
-निर्मल कुमार शर्मा
‘अगर जंगल का सबसे बड़ा हिंसक जानवर शेर अपने से सैकड़ों गुना कम हिंसा करनेवाले भेड़िए को उसके खरगोशों के शिकार करने पर उसे हिंसा न करने का उपदेश देने लगे ! तो शायद दुनिया में इससे ज्यादे विद्रूपता और क्रूरतम् मजाक हो ही नहीं सकता ! ‘
लेकिन ऐसा ही एक हतप्रभ,बिस्मित और आश्चर्यजनक करनेवाला वाकया रूस-यूक्रेन युद्ध से संबंधित मामले में तथाकथित इस दुनिया के सबसे बड़े कथित लोकतांत्रिक,कथित महाबली देश,कथित तौर पर सबसे बड़े मानवाधिकार के रक्षक तथा पैरोकार तथा दुनिया के सबसे बड़े मानव रक्त पिपासु देश और नरभक्षी देश संयुक्त राज्य अमेरिका के महामहिम राष्ट्रपति जो बाइडेन साहब ने अभी-अभी पिछले दिनों कुछ यूं फ़रमाया है !
हुआ यूं कि अभी पिछले दिनों पूर्व सोवियत गुट के देश पोलैंड में,जो युद्धग्रस्त यूक्रेन का ठीक पड़ोसी देश भी है,वहां यूक्रेनी शरणार्थियों के आंसू पोंछने तथा रूस को धमकाने के लिए पोलैंड में अवैध रूप से नाटो की तरफ से तैनात अपने अमेरिकी सैनिकों की हौसला आफजाई करने और घड़ियाली आंसू बहाने आए जो बाइडेन साहब ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन को दुनिया का सबसे क्रूर,आतताई व्यक्ति बताने के साथ-साथ उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा कसाई व्यक्ति भी कह दिया ! इसके आगे अपनी कथित चौधराहट के नशे में बोल गये कि ‘हे भगवान यह व्यक्ति अब सत्ता में बना नहीं रह सकता ! ‘ जो बाइडेन साहब के इस अनर्गल प्रलाप के तुरन्त बाद ही बगैर वक्त गंवाए रूसी प्रवक्ता का अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन साहब के इस मुंहफट और फूहड़ बयान के विरोध में मुंहतोड़ जवाब भी आ गया कि ‘अमेरिकी राष्ट्रपति और अमेरिकी नागरिक यह तय नहीं करेंगे कि रूस में कौन सत्ता में बना रह सकता है और कौन नहीं ! ‘
इस बेहद शर्मनाक घटना के बाद खुद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने तुरंत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के अभ्रद्र बयान का बहुत ही सभ्य और शालीन भाषा में जवाब देते हुए कहा कि ‘वे मतलब पुतिन जो बाइडेन की अच्छी सेहत के लिए दुआ करते हैं। ये सच है कि हम एक-दूसरे को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं। जब हम लोगों को,शहरों को,देशों का आकलन और विश्लेषण करते हैं तो हम हमेशा आईने में देखते हैं। हम हमेशा दूसरों को वो कहना चाहते हैं जो हम खुद हैं,ये कोई संयोग नहीं है,जो हम खुद हैं,ये कोई बचकाना चुटकुला नहीं है,इसका बहुत गहरा साइकोलॉजिकल मतलब है, उन्होंने मूल अमेरिकियों के संहार और गुलामी के अमेरिकी इतिहास की ओर इशारा ही करते हुए कहा कि अमेरिका पर उसकी दर्दनाक विरासत भारी है ! नहीं तो ‘ब्लैक लाइव्स मैटर ‘ आंदोलन कहां से आ जाता ?’ ,कितने शर्म की बात है कि अपने पदासीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के इस मुंहफट और शर्मनाक बयान से अमेरिका का राष्ट्रपति भवन यानी ह्वाइट हाउस खुद को उस बयान से अलग-थलग कर लिया है !अमेरिका के नाटो का प्रमुख सदस्य और मित्र देश फ्रांस ने भी जो बाइडेन के अभ्रद्र बयान से दूरी बना लिया है ! फ्रैंच राष्ट्रपति ने बाइडेन की असंसदीय टिप्पणी की भर्त्सना करते हुए कहा कि ‘इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी से युद्ध और भड़कता है ‘
सबसे पहले अफगानिस्तान के एक छोटे से कुछ हजार की संख्या बल वाले आंतकवादी गुट तालिबानियों के डर से दुम दबाकर भाग खड़े होने वाले कथित महाबली अमेरिका के राष्ट्रपति महामहिम जो बाइडेन साहब के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन को दुनिया के सबसे बड़े कसाई होने के वक्तव्य की व्याख्या करते हैं,इस दुनिया का इतिहास गवाह है कि वर्ष 1950के कोरियाई युद्ध से लेकर आज तक 2022 में हो रहे रूस-यूक्रेन युद्ध तक के 72साल के विस्तृत कालखण्ड तक में कुटिल,क्रूर,आतताई, फासिस्ट, युद्ध पिपासु, रक्त पिपासु अमेरिकी-साम्राज्यवादी ही इस दुनिया में खलनायक की भूमिका में रहे हैं !
