी पड़ा है। पूर्व सेनाध्यक्ष की किताब से लेकर एपस्टीन फ़ाइल्स तक मोदी पूरी तरह घिर चुके हैं।
इन मुद्दों पर न राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया गया, न मोदी ने लोकसभा में आने की हिम्मत दिखाई। ऊपर से इल्ज़ाम लगा दिया कि मोदी की जान को कांग्रेस की महिला सांसदों से ख़तरा था। यह तथाकथित रहस्योद्घाटन खुद ओम बिड़ला ने ही किया था। इसके बाद विपक्ष पर किरन रिजिजू ने आरोप लगाया कि सांसदों ने बिड़ला के कक्ष में बदतमीजी की और उनके साथ गाली-गलौच भी की। एक इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे ख़तरनाक इंसान बन गए हैं।
क्योंकि वह भारत विरोधी ताकतों से जुड़े हैं। वह विदेश और देश में नक्सलियों, अतिवादी विचारकों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मिलते हैं। अब सवाल ये है कि अगर राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं, तो मोदी सरकार इंतजार किस बात का कर रही है। राहुल पर अब तक कोई मामला दर्ज़ क्यों नहीं किया गया है। मानहानि के तो ढेरों मुकदमे राहुल गांधी झेलते ही रहते हैं, एक मामला देश विरोधी गतिविधि का भी बन जाएगा। मगर बजाए कार्रवाई करने के, केवल जुबानी जमाखर्च से मोदी सरकार काम चला रही है!‘
बेनकाब हो रहा है गोडसेवादी भाजपा का असली चेहरा
इस घटना के लिए सोशल मीडिया पर जो प्रतिक्रियाएं आईं, वह भी इसके लिए भाजपा के उकसावे को ही जिम्मेवार बताती प्रतीत हो रही हैं। आमेर का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया ऐसे बयानों से पट गई- ‘धमकी शायद वर्तमान भाजपा प्रतिनिधित्व की परेशानी है – ये वो चरम दक्षिणपंथी संघी हैं जिन्हें शायद मोदी-योगी हिन्दुत्व भी फेल होता लगता है और इन्हें भाजपा की कमान चाहिए। इन्हें कौन समझाए कि गांधी ना तो गोडसे से डरे हैं ना ही गोडसे की गोलियों से!’ ‘भाजपा ने अपने एक कार्यकर्ता से राहुल गांधी की गोली मारकर हत्या करवाने की धमकी दिलवाकर गोड़सेवादी भाजपा का असली चेहरा बेनकाब किया !’
‘किरन रिजिजू और निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को लेकर भ्रम फैलाया, झूठ फैलाया और अब राहुल गांधी को वीडियो बनाकर गोली मारने की धमकी सार्वजनिक तौर पर दी जा रही है । यह गम्भीर मामला है देश में कानून व्यवस्था खत्म हो चुकी है। राष्ट्रपति केन्द्र सरकार को बर्खास्त करें’, ‘गोडसे के वैचारिक वंशज चाहे जितनी कोशिश कर लें अब इस देश में कोई गोडसे किसी गांधी को देश से छीन नहीं पाएगा। देश गोडसे और उसके वैचारिक वंशजों को समूल नष्ट कर देगा, यह निश्चित है।’ ‘गाँधी परिवार है तो भारत जिन्दा है, राहुल गाँधी जिन्दाबाद!’ ‘वीर हो वीर कभी डरते नहीं हैं, हमेशा मौत से खेलते हैं।
असली देशभक्त वो है जो देश हित की आवाज उठाता है।आगे बढ़ो आपके पीछे पूरा भारत है, जबकि मैं कांग्रेस का ना सदस्य हूं और ना कांग्रेस पार्टी में हूँ। आपकी बात मुझे अच्छी लगता है। देश मांग रहा है कि ऐसा ही वीर 2029 में भारत का प्रधानमंत्री बने। राहुल जी को झारखंडी क्रांतिकारी जोहार!’ जो देश की हित में जान देने के लिए तैयार, वो मोदी की तरह नहीं है कायर।’ ‘मोदी सरकार देश के लिए खतरा है। देश में गुंडाराज चल रहा है, एक भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी जी को मोदी सरकार के गुंडे गोली मारने के लिए धमकी दे रहे हैं। मोदी सरकार श्री राहुल गांधी जी की कभी भी हत्या करवा सकती है, सुप्रीम कोर्ट न्यायालय से अपील है कि लोकसभा में विपक्ष का नेता श्री राहुल गांधी जी को सुरक्षा बढ़ाने के लिए मोदी सरकार को आदेश दें!’
