जबलपुर. मोतीलाल नेहरू वार्ड की शासकीय राशन दुकान में दिवाली से पहले गरीबों को सड़ा और घुन वाला राशन दिया जा रहा था, जिसमें चावल में कीड़े और घुन लगा गेहूं शामिल था. जब गरीब हितग्राहियों ने राशन लेने से इनकार किया और पार्षद को शिकायत कर दी. पार्षद शफीक हीरा की सूचना पर संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन मौके पर पहुंचे. जांच के दौरान जय माता दी और समाधान राशन दुकानों को सील कर दिया गया. अनाज का सैंपल जांच के लिए भेजा गया. देर रात जांच में पता चला कि जून माह का पुराना राशन सितंबर माह का दिखाकर बांटने की साजिश हुई थी. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
पार्षद ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन मौके पर पहुंचे और जय माता दी प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार एवं समाधान प्राथमिक सहकारी भंडार की जांच की. दोनों राशन दुकानों को सील कर दिया गया और सड़े अनाज के वितरण पर रोक लगाई गई. अधिकारियों ने बताया कि घुन वाला गेहूं और चावल जांच के लिए भेजा गया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. संयुक्त कलेक्टर ने कहा, “हमने राशन की गुणवत्ता पर तत्काल निरीक्षण किया और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.”
पुराने अनाज को नया बताकर भेजा गया, दोषियों पर कार्रवाई शुरू
पार्षद शफीक हीरा ने कहा कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और प्रशासन पूरी तत्परता से मामले की जांच कर रहा है. बहरहाल देर रात तक चली जांच में सामने आया कि सितंबर माह में आए गेहूं और चावल की बजाय जून माह का पुराना अनाज वितरण के लिए भेजा गया था. इसे नए अनाज के रूप में प्रस्तुत करने की साजिश रची गई थी. कलेक्टर की अनुशंसा पर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत है. गरीबों को मिलने वाला अनाज ही उनके जीवनयापन का आधार है, ऐसे में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार उनके लिए गंभीर नुकसान कर सकता है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई रियायत नहीं दी जाएगी और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी.