उदाहरणार्थ कोरिया,वियतनाम,क्यूबा, सीरिया,लिबिया,सूडान,इराक,अफगानिस्तान आदि देशों को,वहां की जनता को युद्ध की बिभीषिका और आर्थिक प्रतिबंध लगाकर उन छोटे-छोटे देशों की अरबों जनता को जबरन गरीबी,भूखमरी, बीमारी,अशिक्षा आदि अमानवीय दु :स्थिति में धकेलने,वहां जबरन युद्ध थोपकर,वहां के करोड़ों निरपराध सैनिकों, असैनिकों,आम नागरिकों,वृद्धों, युवाओं, स्त्रियों,नन्हें बच्चों को मौत के घाट उतारने में मुख्य भूमिका इन्हीं शातिर,नरभक्षी कुटिल,क्रूर आतताई,फासिस्ट,युद्ध पिपासु ,रक्त पिपासु अमेरिकीसाम्राज्यवादियों की मुख्य खलनायक की भूमिका रही है ! क्यूबा सहित तमाम दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के देशों यथा बोलिविया,चिली, ब्राजील आदि देशों में अपनी कुख्यात संस्था सीआईए के कुत्तों और एजेंटों से वहां के लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए सत्तासीन राष्ट्राध्यक्षों की थोक के रेट में हत्या करवाकर,उनकी तख्तापलट करने के कुकृत्य करने में निर्लज्जता से संलिप्त रहा है !
यही अमेरिकी अपने सीआईए के गुर्गों से महान क्रांतिकारी,साम्यवादी,मजदूरों -किसानों के मसीहा,गरीबों के प्रबल पक्षधर, दार्शनिक, डाक्टर,लेखक,पत्रकार,मानवमित्र,कालातीत बहादुर योद्धा चेग्वारा की सरेआम अपने गुर्गों से हत्या करवा दिया ! क्यूबा के महान राष्ट्रपति फिडेल कास्ट्रो की हत्या करने का सैकड़ों बार असफल कोशिश किया,लेकिन संयोग से और बुद्धिमत्ता से वह बहादुर व्यक्ति अपने जीवन को अंत तक बचा लेने वाले सौभाग्यशाली योद्धा निकले ! आखिर ये वर्तमान समय में अमेरिकीसाम्राज्यवादियों का कर्णधार जो बाइडेन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दुनिया का सबसे बड़े कसाई होने के खिताब से नवाजने से पूर्व अपने गिरेबान में भी एक बार झांक लेने की कोशिश कम से कम एक बार तो अवश्य कर लेता ! ये जो बाइडेन उसी अमेरिकीसाम्राज्यवाद का वर्तमान कर्णधार है,जिसके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति बुश अभी कुछ ही दिन पूर्व इस दुनिया के एक प्राचीन बेबीलोनी सभ्यता का प्रतीक इराक को कथित केमिकल बम रखने का छद्म आरोप लगाकर नेस्तनाबूद कर दिया ! वहां के सुयोग्य शासक सद्दाम हुसैन को सरेआम फांसी पर लटका दिया ! जबकि इराक में कोई केमिकल बम था ही नहीं ! भूख से बिलबिलाते इराकी बच्चों को अपने विमानों से बिस्कुट के पैकेट के छद्म पैकेट में छोटे-छोटे बम बरसाकर मौत के घाट उतारने में जरा भी संकोच नहीं किया था ! प्रश्न है कि रूस सहित दुनिया के तमाम देशों में शासन की बागडोर किस व्यक्ति के हाथों में रहेगी,इसका ठेका अमेरिकीसाम्राज्यवाद के कर्णधारों ने ले रखा है ? आखिर यह कुटिलता पूर्ण दुर्नीति अपनाने का ठेका अमेरिका के इन शातिर पूंजीवादपरस्त भेड़ियों को किसने दिया है ? एक प्रश्न वैश्विक फिंजां में अभी भी तैर रहा है कि अमेरिकी कर्णधार और पश्चिमी मिडिया यह बताने का कष्ट करेगी कि आज इराक के लोग कथित सद्दाम हुसैन के शासन से मुक्त होकर कितने खुशहाली और सुखमय जीवन जी रहे हैं ?
