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दुर्लभ है उल्लू पर सवार लक्ष्मीजी का चित्र?

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

दीपावली का त्यौहार सम्पन्न हुआ।लोगों ने अपने घरों के अलावा ओद्योगिक, व्यापारिक और व्यावसायिक स्थानों में लक्ष्मीजी का पूजन किया।
लक्ष्मीजी धन की देवी है।लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू है।वैसे उल्लू पर सवार लक्ष्मीजी का चित्र बहुत कम देखने को मिलता है?
उल्लू लक्ष्मीजी का वाहन है, यह कौतूहल का विषय है।
पौराणिक कथाओं में लिखा है,तमाम देवी देवताओं ने विभिन्न पशु,पक्षियों को अपना वाहन बना लिया।

क्यों पसंद है धन की देवी लक्ष्मी जी को उल्लू की सवारी ? Religion World


पौराणिक कथा के अनुसार लक्ष्मीजी ने कहा था कि, मैं कार्तिक माह में अमावस्या के दिन रात में धरती पर आऊंगी तब अपने वाहन का चयन करूंगी।
कार्तिक माह के अमावस्या के दिन रात में लक्ष्मीजी घरती पर आई उसी समय तीव्र गति से उड़कर उल्लू लक्ष्मीजी के पास गया,लक्ष्मीजी ने तात्काल उल्लू को अपना वाहन बना लिया।
उल्लू को रात का पक्षी(Nocturnal bird) कहतें हैं।
उल्लू की दृष्टि बहुत तेज होती है।श्रवण शक्ति में तीव्रता होती है।
उल्लू अपनी उड़ान की गति को धीमी और तेज करने की क्षमता रखता है।उल्लू का खास गुण उल्लू के पंखों में आवाज नहीं होती है।प्राकृतिक रूप से उल्लू के पंख Silencer युक्त होतें हैं।
उल्लू के प्राकृतिक गुणों को बहुत से व्यंग्यकार मानव की प्रवृत्ति से जोडतें हैं।व्यंग्यकारों को व्यंग्य लिखने के लिए कोई भी मुद्दा चाहिए।
व्यंग्यकारों के मतानुसार धार्मिक आस्थावान लोग जब सत्ता सम्भालतें हैं,तब धार्मिकता के महत्व को ध्यान में रखतें हुए सरकार चलातें हैं।
लक्ष्मीजी को प्राप्त करने की क्षमता उसी में हो सकती है।जिसमें लक्ष्मीजी के वाहन उल्लू के गुण विद्यमान हो?
उल्लू की दृष्टि रात को ही तेज होती है।शीत ऋतु में भी उल्लू उड़ान भर सकता है।
उल्लू किसानों का सहयोगी पक्षी है।उल्लू साँप,बिच्छू और चूहों का भक्षण करता है।साँप,बिच्छू और चूहों का भक्षण करने वाला गुण धार्मिक आस्थावान मानव अंगीकृत नहीं कर सकता है।धार्मिक आस्थावान मानव सामिष नहीं, निरामिष भोजन को भक्षण करने का आदी होता है।
उल्लू की प्रमुख दो प्रजातियां होती है।एक मुआ इस प्रजाति के उल्लू पानी के पास ही रहतें हैं।दूसरी प्रजाति घुग्घु इस प्रजाति के उल्लू खंडहरों में रहतें हैं।
लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू है,लक्ष्मीजी खड़ी होती है कमल के फूल पर और कमल खिलता है कीचड़ में।इस नज़ारे पर गौर करने पर ज्ञात होता है।यह नजारा प्राकृतिक कम सियासी ज्यादा नजर आता है।
उक्त विषय का स्रोत लेखक को बाजार में प्राप्त हुआ।लेखक लक्ष्मी पूजन के लिए पूजन सामग्री एक दुकान से खरीद रहा था।उसी समय एक युवती ने दुकानदार से पूछा आपके पास उल्लू पर विराजमान लक्ष्मीजी का चित्र है?

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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