पिछले दिनों जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायाधीश विशाल मिश्रा जी ने देश के इतिहास में एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसने ये यकीन दिलाया है कि न्याय पालिका में अभी भी विश्वास की आशा बाकी है। उक्त सत्य तब सामने आया जब कटनी जिले के विख्यात अरबपति भाजपा विधायक संजय पाठक की मां निर्मला पाठक और पुत्र यश पाठक की सिहोरा तहसील में घरेलू फर्म आनंद माइनिंग कारपोरेशन और निर्मला मिनरल्स एवं पैसेफिक एक्सपोर्ट ने स्वीकृत से ज़्यादा खनन किया।इसकी शिकायत कटनी के युवा सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने 31जनवरी को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में की।इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो दीक्षित हाईकोर्ट पहुंच गए।इसी बीच खनन विभाग ने इन फर्मों पर 443 करोड़ की पैनाल्टी लगा दी।
हाईकोर्ट मामला पहुंचा तो प्रदेश के सबसे अमीर भाजपा विधायक संजय पाठक ने सुनवाई करने वाले जस्टिस को अप्रोच किया।जिसका उल्लेख जज साहब ने कोर्ट की आर्डर शीट में लिख दिया है उन्होंने लिखा कि “विधायक पाठक ने उनसे इस मामले में सीधे फोन कर चर्चा करने की कोशिश की इसलिए मैं इस केस की सुनवाई करने का इच्छुक नहीं हूं।”इस तरह उन्होंने इस मामले की सुनवाई से अपने को अलग कर लिया है।
कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए इसे चीफ़ जस्टिस के पास भेजा है।अब चीफ़ जस्टिस तय करेंगे कि मामला किस बेंच में सुना जाएगा। विदित हो इसके पहले प्रमुख सचिव माइनिंग ने जांच टीम बनाई थी। टीम ने दो बिन्दुओं पर जांच की और एक्सिस माइनिंग का आरोप सही पाया गया। विधानसभा में मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने भी माना था कि इन कंपनियों से 443 करोड़ की वसूली होनी है।
संजय पाठक परिवार की इन कंपनियों की तरफ से 22अगस्त को कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लिकेशन लगाई गई थी जिसमें कहा गया था कि बिना सुनवाई किए पैनाल्टी लगाई गई है।आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता ने राजनैतिक द्वेष से यह कदम उठाया और सरकार पर दबाव बनाया। कंपनियों का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान उनकी छवि खराब कर रहा है।एक सितंबर को सुनवाई से पूर्व यह अप्रोच की हिमाकत सामने आ गई।जिसका खुलासा जज विशाल मिश्रा जी अपनी आर्डर शीट में कर दिया।
हालांकि इस तरह का एक मामला 2021 में एक जज को शाजापुर एक्साइज अफ़सर ने जज को घूस देने की पेशकश की थी।ये घूस स्टेनोग्राफर के ज़रिए जमानत ऑफर किए गए थे।जज ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी बाद में इंदौर बेंच ने भी ऐसा ही किया। किंतु यह मामला एक अदने से कर्मचारी का था।उसने सीधे अप्रोच भी नहीं किया था। मामला महिला शोषण से सम्बंधित था।
किंतु न्यायाधीश विशाल शर्मा जी ने एक अरबपति भाजपा विधायक संजय पाठक जिसकी सरकार प्रदेश में हो।उसकी पोल खोल कर न्याय की ताकत को सामने लाया है वह श्लाघनीय है।इस समय जब केंद्र से लेकर राज्य सरकारों पर न्याय को प्रभावित करने के निरंतर कथित तौर पर लगातार आरोप लग रहे हैं ऐसे कठिन समय में निर्भीकता पूर्वक सत्ता से जुड़े लोगो की भूमिका की एक बानगी प्रस्तुत की। जिससे सत्ताधारियों में खलबली है।
सूत्र बता रहे हैं कि जज साहब को प्रभावित करने वाले इस प्रकरण में विधायक महोदय की विधायकी भी खतरे में है।यह सब उन पर चल रहे एक दर्जन से अधिक चल रहे आपराधिक मामलों में भी उन्हें गिरफ्त में ले सकता है।
इस बीच कटनी नगर ही नहीं संपूर्ण देश में खुशी की एक तरंग उठी है। कतिपय लोगों का ख्याल है यह सत्ता परिवर्तन की पहचान है। माहौल गर्म है बदलाव करीब है। बहरहाल इसके श्रीगणेश का श्रेय जबलपुर हाईकोर्ट के जज विशाल मिश्रा जी को जाता है। उन्हें सलाम।
