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400 साल पुराने किले से बसाया गया ‘सागर’  शहर

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400 साल पहले हरी-भरी पहाड़ी के नीचे एक सुंदर झील के किनारे एक आलीशान फोर्ट बनाया गया था. इसी फोर्ट के बाहर परकोटा नाम की बस्ती बसाई गई थी जो अब शहर के बीचों-बीच स्थित है. सागर के सागर बनने की शुरुआत इसी किले के निर्माण के साथ हुई थी. बुंदेलखंड का सागर किला भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो कभी नगरीय प्रशासन के अधीन नहीं रहा है. 1660 में गढ़पहरा के दांगी शासक उदान शाह ने लाखा बंजारा के सहयोग से इसका निर्माण करवाया था

मध्य प्रदेश का सागर रजवाड़ी शासनकाल से ही भौगोलिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहा है. यही वजह है कि यहां एक दर्जन से अधिक बड़े-बड़े किले मौजूद है जो इतिहास और संस्कृति की गौरव गाथा सुनाते है. इस जिले के धामोनी में अकबर का शासनकाल रहा और ऐरन में महान सम्राट समुद्रगुप्त अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में परिवार के साथ रहने आए थे. लेकिन आज हम सागर के सागर बनने की कहानी पर ध्यान देंगे.

400 साल पहले हरी-भरी पहाड़ी के नीचे एक सुंदर झील के किनारे एक आलीशान फोर्ट बनाया गया था. इसी फोर्ट के बाहर परकोटा नाम की बस्ती बसाई गई थी जो अब शहर के बीचों-बीच स्थित है. सागर के सागर बनने की शुरुआत इसी किले के निर्माण के साथ हुई थी. बुंदेलखंड का सागर किला भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो कभी नगरीय प्रशासन के अधीन नहीं रहा है. 1660 में गढ़पहरा के दांगी शासक उदान शाह ने लाखा बंजारा के सहयोग से इसका निर्माण करवाया था. लेकिन 1733 में बुंदेला राजाओं ने इसे मराठाओं को दे दिया और दांगी राजा को निर्वासित कर दिया गया.

मराठाओं के शासन शुरू करने से पहले कुरवाई के नवाब ने यहां 5 साल तक शासन किया था. मराठाओं के सूबेदार गोविंद पंथ खैर ने यहां नया सागर बसाया और उन्हें सागर को सागर बनाने का श्रेय दिया जाता है. 1818 में ब्रिटिश सेना के जेम्स पैटर्न ने इसे अपने कब्जे में लिया और 1906 में यहां पुलिस स्कूल की शुरुआत की गई. इसके बाद सागर के अन्य किलों में भी पुलिस थाने स्थापित किए गए जो आज भी मौजूद है.

आज इस किले को जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी के नाम से जाना जाता है, क्योंकि 1952 में पासिंग आउट परेड के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू यहां आए थे. सागर के इतिहासकार डॉक्टर रजनीश जैन बताते है कि पहले नदी और तालाबों के किनारे किले बनते थे, जो सुरक्षा की दीवार का काम करते थे. सागर भी झील के किनारे बना था. जिससे सीधा हमला करना मुश्किल हो जाता था. 1857 की क्रांति से पहले यहां बुंदेला विद्रोह हुआ था. जहां क्रांतिकारियों ने 370 अंग्रेजों को 222 दिन तक बंधक बनाकर रखा था. बाद में ब्रिटिश सेना ने इसका दमन कर अंग्रेजों को आजाद कराया और छावनी स्थापित की गई.

वर्तमान में यह किला गृह विभाग की संपत्ति है और आजादी के बाद भी इसे नगरीय प्रशासन का अधिकार नहीं मिला है. यह आम जनता के लिए साल में केवल दो दिन 15 अगस्त और 26 जनवरी को सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुलता है. इस किले का स्वरूप आज भी वैसा ही है जैसा सदियों पहले था. कुछ साल पहले सौंदर्यकरण के दौरान इसे लाल गेरुआ रंग से पुताई की गई, जिससे यह अब लाल किले की तरह दूर से ही चमकदार दिखाई देता है.

Ramswaroop Mantri

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