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शेखावत के BJP छोड़ने की वजह राजपूत फैक्टर

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इंदौर

मालवा में भाजपा को एक और बड़ा झटका लगा है। इंदौर-बदनावर के पूर्व विधायक और अपेक्स बैंक के अध्यक्ष रह चुके भंवरसिंह शेखावत ने पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने भोपाल में कांग्रेस जॉइन की। शेखावत बोले- भाजपा में कार्यकर्ता घुटन महसूस कर रहा है। अज्ञात भय पार्टी को अंदर से खाए जा रहा है। वहां बोलने तक की आजादी नहीं है।

यह तीनों तस्वीरें शेखावत के पार्टी छोड़ने से पहले की हैं। कभी कांग्रेसी मनाने पहुंचे तो कभी भाजपा नेता। - Dainik Bhaskar

यह तीनों तस्वीरें शेखावत के पार्टी छोड़ने से पहले की हैं। कभी कांग्रेसी मनाने पहुंचे तो कभी भाजपा नेता।

बताया जा रहा है कि शेखावत कांग्रेस में एक ही शर्त पर आए हैं कि उन्हें या उनके बेटे को आगामी चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार बनाएं। नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह भी बदनावर में राजपूत V/s राजपूत उतारने की तैयारी में हैं।

शनिवार दोपहर में भंवरसिंह शेखावत इंदौर से भोपाल पहुंचे। इधर, कांग्रेस के पूर्व मंत्री महेश जोशी बंगले से बेटे पिंटू जोशी के साथ कांग्रेस कार्यालय पहुंचे थे। शेखावत के भाजपा छोड़ने पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा ने कहा, ‘इतना बड़ा समंदर है, दो चार लोटा पानी निकल जाए तो फर्क नहीं पड़ता।’

भोपाल में कांग्रेस में शामिल होने के बाद स्थानीय नेताओं के साथ भाजपा के पूर्व विधायक भंवरसिंह शेखावत।

भोपाल में कांग्रेस में शामिल होने के बाद स्थानीय नेताओं के साथ भाजपा के पूर्व विधायक भंवरसिंह शेखावत।

नेता प्रतिपक्ष के जरिए हुई कांग्रेस में शेखावत की एंट्री

कांग्रेस से मिली जानकारी के अनुसार भंवरसिंह शेखावत की कांग्रेस में एंट्री डॉ. गोविंद सिंह और बालमुकुंदसिंह गौतम ने कराई है। शेखावत को कांग्रेस में कैसे और कब एंट्री कराना है, इसकी कहानी बहुत पहले लिखी जा चुकी थी। बताते हैं कि शेखावत को सिंधिया समर्थक रहे समंदरसिंह पटेल के साथ ही कांग्रेस जॉइन कराई जा रही थी। लेकिन बदनावर के स्थानीय कांग्रेस नेता इस पक्ष में नहीं थे। विरोध के कुछ पोस्टर्स भी वायरल हो गए थे। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने स्थानीय नेताओं को समझाने के बाद ही शेखावत को कांग्रेस जॉइन कराने का प्रोग्राम बनाया।

इन दो बातों से शेखावत को पार्टी छोड़ने की हिम्मत मिली

पहली वजह पूर्व मंत्री दीपक जोशी रहे। जोशी के इस्तीफे ने शेखावत को हिम्मत दी। उनके फैसले ने शेखावत को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद वे अपनी भावनाएं खुलकर जताने लगे। दूसरी वजह कांग्रेस के राजपूत नेता डॉ. गोविंदसिंह (नेता प्रतिपक्ष) और धार के पूर्व विधायक बालमुकुंदसिंह गौतम रहे। बदनावर सीट पर पाटीदार और राजपूत वोटरों के बीच सीधी लड़ाई है। यहां कभी गौतम परिवार भी कांग्रेस से टिकट मांगता रहा है, लेकिन अब बदनावर सीट पर नए उम्मीदवार शेखावत हो सकते हैं। वहीं इंदौर के कांग्रेस नेता पिंटू जोशी से शेखावत के बेटे संदीप की दोस्ती जगजाहिर है। उन्हें भी टिकट मिल सकता है।

बात कुछ दिनों पहले की है जब पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच विधायक संजय शुक्ला कांग्रेस का मैसेज लेकर शेखावत के पास पहुंचे थे। यह पिछले महीने की तस्वीर है।

बात कुछ दिनों पहले की है जब पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच विधायक संजय शुक्ला कांग्रेस का मैसेज लेकर शेखावत के पास पहुंचे थे। यह पिछले महीने की तस्वीर है।

