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उज्जैन रेलवे स्टेशन पर चूहों ने  ट्रैक के नीचे खोखली कर दी जमीन!…ट्रेन की पटरियों पर भी खतरा

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 चूहों ने रेलवे ट्रैक के नीच घर बना लिए हैं, जिससे वहां जमीन खोखली हो गई है.

उज्जैन जंक्शन पर चूहों का आतंक है. यही नहीं, चूहे रेलवे की दूसरी संपत्तियों पर भी मंडराते नजर आते हैं. इस बात की सच्चाई जानने लोकल 18 की टीम उज्जैन रेलवे स्टेशन पहुंची, तो हालात बेहद चिंताजनक नजर आए.बाबा महाकाल की नगरी में रोजाना लाखों पर्यटक रेल मार्ग से उज्जैन पहुंचते हैं. लेकिन, उज्जैन का रेलवे स्टेशन खतरे में है. जी हां, उज्जैन जंक्शन पर चूहों का आतंक है. चूहों ने रेलवे ट्रैक के नीच घर बना लिए हैं, जिससे वहां जमीन खोखली हो गई है. यही नहीं, चूहे रेलवे की दूसरी संपत्तियों पर भी मंडराते नजर आते हैं. इस बात की सच्चाई जानने लोकल 18 की टीम उज्जैन रेलवे स्टेशन पहुंची, तो हालात बेहद चिंताजनक नजर आए. स्टेशन परिसर में चारों ओर चूहों की मौजूदगी साफ दिखाई दी. सबसे गंभीर स्थिति रेलवे ट्रैक को लेकर सामने आई.

दरसल इन दिनों उज्जैन के रेलवे स्टेशन पर पटरियों के आसपास बड़ी संख्या में चूहों के बिल नजर आए. इन चूहों ने रेलवे ट्रैक के नीचे की जमीन को खोखला कर दिया है, जो बेहद खतरनाक है. ट्रैक के बेस कमजोर करता है. ट्रेन के गुजरने के दौरान पटरियों में दरार या धंसने जैसी स्थिति बन सकती है. प्लेटफॉर्म 5 और 6 के बीच रेलवे ट्रैक की हालत सबसे ज्यादा डराने वाली है. यहां चूहों ने पटरियों के नीचे बड़े-बड़े बिल बना रखे हैं. जमीन अंदर से पूरी तरह कमजोर हो चुकी है, जिससे ट्रैक की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

स्टेशन चूहों की संख्या काफी ज्यादा…
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की स्थिति में ट्रेनों का संचालन यात्रियों की जान को जोखिम में डाल सकता है. इस गंभीर समस्या को लेकर लोकल 18 की टीम ने स्टेशन अधीक्षक संजय सक्सेना और सीनियर सेक्शन इंजीनियर राजीव जैन से बातचीत करने की कोशिश की. दोनों अधिकारियों ने इस संबंध में बयान देने से परहेज किया. हालांकि, दबी जबान से ये माना कि स्टेशन पर चूहों की संख्या काफी ज्यादा है.

वेंडर से लेकर पार्सल विभाग तक परेशान 
चूहों की समस्या केवल रेलवे ट्रैक तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर स्टेशन के अन्य हिस्सों पर भी साफ नजर आ रहा है. प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बने नाले और माल गोदाम, जिसे अमानती घर कहा जाता है, वहां हालात बेहद खराब हो चुके हैं. मौके पर मौजूद कर्मचारियों और कुलियों ने बताया कि चूहे पार्सल और बुक किए गए सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे लगातार क्षति हो रही है. दूसरी ओर, स्टेशन परिसर में दुकान चलाने वाले वेंडरों का कहना है कि चूहों के कारण उनका खाद्य सामान बार-बार खराब हो रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. यह स्थिति न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्वच्छता और सुरक्षा दोनों के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है.

समय-समय पर होता है कंट्रोल
वहीं, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा. रेलवे के पीआरओ मुकेश कुमार ने बताया, स्टेशन पर चूहों की मौजूदगी की जानकारी उन्हें मिली है और विभाग समय-समय पर रोडेंट कंट्रोल कराता है. यदि समस्या गंभीर है तो संबंधित विभाग को सूचित कर कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, पिछले 4 साल से स्टेशन पर कोई प्रभावी पेस्ट कंट्रोल नहीं हुआ है. टेंडर होने के बावजूद पूर्व ठेकेदार द्वारा काम न करने के कारण स्थिति बिगड़ती चली गई. चूहों की समस्या सिर्फ रेलवे ट्रैक तक सीमित नहीं है. स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्थित नाले और माल गोदाम यानी अमानती घर में भी चूहे नुकसान पहुंचा रहे हैं.

जानिए कब कहा चूहों के कारण हुए हादसे 
रेलवे परिसरों में चूहों की समस्या कोई नई बात नहीं है. इसके गंभीर परिणाम पहले भी सामने आ चुके हैं. बीते वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में चूहों की वजह से रेल संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वर्ष 2021 में बिहार के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर चूहों ने सिग्नल से जुड़ी अहम केबल को नुकसान पहुंचाया था, जिसके चलते घंटों तक ट्रेनों की आवाजाही ठप रही. इसी तरह 2023 में सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन पर चूहों ने ट्रैक के आसपास की जमीन को कमजोर कर दिया था, जिससे सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ. दिसंबर 2024 में मध्यप्रदेश के घोड़ाडोंगरी स्टेशन पर एक चूहे की वजह से सुपरफास्ट ट्रेन को रोकना पड़ा और यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा. वहीं अक्टूबर 2025 में दिल्ली-इंदौर एक्सप्रेस में शॉर्ट सर्किट की घटना सामने आई, जिससे ट्रेन बीच रास्ते रुक गई. ऐसे में उज्जैन जैसे अहम स्टेशन पर हालात चिंताजनक हैं.

Ramswaroop Mantri

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