जरूरी हो गया है राहुल गांधी की सुरक्षा बढ़ाना
बहरहाल राहुल गांधी को जान से मारने की जो धमकी दी गई , उसके पीछे आम लोगों को यही दिखता है कि किरन रिजिजू , निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह इत्यादि ने राहुल गांधी को लेकर जो भ्रम और झूठ फैलाया है, उसी के फलस्वरूप ऐसी घटना सामने आई है। इसमें कोई शक नहीं कि जिस तरह कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका से हुए व्यापार समझौते और एपस्टीन फाइल्स पर मोदी सरकार को घेरा है, उससे मोदी पूरी तरह असहाय हो गए हैं और भाजपा का उनके प्रति डर सामने आने लगा। ऐसे में मोदी को बचाने के लिए कि किरन रिजिजू , निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह इत्यादि उनके खिलाफ माहौल बनाने के लिए सामने आए।
मोदी के बचाव में इन्होंने जिस तरह राहुल गांधी को भारत की सुरक्षा के लिए सबसे ख़तरनाक इंसान बताना शुरू किया है, उससे उससे संघ- भाजपा के फैक्ट्री में तैयार हो रहे गोडसेवादियों के एक्शन में आने की सम्भावना बढ़ गई है। इसके साथ ही राहुल गांधी पर खतरा भी बढ़ गया है। यही कारण है कि चारों ओर से राहुल गांधी की सुरक्षा बढ़ाये जाने की मांग उठने लगी है। यह मांग इसलिए भी उठने लगी है क्योंकि राहुल गांधी संघ-भाजपा अपनी अधिकतम ऊर्जा राहुल गांधी को ध्वस्त करने में लगाने लगे हैं । उनको खासतौर से निशाने पर लेने के कारण संघ-भाजपा के लोगों ने उनपर देश भर की अदालतों में दो दर्जन से अधिक मुकदमे कर रखा है।
वह हर महीने कम से कम दो- तीन मुकदमों में पेश होते हैं। उनके मुकदमों की सुनवाई करने वाले जज उनके साथ संघ के कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार करते हैं। उनके प्रति संघ-भाजपा के लोगों का गुस्सा इसलिए भी और बढ़ गया है, क्योंकि राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक़ वह एक मंजे हुए शतरंज के खिलाड़ी की तरह मोदी सरकार और बीजेपी के इकोसिस्टम को अपने इशारों पर नचा रहे हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि इस खेल के नियम, एजेंडे और रिजल्ट को वे ही तय करेंगे। लेकिन उनकी सुरक्षा बढ़ाने की सबसे बड़ी ज़रूरत इसलिए आन पड़ी है, क्योंकि वह संघ के उस हिन्दू राष्ट्र की राह में सबसे बड़े अवरोध बनकर खड़े हो गए हैं, जिसके संविधान का प्रारूप 2025 के कुम्भ मेले में सामने आ चुका है!