शेखावत की पार्टी छोड़ने की बड़ी वजहें-

  • शेखावत की पारंपरिक सीट बदनावर पर सिंधिया समर्थक के टिकट को हरी झंडी
  • किसी अन्य सीट से लड़ाने के लिए भाजपा से कोई संकेत नहीं, न ही कोई सम्मान और पूछपरख
  • कांग्रेस से खुद या बेटे को चुनाव लड़ाने की गारंटी

बदनावर में राजपूत Vs राजपूत कराएंगे नेता प्रतिपक्ष

सिंधिया समर्थक राजवर्धनसिंह दत्तीगांव के भाजपा से चुनाव लड़ने पर शेखावत सहित कई स्थानीय नेताओं का करियर दांव पर लग गया था। ऐसे में अन्य स्थानीय भाजपा नेता नाराज हैं। नेता प्रतिपक्ष शेखावत को टिकट देकर बदनावर में राजपूत Vs राजपूत उतारने की तैयारी में हैं, इसलिए शेखावत को मनाकर लाए हैं। उनका या उनके बेटे का टिकट पक्का माना जा रहा है। शेखावत इंदौर में भाजपा को मजबूती देने वाले चुनिंदा नेताओं में से एक और कैलाश विजयवर्गीय के ‘राजनीतिक गुरु’ माने जाते हैं। देवास से पूर्व मंत्री दीपक जोशी के अलावा समंदर सिंह पटेल भी पार्टी छोड़ चुके हैं।

पिछले दिनों जब शेखावत के कांग्रेस में शामिल होने की बात सामने आई तब नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे और IDA अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा शेखावत से मिलने पहुंचे थे

पिछले दिनों जब शेखावत के कांग्रेस में शामिल होने की बात सामने आई तब नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे और IDA अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा शेखावत से मिलने पहुंचे थे

शेखावत के BJP छोड़ने के ऐलान से पुराने जनसंघ नेता हैरान

भंवरसिंह शेखावत के साथ 1990 में भाजपा के टिकट पर इंदौर-3 से चुनाव लड़े पूर्व विधायक और पूर्व नगर अध्यक्ष गोपी कृष्ण नेमा ने दैनिक भास्कर से कहा कि मैं इस बात पर विश्वास नहीं करता हूं कि भंवरसिंह शेखावत जैसा व्यक्ति भाजपा छोड़ सकता है। उनके पिताजी और वे खुद संघ से जुड़े हुए नेता हैं। लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया। एक छोटी सी बात के लिए पार्टी छोड़ने जैसा फैसला लेना ठीक नहीं है। पार्टी ने इन्हें समय-समय पर बहुत कुछ दिया है।

बाबूसिंह ने कहा था- शेखावत कभी कांग्रेस में नहीं जाएंगे

लघु उद्योग निगम के पूर्व अध्यक्ष बाबूसिंह रघुवंशी भी हैरान हैं। रघुवंशी ने दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में कहा था- शेखावत जी के बारे में गारंटी देता हूं। जो स्वयं के बारे में गारंटी नहीं ले सकते मैं उनसे बड़ी गारंटी देता हूं कि वो कभी कांग्रेस के दलदल में नहीं जाएंगे। यह इंटरव्यू दीपक जोशी के पार्टी छोड़ने और शेखावत और सत्यनारायण सत्तन की नाराजगी सामने आने के वक्त लिया गया था।

शेखावत से नहीं मिले थे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

एक वाक्या याद करते हुए पिछले दिनों शेखावत ने कहा था- मेरी नाराजगी की कहानी इतनी ही है कि तोमर इंदौर में सबसे मिलने आए थे। उस सूची में मेरा नाम नहीं है, इसलिए मैंने अपना विरोध दर्ज कराया। एक प्रकिया होती है, जिससे पार्टी में नाराजगी दूर करना चाहिए। जब 2018 में पार्टी चुनाव हारी, उसके बाद जिम्मेदारों पर एक्शन लेकर उन्हें दूर कर दिया जाता तो आज ये दुर्गति नहीं होती।

जोशी के पार्टी छोड़ने पर बोले थे- उनकी मजबूरी थी

दीपक जोशी के भाजपा छोड़ने को लेकर शेखावत ने कहा था- वे जुझारू कार्यकर्ता हैं। वे भावनाओं में बहकर पार्टी से नहीं गए, उनकी भावनाएं आहत हुई होंगी। दीपक जोशी ने जो किया, वो रास्ता नहीं था, मजबूरी थी। कोई भी आदमी पार्टी नहीं छोड़ना चाहता, लेकिन परिस्थितियां ऐसी पैदा कर दी जाएं तो बेचारा क्या करेगा। यदि उसे पार्टी छोड़नी होती तो दो साल तक आपके पीछे वो चप्पल-जूते क्यों घिसता। कोई परिस्थिति बनी होगी तभी निर्णय लिया जा रहा है।

बदनावर में अपने समर्थकों के साथ भंवरसिंह शेखावत। वे पूर्व विधायक और अपेक्स बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं।