न्यायाधीश विशाल शर्मा जी ने देश के इतिहास में एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसने ये यकीन दिलाया है कि न्याय पालिका में अभी भी विश्वास की आशा बाकी है। उक्त सत्य तब सामने आया जब कटनी जिले के विख्यात अरबपति भाजपा विधायक संजय पाठक की मां निर्मला पाठक और पुत्र यश पाठक की सिहोरा तहसील में घरेलू फर्म आनंद माइनिंग कारपोरेशन और निर्मला मिनरल्स एवं पैसेफिक एक्सपोर्ट ने स्वीकृत से ज़्यादा खनन किया।इसकी शिकायत कटनी के युवा सामाजिक कार्यकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने 31जनवरी को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में की।इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो दीक्षित हाईकोर्ट पहुंच गए।इसी बीच खनन विभाग ने इन फर्मों पर 443 करोड़ की पैनाल्टी लगा दी।
हाईकोर्ट मामला पहुंचा तो प्रदेश के सबसे अमीर भाजपा विधायक संजय पाठक ने सुनवाई करने वाले जस्टिस को अप्रोच किया।जिसका उल्लेख जज साहब ने कोर्ट की आर्डर शीट में लिख दिया है उन्होंने लिखा कि “विधायक पाठक ने उनसे इस मामले में सीधे फोन कर चर्चा करने की कोशिश की इसलिए मैं इस केस की सुनवाई करने का इच्छुक नहीं हूं।”इस तरह उन्होंने इस मामले की सुनवाई से अपने को अलग कर लिया है।
कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए इसे चीफ़ जस्टिस के पास भेजा है।अब चीफ़ जस्टिस तय करेंगे कि मामला किस बेंच में सुना जाएगा। विदित हो इसके पहले प्रमुख सचिव माइनिंग ने जांच टीम बनाई थी। टीम ने दो बिन्दुओं पर जांच की और एक्सिस माइनिंग का आरोप सही पाया गया। विधानसभा में मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने भी माना था कि इन कंपनियों से 443 करोड़ की वसूली होनी है।
संजय पाठक परिवार की इन कंपनियों की तरफ से 22अगस्त को कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लिकेशन लगाई गई थी जिसमें कहा गया था कि बिना सुनवाई किए पैनाल्टी लगाई गई है।आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता ने राजनैतिक द्वेष से यह कदम उठाया और सरकार पर दबाव बनाया। कंपनियों का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान उनकी छवि खराब कर रहा है।एक सितंबर को सुनवाई से पूर्व यह अप्रोच की हिमाकत सामने आ गई।जिसका खुलासा जज विशाल शर्मा जी अपनी आर्डर शीट में कर दिया।
हालांकि इस तरह का एक मामला 2021 में एक जज को शाजापुर एक्साइज अफ़सर ने जज को घूस देने की पेशकश की थी।ये घूस स्टेनोग्राफर के ज़रिए जमानत ऑफर किए गए थे।जज ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी बाद में इंदौर बेंच ने भी ऐसा ही किया। किंतु यह मामला एक अदने से कर्मचारी का था।उसने सीधे अप्रोच भी नहीं किया था। मामला महिला शोषण से सम्बंधित था।
किंतु न्यायाधीश विशाल शर्मा जी ने एक अरबपति भाजपा विधायक संजय पाठक जिसकी सरकार प्रदेश में हो।उसकी पोल खोल कर न्याय की ताकत को सामने लाया है वह श्लाघनीय है।इस समय जब केंद्र से लेकर राज्य सरकारों पर न्याय को प्रभावित करने के निरंतर कथित तौर पर लगातार आरोप लग रहे हैं ऐसे कठिन समय में निर्भीकता पूर्वक सत्ता से जुड़े लोगो की भूमिका की एक बानगी प्रस्तुत की। जिससे सत्ताधारियों में खलबली है।
सूत्र बता रहे हैं कि जज साहब को प्रभावित करने वाले इस प्रकरण में विधायक महोदय की विधायकी भी खतरे में है।यह सब उन पर चल रहे एक दर्जन से अधिक चल रहे आपराधिक मामलों में भी उन्हें गिरफ्त में ले सकता है।
इस बीच कटनी नगर ही नहीं संपूर्ण देश में खुशी की एक तरंग उठी है। कतिपय लोगों का ख्याल है यह सत्ता परिवर्तन की पहचान है। माहौल गर्म है बदलाव करीब है। बहरहाल इसके श्रीगणेश का श्रेय जबलपुर हाईकोर्ट के जज विशाल शर्मा जी को जाता है। उन्हें सलाम।
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