संघ के हिन्दू राष्ट्र का प्रधान लक्ष्य, शक्ति के समस्त स्रोत सवर्ण पुरुषों के हाथ में सौंपना
एक बच्चे तक को पता है कि आरएसएस का जन्मकाल से ही सपना हिन्दू धर्माधारित वर्ण – व्यवस्था को जमीन पर उतारना रहा है, जिसके लिए वह भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की ताक में रहा। संघ जिस वर्ण-व्यवस्था के द्वारा देश चलाने का आग्रही रहा , हिन्दू धर्माधारित वह वर्ण-व्यवस्था एक ऐसी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था रही, जिसमें शक्ति के समस्त स्रोतों – आर्थिक,राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक- के भोग के दैवीय- अधिकारी सिर्फ हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग (मुख-बाहु-जंघे) से जन्मे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य पुरुष रहे: इसमें दलित, आदिवासी, पिछड़े और आधी आबादी सहित प्रायः 92% आबादी के लिए शक्ति के स्रोतों का भोग पूरी तरह अधर्म रहा! ऐसे में कहा जा सकता है कि हिन्दू/सनातन धर्म में प्रचंड रूप से आस्थाशील संघ अपने जन्मकाल से हिन्दू राष्ट्र के जरिये भारतवर्ष में एक ऐसी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को आकार देने पर अपनी गतिविधियाँ केन्द्रित रखा, जिसमें शक्ति के समस्त स्रोत 7.5% संख्या के स्वामी सवर्ण पुरुषों के लिए आरक्षित होता !
सवर्णों के हाथ में शक्ति के समस्त स्रोत आरक्षित करने के मकसद से डॉ। हेडगेवार से लेकर गोलवलकर, डीडी उपाध्याय इत्यादि ने जो अक्लांत प्रयास किया ,उसके फलस्वरूप संघ की स्थापना के प्रायः 75 साल बाद उसके राजनीतिक संगठन भाजपा के हाथ में सत्ता आई और संघ प्रशिक्षित पहले प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी। वाजपेयी ने अपनी सम्पूर्ण क्षमता का इस्तेमाल हिन्दू राष्ट्र के निर्माण और शक्ति के समस्त स्रोत हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग से जन्मे लोगों के हाथों में देने में किया। लेकिन हिन्दू राष्ट्र के सपने को लगभग शिखर तक पहुँचाने में कामयाब हुए संघ प्रशिक्षित दूसरे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी!
मोदी का धुआंधार पिछला ग्यारह साल हिन्दू राष्ट्र निर्माण का स्वर्णिम काल रहा, जिसमें उन ढेरों सरकारी उपक्रमों को औने-पौने दामों में बेचा गया, जहां वंचित जातियों को जॉब मिलता है; इस दौर में संविधान की बुरी तरह उपेक्षा करते हुए सवर्णों को 10% आरक्षण दिया गया ; इसी काल में लैटरल एंट्री के जरिये अपात्र सवर्णों को आईएएस जैसे पदों पर बिठाने का प्रावधान रचा गया और इसी काल में संघ अपने राजनीतिक संगठन भाजपा के जरिये जिस हिन्दू राष्ट्र के सामाजिक- आर्थिक विचार को जमीन पर उतारने का सपना अपने जन्म काल से देखता रहा , उसके आसार इतने प्रबल हुए कि साधु- संतों ने उसके संविधान का प्रारूप 2025 के महाकुम्भ में जन समक्ष ला दिया। इसे 12 महीने, 12 दिन में, 25 विद्वानों ने मिलकर तैयार किया है, जिसके पीछे चारों पीठ के शंकराचार्यों की सहमति है।
501 पन्नों के इस संविधान की निर्माण समिति में उत्तर भारत के 14 और दक्षिण भारत के 11 विद्वान शामिल किए गए हैं। संविधान निर्माण समिति ने धर्मशास्त्रों के साथ ही रामराज्य, श्रीकृष्ण के राज्य, मनुस्मृति और चाणक्य के अर्थशास्त्र का अध्ययन करने के बाद हिंदू राष्ट्र के संविधान को तैयार किया गया है। संविधान निर्माण समिति में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वान भी शामिल रहे। इसके संरक्षक शांभवी पीठा धीश्वर के अनुसार 2035 तक हिंदू राष्ट्र की घोषणा का लक्ष्य रखा गया है। बहरहाल 2035 से जिस हिन्दू राष्ट्र के संविधान के जरिये संघ अपनी मनचाही सामाजिक – आर्थिक व्यवस्था लागू करना चाहता है, उस हिन्दू राष्ट्र की राह में एवरेस्ट बनकर सामने आ गए है राहुल गांधी!
