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राई डांसर बोली- हम कला बेचते हैं, जिस्म नहीं; नेताओं ने जताई आपत्ति, CMHO को हटाया, कलेक्टर को नोटिस

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अशोकनगर

चंबल संभाग के अशोकनगर में आयोजित करीला मेला। यहां होने वाला राई नृत्य मेले का आकर्षण रहता है। ये मेला हर साल रंगपंचमी पर भरता है। यहां देशभर से करीब 15 लाख श्रद्धालु आते हैं। इस बार भी 12 मार्च से शुरू हुआ मेला 3 दिन तक चला। इस साल एक जांच के बाद मेला चर्चाओं में आ गया। दरअसल, मेले से पहले स्वास्थ्य विभाग ने राई डांसर्स का HIV टेस्ट कराया था, जिससे बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस ने भी इस पर आपत्ति जताई। महिला आयोग ने कलेक्टर उमा महेश्वरी को नोटिस देकर 5 दिन में जवाब मांगा है। वहीं, सीएमएचओ डॉ. नीरज छारी को हटा दिया गया है।

इसलिए मचा है बवाल

प्रशासन ने मेले की पूरी तैयारियां की थीं। स्वास्थ्य विभाग भी मुस्तैद था। विभाग ने 50 बेड का अस्पताल भी तैयार किया था। इसी हॉस्पिटल में 11 मार्च को 10 डांसर्स का एचआईवी टेस्ट किया गया था। जैसे ही, ये बात सामने आई, बवाल मचना शुरू हो गया। कुछ संगठनों ने हिंदू धर्म की आस्थाओं को धूमिल करने का आरोप लगाया तो कुछ ने इसे महिलाओं की इज्जत से जोड़ कर देखा।

वहीं, कांग्रेस ने प्रशासन और सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राई डांसर्स के लिए HIV टेस्ट अनिवार्य करना उनके मानवाधिकारों के खिलाफ है। डांसरों के चरित्र पर संदेह करना गलत है। लाखों श्रद्धालु करीला धाम को आस्था और श्रद्धा का केंद्र मानकर आते हैं। उनके विश्वास को भी चोट पहुंची है। टेस्ट के कारण जिले के सम्मान को ठेस पहुंची है। अभी तक की गई कार्रवाई नाकाफी है। मांग है कि स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। इतना बड़ा मामला हो गया, लेकिन भाजपा के नेता शांत हैं। ये महिलाओं के प्रति उनकी छोटी सोच को दर्शाता है।

आयोग ने इसे डांसर्स के मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए कलेक्टर को नोटिस दिया है। कलेक्टर से 5 दिनों में जवाब मांगा है। प्रशासन ने जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन किया है, जिसे 2 दिन में जांच रिपोर्ट देनी है।

आयोग ने इसे डांसर्स के मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए कलेक्टर को नोटिस दिया है। कलेक्टर से 5 दिनों में जवाब मांगा है। प्रशासन ने जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन किया है, जिसे 2 दिन में जांच रिपोर्ट देनी है।

बवाल से पहले CMHO ने क्या कहा था

CMHO डॉ. नीरज छारी का कहना था कि अभी अस्पताल में 12 बिस्तर लगाए हैं, लेकिन इसे जरूरत पड़ने पर 50 बेड तक बढ़ा सकते हैं। हमारे पास फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों के लिए दवाइयां हैं। हार्ट अटैक के लिए भी हम तैयार हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर्स भी हैं। HIV टेस्ट पर उन्होंने कहा था कि मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं। किसी के नेचर के बारे में नहीं कहा जा सकता है। एहतियातन 10 डांसरों के टेस्ट किए हैं। ये सुरक्षा की दृष्टि से सही था, इसलिए हमने ऐसा किया। हम किसी के कैरेक्टर पर सवाल नहीं कर रहे हैं। हो सकता है कि कोई अच्छे परिवार का हो, बस शौकिया तौर पर डांस करता हो, लेकिन फिर भी किसी के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। अगर किसी की बॉन्डिंग होती है, तो वह सुरक्षित रहें।

