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*दस दिन में भी नहीं हो रही रजिस्ट्री*

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संपत्ति के सौदे टूटने के कगार पर , जनता की मदद के लिए बनाई हेल्पडेस्क बेअसर**संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर के फेर में संपत्ति खरीददार व बेचवाल दोनों परेशान*

इंदौर। संपत्ति रजिस्ट्री के लिए संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर परेशानी की वजह बनता जा रहा है। लांच के दौरान दावा किया था कि बगैर दिक्कत के घर बैठे रजिस्ट्री होगी। जनता को दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, लेकिन नया सॉफ्टवेयर परेशानी का सबब बना हुआ है।  संपत्ति के खरीदार व बेचवाल दस दिन से चक्कर लगा रहे हैं। थम्ब व आई इम्प्रेशन नहीं मिलने की वजह से अब सौदा बिगड़ने की स्थिति में आ गया है।

संपत्ति की खरीद-फरोख्त में में सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने बाला जिला इंदौर है, जिसने 2024-25 में 2542 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में जमा कराए। यहां का एक एक दिन और एक-एक रजिस्ट्री महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ‘संपदा 2.0’ की वजह से रजिस्ट्री कराने वालों की फजीहत हो रही है। समस्या हल करने के लिए लिए मोती तबेला रजिस्ट्रार कार्यालय में हेल्प डेस्क भी शुरू की गई। यहां के तकनीकी जानकार व कर्मचारी प्रयास के बाद भी सॉफ्टवेयर की दिक्कतें दूर नहीं हो पा रही है।

*लोग कर रहे इंतजार*

मोती तबेला कार्यालय पर एक दर्जन के करीब रजिस्ट्री अटकी हुई है, जो विभिन्न कारणों से नहीं हो पा रही है। यह स्थिति तो एक ही कार्यालय की है, जबकि इंदौर में चार कार्यालय है। सभी जगहों पर ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि, कार्यालयों पर हेल्प डेस्क बना रखी है जो मदद करने का प्रयास कर रही है, लेकिन तकनीकी समस्या की वजह से उनके भी हाथ बंधे हुए हैं।

भरी गर्मी में चक्कर लगाकर हो गए परेशान

सराफा की मोरसली गली में दुकान खरीदने वाले ज्वेलर्स पुलकिंत डांगी पिछले दस दिनों से परेशान हो रहे हैं। स्लॉट बुक करने के बाद जब रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो थम्ब इंप्रेशन मैच नहीं कर रहा था। पहले उन्हें बताया गया कि आधार अपडेट कराएं। उस प्रक्रिया को पूरा करने के बावजूद बम्ब इम्प्रेशन मैच नहीं हुआ, जिसकी वजह से रजिस्ट्री

एक रजिस्ट्री में ही तीन दिन हो गए

सांवर विधानसभा के कांकरिया पाल गांव में एक बीघा जमीन खरीदने वाले राजेश यादव ने धार विन पहले स्लॉट बुक कराया था। यह जमीन जितेंद्र पिता हेमसिंग व उनके परिवार से खरीदी थी। रजिस्ट्री करने पहुंचे तो सॉफ्टवेयर बम्ब के साथ आई इम्प्रेशन भी नहीं हो रहा था।

नहीं हो रही है। दस दिनों से वे और उन्हें दुकान बेचने वाले इस उम्मीद से रजिस्ट्रार कार्यालय के २३ चक्कर लगा रहे हैं कि रजिस्ट्री हो जाएगी, लेकिन घंटों मशक्कत के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। नाराज डांगी का कहना है कि सरकार के सॉफ्टवेयर के फेल्यूअर से सौदा खटाई में आ ‘जाएगा क्योंकि बेचवाल रोज आकर परेशान हो चुका है।

इससे रजिस्ट्री अटक गई. जबकि आधार कार्ड अपडेट करा दिया गया। तीन दिन से लगातार दोनों पक्ष व गवाह आ रहे हैं। यादव का कहना है कि पूर्व में भी कई जमीन खरीदी-बिक्री होती रही है लेकिन आज तक परेशानी नहीं आई। रोज रजिस्ट्री होने की उम्मीद से आते हैं, लेकिन खाली हाथ जाते हैं।

संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर अच्छा है, लेकिन जब चले तथ। वर्तमान में स्थिति यह है कि आधे समय सॉफ्टवेयर चलता ही नहीं है। पक्षकार अपने निर्धारित समय पर आ जाता है और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार थम्ब व आई इम्प्रेशन सॉफ्टवेयर लेता नहीं है. जिसकी वजह से 15-15 दिन तक रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इसको लेकर कई बार विभाग के अफसरों से बात की गई, लेकिन ‘ढाक के तीन पात’ जैसी स्थिति है। कुल मिलाकर जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वह तो सरकार खजाना भर रही है।

वेवी प्रसाद शर्मा, वरेिष्ठ अभिभाषक

नए सॉफ्टवेयर से शासन को कितने राजस्व की हानि हो रही है। उदाहरण के लिए 50 दस्तावेज रोज होना थे, लेकिन अब 5 ही हो रहे हैं। लेटलतीफी तरकार का ही नुकसान करें रही है। किस्टम को लागू कर दिया, लेकिन व्यवस्था नहीं जुटाई गई है। दुर्भाग्य है कि उसको चलाने के प्रयास भी नहीं हो रहे हैं। इसके लिए अतिरिक्त क्रि लेना पड़े तो लेना चाहिए।

प्रमोद द्विवेदी, वरिष्ठ अभिभाषक

हमारा पूरा प्रयास है कि कठिनाई नहीं हो। इसको लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

दीपक कुमार शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक

Ramswaroop Mantri

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