राहुल गांधी हैं हिन्दू राष्ट्र की राह में सबसे बड़ा अवरोध
लम्बे समय से राजनीति में सक्रिय राहुल गांधी जब भारत जोड़ो यात्रा के बाद फरवरी 2023 में रायपुर में आयोजित कांग्रेस के 85 वें अधिवेशन से सामाजिक न्याय का दामन थामे, उससे हिन्दू राष्ट्र की राह में एक बड़ा अवरोध खड़ा हो जायेगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी ! चूंकि चुनाव को ठीक से सामाजिक न्याय पर केन्द्रित करने पर भाजपा हमेशा हार वरण करने के लिए अभिशप्त रहती है, इसलिए राहुल गांधी ने रायपुर से शुरू किये गए सामाजिक न्याय के मिशन को जब 5 अप्रैल , 2024 को 5 न्याय , 25 गारंटियों और 300 वादों से युक्त कांग्रेस के घोषणापत्र के जरिये 2024 के लोकसभा चुनाव में सामाजिक न्याय को शिखर पर पहुंचाया, मोदी के 400 पर के मंसूबों पर पानी तो फिरा ही, वह हारते- हारते भी बचे, जिसमें उनके तारणहार बने थे चुनाव आयुक्त राजीव कुमार!
लोकसभा चुनाव बाद वित्तमंत्री सीतारमण के पति प्रकला प्रभाकर सहित कई लोगों ने कहा कि केंचुआ द्वारा 79 सीटों पर हेराफेरी नहीं किया गया होता इंडिया ब्लाक सत्ता में होता और राहुल गांधी होते पीएम ! राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय के एजेंडे के जोर से हिन्दू राष्ट्र के सपने को प्रायः जमींदोज कर दिया है, इस बात को ध्यान में रखते हुए ही मोदी चुनाव आयोग के सहारे हारी हुई बाजी पलटने का योजना बनाये और हरियाणा तथा महाराष्ट्र में चमत्कार घटित करने में सफल हो गए ! हिन्दू राष्ट्र की राह में राहुल गांधी के अवरोध को ध्यान में रखते हुए ही मोदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आगे करके देश के राजनीति की दिशा तय करने वाले बिहार से विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू की और इसका उन्हें बड़ा सुफल मिला! विपक्ष के तमाम विरोध के बावजूद 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है!
राहुल गांधी जाति जनगणना के बाद पॉवर स्ट्रक्चर में ‘जितनी आबादी- उतना हक़’ लागू करने की घोषणा के जरिये सामाजिक न्याय की राजनीति को जो बड़ी उंचाई दे दिए हैं, उससे मोदी अब आगे चुनाव ही नहीं जीत पाएंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि न्याय योद्धा राहुल गांधी द्वारा सामाजिक न्याय की राजनीति को शिखर प्रदान करने के बाद हिन्दू राष्ट्र का सपना खटाई में पड़ गया है। अब सिर्फ एसआईआर के जरिये ही हिन्दू राष्ट्र का ख्वाब पूरा हो सकता है! इस बात को ध्यान में रखते हुए देश में बड़े पैमाने एसआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया प्रायः राष्ट्रव्यापी शुरू करने के बावजूद भाजपा नेतृत्व को विश्वास नहीं है कि राहुल गांधी के रहते, संघ का हिन्दू राष्ट्र का सपना पूरा हो पायेगा! क्योंकि उन्होंने तीन साल पहले 24-26 फरवरी तक चले रायपुर अधिवेशन से निकले सामाजिक न्याय के एजेंडे को आज एवरेस्ट सरीखी उंचाई दे दी है!