नृत्यांगना बोली- हमें आपत्ति नहीं

अशोकनगर के मुंगावली से आई एक राई नृत्यांगना भी उन 10 डांसरों में शामिल है, जिसका HIV टेस्ट हुआ है। उसका कहना है कि हमें आपत्ति नहीं है। बाहर से लोग आते हैं, कई नृत्यांगना भी होती हैं, जो किसी मजबूरी में जिस्मफरोशी करती हैं। इसलिए टेस्ट किए गए थे, लेकिन कोई संक्रमित नहीं थी। हम लोग माता रानी के दरबार में लोक नृत्य करते हैं। हम कोई गलत काम नहीं करते, न यहां करते हैं, न घर पर करते हैं। हम कला बेचते हैं, जिस्म नहीं। टेस्ट हमारी सहमति से हुआ था। टेस्ट होना तो अच्छा है, इससे हम भी स्वस्थ रहेंगे और जो श्रद्धालु आ रहे हैं, वह भी स्वस्थ रहेंगे। मैं तो चाहती हूं, सब स्वस्थ रहें। हालांकि, जिस नृत्यांगना ने टेस्ट के लिए मना किया, उसका टेस्ट नहीं हुआ था।

महिला आयोग ने कलेक्टर को दिया नोटिस

जैसे ही डांसरों के HIV टेस्ट वाले मामले ने तूल पकड़ा, वैसे ही महिला आयोग भी अलर्ट मोड पर आ गया। आयोग ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए कहा कलेक्टर को नोटिस दिया है। कलेक्टर से 5 दिनों में जवाब तलब किया गया है। प्रशासन ने जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन किया है। जिसे 2 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपनी है। ग्वालियर कमिश्नर ने ट्वीट पर जांच दल के गठन की पुष्टि की है।

अपर संचालक स्वास्थ्य विभाग अजीजा सरशार जफर ने CMHO अशोकनगर डॉ. नीरज कुमार छारी को आगामी आदेश तक भोपाल भेज दिया है। डॉ. राकेश चतुर्वेदी की अध्यक्षता में जांच दल गठित किया गया है। जिसमें संयुक्त संचालक डॉ. पीके शर्मा, जिला महामारी नियंत्रण अधिकारी डॉ. एसएस भूषण तथा आईसीडीसी सुपरवाइजर कुलदीप भदौरिया को रखा गया है। टीम मामले की जांच कर 2 दिन में प्रशासन को जांच रिपोर्ट सौंपेगा।

राई बारहों महीने नाचा जाता है। बुंदेलखंडी राई डांस से अपनी खुशी को जाहिर करते हैं। राई में बेड़नी समुदाय की महिलाएं डांस करती हैं। कई बार स्त्री का स्वांग रचकर पुरुष भी डांस करते हैं। इसमें डांस के साथ-साथ फागें भी गाई जाती हैं।

राई बारहों महीने नाचा जाता है। बुंदेलखंडी राई डांस से अपनी खुशी को जाहिर करते हैं। राई में बेड़नी समुदाय की महिलाएं डांस करती हैं। कई बार स्त्री का स्वांग रचकर पुरुष भी डांस करते हैं। इसमें डांस के साथ-साथ फागें भी गाई जाती हैं।

ट्रस्ट के अध्यक्ष बोले – प्रशासन के कहने पर करवाया टेस्ट

करीला ट्रस्ट अध्यक्ष महेंद्र यादव ने बताया कि 11 मार्च को जितनी डांसर्स यहां आई थीं, उनकी जांच करवाई गई थी। दरअसल, बाहर से कई लोग आते हैं। व्यापारी भी आते हैं। राजस्थान से कंजर समाज के लोग भी आते हैं। इसके अलावा कई समुदाय ऐसे भी आते हैं, जो देह व्यापार में लिप्त रहता है। लिहाजा, सुरक्षा की दृष्टि से टेस्ट करवाया गया था। हालांकि, मेले में इतने लोग होते हैं कि देह व्यापार संभव नहीं है। फिर भी कुछ डांसर पहाड़ियों पर, कुछ अंधेरे में डांस करती हैं, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से यह जरूरी था। जिला प्रशासन के कहने पर टेस्ट करवाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन

AICC के मानवाधिकार जिलाध्यक्ष अशोक जैन का कहना है कि करीला मेले में HIV टेस्ट करवाकर इसे बदनाम किया जा रहा है। इस साजिश की जितनी निंदा की जाए, कम है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि HIV टेस्ट और टेस्ट करवाने वाले शख्स को गोपनीय रखा जाए, लेकिन विभाग ने सार्वजनिक रूप से टेस्ट किए हैं, जो निंदनीय है। ये अपराध की श्रेणी में आता है। दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

इधर, भाजपा जिला अध्यक्ष आलोक तिवारी का कहना है कि करीला धाम सनातन धर्म की आस्थाओं का केंद्र है। यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। जांच टीम बनाई गई है। ऐसे टेस्ट की आवश्यकता नहीं थी।