आज इस दुनिया की समस्त विश्व मानवता अमेरिकी साम्राज्यवादियों के कुकृत्यों से बेहद त्रस्त और आहत है ! यह वर्तमान रूस-यूक्रेन युद्ध भी इन्हीं बेशर्म अमेरिकी साम्राज्यवादियों के कुकृत्यों और दुर्नीतियों का दुष्परिणाम है ! यक्षप्रश्न है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस नामक एक निस्तेज देश एक डिफेंडिंग देश के रूप में शांति से जी ही तो रहा था ! लेकिन कुटिलता की पराकाष्ठा तक नीच,अधम अमेरिकी साम्राज्यवादियों को रूस के इस निस्तेज और शांतिपूर्वक जीने के अधिकार से वंचित करते हुए,उसकी सीमा तक के देशों में कुटिलता की पराकाष्ठा तक बर्बरतापूर्ण कुकृत्य करते हुए नाटो नामक नापाक सैन्य संगठन के विस्तार करने और रूस की सुरक्षा तक को भेदने की क्या जरूरत थी ? आज कथित निष्पक्ष समाचार एजेंसी बीबीसी और समस्त पश्चिमी मिडिया के कुत्ते रूस और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन का चरित्र हनन करने में दिन-रात एक किए हैं ! हम इस कथित निष्पक्ष मिडिया के रूप में दुष्प्रचारित बीबीसी और पश्चिमी मिडिया के कथित बड़े-बड़े दृश्य,श्रव्य और प्रिंट मीडिया के कथित महान पत्रकारों से एक ही प्रश्न पूछना चाहते हैं कि क्या यही अमेरिका अपने पड़ोसी देशों यथा क्यूबा,मैक्सिको या कनाडा में रूसी इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को तैनात करने देगा ? इसका उत्तर है हर्गिज नहीं ! ये बात अमेरिकी साम्राज्यवादियों के पिट्ठुओं यथा इंग्लैंड, फ्रांस,जर्मनी,आस्ट्रेलिया,जापान आदि सभी देशों पर भी लागू करके देखिए कि ये उक्त वर्णित जितने देश हैं वे अपने ठीक पड़ोस में सैन्य अड्डे स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान करने की हिम्मत करेंगे,जाहिर है कभी नहीं करेंगे ! तो उसी जैसी परिस्थितियों को पैदा करने के कुकृत्य को रूस और उसका राष्ट्रपति व्लादिमीर व्लादीमीरोविच पुतिन कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं ?
तो गुरू गंभीर यक्षप्रश्न है कि वैश्विक स्तर पर यह दोगली नीति क्यों ? शांतिपूर्वक जी रहे रूस नामक राष्ट्र राज्य के चारों तरफ नाटो नामक नापाक सैन्य संगठन की घेरेबंदी क्यों ?अब समय आ गया है कि अमेरिकी साम्राज्यवादियों सहित पश्चिमी यूरोपीय देशों की झूठी,भोंपू, दुम हिलाऊ,फ्राड और प्रोपेगेंडा करने वाली मिडिया की कुटिलता और उसके दोगलेपन की दुर्नीतियों के खिलाफ भी इस दुनिया की न्याय और इंसानियत की पक्षधर रूस,चीन,क्यूबा, भारत,सउदी अरब,सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और अरब की समस्त मिडिया,पत्रकार, लेखक,कवि,प्रवक्ता और जागरूक लोग संगठित होकर सशक्त ढंग से अपना पक्ष रखकर उन पश्चिमी देशों की झूठी और मक्कार मिडिया को सशक्त ढंग से अनावृत्त और नंगा करके समस्त दुनिया की जनता को सही और वास्तविक तथ्य बताने के अपने पुनीत,पावन व अभीष्ट कार्य को ईमानदारी, कर्मठता और प्रतिबद्धता तथा जीवटता से करना सुनिश्चित करें !
-निर्मल कुमार शर्मा 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा समाचार पत्रों में बेखौफ, सशक्त तथा स्वतंत्र लेखन, गाजियाबाद, उप्र,