2023 में किसी ने कल्पना नहीं किया होगा कि राहुल गांधी कभी बोलेंगे कि ‘नौकरशाही या सेना हो या कॉर्पोरेट सेक्टर , इनमे 10 प्रतिशत उच्च जातियों को नौकरी मिलती है। यहाँ तक कि देश की सेना पर भी इन्हीं उच्च जातियों का कण्ट्रोल है, जबकि देश कि 90 प्रतिशत आबादी ओबीसी, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक सत्ता की मुख्यधारा से बाहर हैं। उन्हें न अवसर मिलते हैं न प्रतिनिधित्व! लेकिन राहुल गांधी अब खुलकर कह रहे है कि अगर 500 बड़ी कंपनियों की सूची देखी जाए तो उनमें दलित, अत्यंत पिछड़ी जातियां, महादलित, अल्पसंख्यक और आदिवासी नजर नहीं आएंगे: ये सभी लोग देश की केवल 10% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सवर्ण जातियों से आते हैं।
वह आज बेझिझक कहने लगे हैं कि बैंकों का सारा धन, सारी नौकरियां और नौकरशाही में महत्वपूर्ण पद इन्हीं सवर्ण जातियों को मिलते हैं। राहुल गांधी लम्बे समय से चली आ रही सामाजिक न्याय और जाति वार जनगणना की अपनी मांग से जोड़ते हुए अब खुलकर कह रहे हैं कि अगर सच में संविधान की रक्षा करनी है , तो हमें जानना होगा कि कितने दलित, ओबीसी, महिलाएं और अल्पसंख्यक हमारे सिस्टम में शामिल हैं। दावा किये जा रहे है कि 90 प्रतिशत भारतीयों को यदि सहभागिता के अधिकार नहीं मिलेंगे, तो लोकतंत्र अधूरा रह जायेगा! राहुल गांधी की ये घोषणाएं ही गोडसेवादियों को बेचैन कर दी हैं।
क्योंकि हिन्दू धर्म में गहरी आस्था ने उनके रग-रग में यह विश्वास भर दिया है कि भगवान ने शक्ति के स्रोतों के भोग का दैवीय- अधिकारी उन्हें बनाया है, ऐसे में राहुल गांधी जिन 90 प्रतिशत वंचित आबादी को पॉवर स्ट्रक्चर में संख्यानुपात में हिस्सेदारी पर अपनी राजनीति स्थिर किये हैं, वह हिन्दू धर्म के विरुद्ध है। क्योंकि हिन्दू धर्म में दलित, आदिवासी ,पिछड़ों और महिलाओं का शक्ति के स्रोतों का भोग पूरी तरह निषिद्ध व अधर्म घोषित है। हिन्दुत्ववादियों की शक्ति के समस्त स्रोत के भोग के एकाधिकार की मानसिकता ने उन्हें विश्व के सबसे खतरनाक धार्मिक गिरोह में तब्दील कर दिया है, जिसके समक्ष तालीबानी और और नाजीवादी तक बौने हैं।
ऐसे में जबकि राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय के एजेंडे को एवरेस्ट सरीखे ऊंचाई देकर संघ के सामाजिक – आर्थिक सोच की जमीन दरकाने के साथ हिन्दू राष्ट्र के अर्थशास्त्र को प्रायः ध्वस्त सा कर दिया है, हिंदुत्ववादी संघ- भाजपाई हिन्दू धर्म की रक्षा के नाम पर उनके खिलाफ किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। अतः आज की तारिख में महात्मा गांधी से भी कहीं ज्यादा गोडसेवादियों के निशाने पर आने खतरा राहुल गांधी पर बढ़ गया है: इस अप्रिय सचाई को सुप्रीम कोर्ट, भारत का गृह- मंत्रालय, कांग्रेस और खुद राहुल गांधी ध्यान में रखें!
(लेखक अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ओबीसी विभाग) की आइडियोलॉजिकल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य हैं।)






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