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विराट के इस्तीफे से अफसोस हुआ मगर हैरतअंगेज नहीं लगा

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– रेहान शकील

जो विराट अपने पिछले ही मैच में देश के लिए टेक्नोलॉजी के फाल्ट पर विपक्षी टीम और अंपायर से उलझ गए थे उनके इस्तीफा पर हैरत सबको होना चाहिए था, इस्तीफे की खबर सुनते ही unbelievable वर्ड मेरे मुख से भी निकला था फिर भी मुझे आश्चर्य नहीं लगा।
किसी के रहमों करम पर नहीं कोहली अपने प्रदर्शन से विराट हुए है, बीसीसीआई जिस अंदाज से उनसे वनडे की कप्तानी छीनी है उससे काफ़ी आहत थे। गांगुली ने कहा की विराट को टिट्वेंटी कप्तानी के इस्तीफ़े से रोका गया था, जब विराट प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस झूठ का पर्दा फास करते हुए कहा की मुझे किसीने नहीं रोका बल्कि सभी ने वेलकम किया मेरे फैसला का और वनडे की कप्तानी से हटाने के लिए सिर्फ दो घंटे पहले बताया गया कि आप अगले कैप्टन नहीं है।इसी दिन लग गया था विराट जिस टेम्परामेंट के इंसान हैं वो जल्द ही टेस्ट के कप्तानी से भी इस्तीफ़ा दे देंगें और होगा तो बिना हिंट दिए क्रिकेट से भी अलविदा कह देंगें।विराट बिना हिंट दिए टेस्ट की कप्तानी से इस्तीफा दे दिए हैं क्रिकेट से अलविदा कह देंगे अब इस लाइन को अंदरलाइन कर लीजिए।
विराट आईपीएल की कप्तानी छोड़े थे टिट्वेंटी में भी कप्तान नहीं रहना चाहतें थे, ये दोनों इस्तीफ़े अपने मर्जी से दिए हैं, हालांकि वो हर हाल में वनडे में कप्तान बने रहना चाहते थे अगले वर्ल्डकप तक। बीसीसीआई वाइट बॉल में अलग कप्तान चाहता था रेड का अलग इसी नोटिफिकेशन के साथ आहिस्ते से विराट को साइड किया।
विराट संघी ट्रोलर से शमी को डिफेंड किये हाथरस पर ट्वीट किये थे, इस वज़ह उनके कद के साथ खिलवाड़ किया गया मैं ऐसी हल्की बातों में विश्वास नहीं करता। दैनिक भास्कर ने एक स्टोरी ब्रेक किया था विराट के वजह आईपीएल को बीच में बंद करना पड़ा जो कि बीसीसीआई नहीं चाहता था, आधे आईपीएल को यूएई शिफ्ट करना पड़ा इससे बोर्ड को काफी लॉस हुआ था। शायद विराट से खीज यही हो सकती है।
जिस कद और रुतबे के थे गांगुली लॉबी को इस बातें की फ़िक्र रहती थी कि वो चाहकर नहीं रोक पा रहे है विराट को कंट्रोल नही कर पा रहे हैं। विराट के बल्ले से रन निकल रहे हैं लेकिन दो साल से शतक नहीं आ रहा विराट ने अपना ऐसा स्टैंडर सेट किया है कि लोगों को लग रहा है मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं बीसीसीआई ने यही सही समय समझा विराट को रोकने के लिए। इसमें कोई शक नहीं कि विराट बीसीसीआई के राजनीति के शिकार हुए हैं, गाँगुली लॉबी ने इन्हें बैकफुट पर धकेला है।
विराट जब कप्तानी संभाले थे तब आईसीसी रैंकिंग में टीम इंडिया 7पे पोजिशन पर थी और जब छोड़ रहे हैं तो आज नंबर वन है। टीम को फर्श से अर्श पर लें जाने में अहम योगदान है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। 68 मैच में 40 में जीत दिलाई है टेस्ट क्रिकेट के सफ़ल कप्तानों में हमेशा याद किये जाएँगे।
विराट जिस अग्रेशन और कम्मिटमेंट से मैदान पर कप्तानी किये है वो उनमें अभी भी ढूंढना रहूँगा, हाथ में कैच आने पर मैं यही चाहूंगा की विराट अभी भी वैसे ही उछले जैसे कप्तान रहते हुए उछलते थे, विकेट गिरने पर मुट्ठी बांधकर ऐसे ही खुशि जताए जैसे जताते थे। विराट शांत नहीं रहे मैदान के एक कोने में चुपके से खड़े होकर टीम को लुटते हुए नहीं देखे।
विराट का मतलब ही अग्रेशन और कम्मिटमेंट हो गया है, अगर विराट इसके विपरित रियेक्ट किये और शांत हो गए तो विश्वास साहब मुझे हर बार याद आएँगे…
कि मुझे वो मारकर ख़ुश है कि सारा राज उस पर हैयक़ीनन कल है मेरा आज बेशक आज उस पर है,उसे जिद थी कि झुकाओ सर तभी दस्तार बख्शूंगामैं अपना सर बचा लाया महल और ताज उस पर है।
– रेहान शकील

Ramswaroop Mantri

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