करीला मेले में राजस्थान समेत दूसरे शहरों से भी डांसर्स हिस्सा लेने आती हैं।

करीला मेले में राजस्थान समेत दूसरे शहरों से भी डांसर्स हिस्सा लेने आती हैं।

फिर CMHO ने लिया यू टर्न

मुद्दे ने तूल पकड़ा तो दूसरे दिन सीएमएचओ डॉ. नीरज छारी बयान से बदल गए। उन्होंने कहा कि HIV के सैंपल के लिए स्पेशल आदेश नहीं हैं। अगर कोई डिमांड करता है तो टेस्ट किया जाता है। भीड़ में लाखों लोग आते हैं, वह राई डांसरों का नाम ले रहे हैं। उनका नाम लेना गलत है। यहां हजारों डांसर्स हैं। हमने किसी पर दबाव नहीं डाला। HIV जांच के लिए ऑर्डर नहीं आया है और ना ही सैंपलिंग की गई है। कलेक्टर उमा महेश्वरी का कहना है कि प्रशासन ने HIV की जांच के आदेश नहीं दिए थे। टेस्ट किसके कहने पर किए गए, इसकी जांच की जा रही है।

पिछले साल भी हुआ था बवाल

पिछले साल करीला मेले में ड्यूटी पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ छेड़छाड़ का मामला आया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने पटवारी पर आरोप लगाया था। मामले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पटवारियों द्वारा ज्ञापन दिया गया था। पिछले साल भी करीब 15 दिनों तक इसी बात पर चर्चा हो रही थी।

हर साल की तरह इस बार भी रंगपंचमी पर 12 मार्च से करीला मेले का शुभारंभ हुआ, जो 3 दिन तक चला। मेले में करीब 15 लाख श्रद्धालु आए थे।

हर साल की तरह इस बार भी रंगपंचमी पर 12 मार्च से करीला मेले का शुभारंभ हुआ, जो 3 दिन तक चला। मेले में करीब 15 लाख श्रद्धालु आए थे।

क्या होता है राई नृत्य

राई नृत्य बुंदेलखंड के प्रसिद्ध नृत्यों में से एक है। यह गुजरात के गरबा के समान ही प्रसिद्ध है। राई नृत्य साल भर किया जाता है। राई डांस के माध्यम बुंदेलखंडी लोग खुशी को जाहिर करते हैं। राई में बेड़नियां नाचती हैं। इनके अभाव में स्त्री का स्वांग रच कर पुरुष नाचते हैं। इसमें डांस के साथ-साथ फागें भी गाई जाती हैं। बेड़नी के साथ-साथ मृदंग बजाने वाला भी डांस करता है।

क्या है करीला से जुड़ी मान्यताएं

मान्यता है कि जब सीता माता को वनवास में छोड़ा गया था, उस वक्त सीता माता महर्षि वाल्मीकि जी के आश्रम करीला धाम पर ही रुकी थीं। इसी आश्रम पर मां जानकी ने लव और कुश को जन्म दिया था। जिस वक्त लव-कुश का जन्म हुआ था, उस वक्त स्वर्ग से अप्सराओं ने आकर यहां नृत्य किया था। इसी मान्यता को लेकर यहां नृत्यांगनाएं नृत्य करती हैं।

रंगपंचमी की रात सैकड़ों नृत्यांगनाएं बधाई नृत्य करती हैं। मान्यता के अनुसार जिस गुफा में सीता माता ने लव-कुश को जन्म दिया था। उस गुफा को केवल रंगपंचमी के दिन ही खोला जाता है। पूजा पाठ करने के बाद यह गुफा 24 घंटे तक खुली रहती है। इसके बाद गुफा के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। श्रद्धालु रंगपंचमी के दिन इस गुफा के दर्शन करते हैं। इस गुफा में प्रज्ज्वलित की गई अग्नि की भभूति लोग साथ ले जाते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद लोग यहां राई करवाते हैं।

पिछले साल से कम हुआ चढ़ावा

करीला मेले में इस बार मंदिर में‎ आने वाला चढ़ावा कम हो गया है। मेला समाप्त होने के बाद‎ सोमवार दोपहर 12 बजे दान पेटियां खोली गईं। जिन नोटों की गिनती‎ 6 घंटे तक हुई। गिनती के दौरान 16 लाख 500 रुपए की‎ नकदी मिली। यह राशि पिछले साल की नकदी से 92‎ हजार 500 रुपए कम हैं। पिछले साल मेले में 16 लाख‎ 93 हजार रुपए नकदी निकली थी।‎ 30 कोटवार, 20 पटवारी, 2 राजस्व निरीक्षकों के‎ अलावा 2 नायब तहसीलदार 6 घंटे तक नोटों की गिनती कर रहे थे।

Ramswaroop Mantri

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