बदनावर में अपने समर्थकों के साथ भंवरसिंह शेखावत। वे पूर्व विधायक और अपेक्स बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं।

कैलाश विजयवर्गीय के राजनीतिक गुरु हैं भंवरसिंह शेखावत

भंवरसिंह शेखावत कई बार खुले मंच से यह कह चुके हैं कि वे ही कैलाश विजयवर्गीय को राजनीति में लेकर आए थे, और विजयवर्गीय ने ही उन्हें चुनाव में हराने का काम किया था। शेखावत ये भी आरोप लगा चुके हैं कि विजयवर्गीय ने मुझे ही नहीं बल्कि जीतू जिराती, मधु वर्मा और सुदर्शन गुप्ता को भी हराने के लिए काम किया था। वहीं अपने बेटे को स्थापित करने के लिए उषा ठाकुर को इंदौर शहर से बाहर किया। पार्टी की आड़ में विजयवर्गीय अपना वैभव बढ़ा रहे हैं। बताया जाता है कि कैलाश विजयवर्गीय भी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते रहे हैं।

शेखावत के मामले में बताते हैं कि ऐसा पहली बार नहीं है कि उन्होंने पार्टी से नाराज होकर बगावती की हो। इससे पहले 1989-90 से 1991-92 तक जब वे इंदौर भाजपा नगर अध्यक्ष थे, उस बीच 1990 में विधानसभा चुनाव के दौरान इंदौर- 5 से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि इसके पीछे पुराने भाजपाई तर्क देते हैं कि शेखावत को निर्दलीय लड़ाना उस वक्त की पार्टी की ही रणनीति का हिस्सा था।

भंवरसिंह शेखावत अपने समर्थकों के साथ। वे कई दिन से भाजपा पार्टी से नाराज चल रहे थे, आखिर में उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली।

भंवरसिंह शेखावत अपने समर्थकों के साथ। वे कई दिन से भाजपा पार्टी से नाराज चल रहे थे, आखिर में उन्होंने कांग्रेस जॉइन कर ली।

भाजपा ने शेखावत के बेटे को दो बार पार्षद प्रत्याशी बनाया

शेखावत के बेटे संदीप शेखावत को भाजपा इंदौर 5 के वार्ड 44 से 2015 में पार्षद का टिकट दे चुकी है। संदीप को मालवा मिल के जग-जीवन राम नगर वाले वार्ड से भी टिकट दिया गया था। वह एक बार चुनाव हारे तो वहीं एक बार जीते थे।

अब पढ़िए भंवरसिंह शेखावत का राजनीतिक सफर

  • 1983-1984 में नगर निगम इंदौर के उप-महापौर बने। यह इंदौर में पहली भाजपा परिषद थी। इस दौरान 1 महापौर और 1 उप महापौर बनाया जाता था।
  • 1989-90 से 1991-92 तक सुरेंद्र पटवा सरकार के समय इंदौर नगर अध्यक्ष रहे हैं।
  • 1990 में इंदौर 5 से तराजू-बांट के चिन्ह पर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी अशोक शुक्ला से 18 हजार 472 वोट से चुनाव हार गए थे। यह शेखावत का पहला विधानसभा चुनाव था।
  • 1993 में शेखावत को भाजपा ने इंदौर 5 से टिकट दिया था। वे अशोक शुक्ला को 13 हजार 162 वोट से हराकर विधायक बने थे।
  • 1998 के चुनाव में वे इसी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी सत्यनारायण पटेल से 10 हजार 835 वोट से चुनाव हार गए थे।
  • 2011-12 में शेखावत को भाजपा ने अपेक्स बैंक का चैयरमेन बनाया, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।
  • 2013 में भाजपा ने सहकारिता प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय संयोजक बनाया। वह राष्ट्रीय कार्यसमिती की बैठक में शामिल होने वाले सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय के बाद इंदौर के तीसरे नेता बनें।
  • भाजपा ने राष्ट्रीय संयोजक के बाद शेखावत को मप्र का सहकारिता प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। भाजपा उन्हें दो से ज्यादा बार सहकारिता सहित अन्य कई केंद्रीय कमेटी में शामिल कर चुकी है।
  • 2013 में भाजपा ने शेखावत को धार जिले की बदनावर सीट से उतारा और वे तत्कालीन कांग्रेस नेता राजवर्धनसिंह से 9 हजार 812 वोट से जीत गए।
  • 2018 का चुनाव शेखावत दत्तीगांव से ही 41 हजार 506 वोट से हार गए। यह शेखावत के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी हार थी।
  • कांग्रेस में रहे विधायक दत्तीगांव ने सिंधिया के साथ भाजपा जॉइन कर ली।

Ramswaroop Mantri

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