प्रति लीटर 1.50 पैसे के आसपास किसानों को फिर से नुकसान उठाना पड़ेगा*
देपालपुर से भूरा धाकड़। दूध उत्पादक किसानों को एक बार फिर चपत लगने वाली है क्योंकि इस बार फिर से किसानों को माह के तीसरे सप्ताह में दूसरी बार दूध के उत्पादन में प्रति लीटर डेढ़ रुपए के आसपास घाटा उठाना पड़ेगा पहले जो दूध सांची दूध संघ द्वारा लिया जाता था उसका 6 रु प्रति फैट किसानों को मिलता था परंतु इस भाव में कटौती करते हुए 20 पैसे प्रति फैट की कमी सांची दूध संघ द्वारा की गई है अब किसानों से 5.80 पैसे फैट के हिसाब से दूध लिया जाएगा मैं लगातार पशुओं को खिलाने वाली वस्तुओं के भाव आसमान पर हैं जिससे किसानों की लगातार लागत से बढ़ोतरी से कमर टूटती जा रही है एक बार फिर से दूध उत्पादक किसानों के लिए दूध के भाव कम होने से किसानों की मुश्किल बढ़ना लाजमी है किसानों के लिए लगातार दूध का व्यापार घाटे का सौदा साबित हो रहा है एक और कोरोना महामारी के चलते 2 सालों से लगातार किसान बेहाल नजर आ रहे हैं परंतु इस मुश्किल घड़ी में सरकार व जनप्रतिनिधि भी इस वास्तविकता से रूबरू होने के बावजूद भी किसानों की अनदेखी कर रहे हैं
*इसलिए हुए दूध के भाव कम*
*भोपाल डेयरी फेडरेशन प्रबंध संचालक से पत्र क्रमांक 1850 दिनांक 17 मई को सांची दूध संघ इंदौर के अध्यक्ष व संचालक मंडल ने दूध के लाभात्मकता बनाए रखने की शर्त के साथ गाय व भैंस के दूध की क्रय दर में कमी को लेकर सहमति मांगी थी इस पर प्रबंध संचालक भोपाल द्वारा सहमति प्रदान की गई है उसके बाद किसानों में दूध के भाव में कमी को लेकर नाराजगी व आक्रोश देखा जा रहा है* *किसान नेता बबलू जाधव ने बताया कि सांची दूध संघ किसानों से जुड़ी हुई संस्था है किसानों की मेहनत से ही अब तक लाभांश में चल रही है परंतु लगातार किसानों द्वारा उत्पादित दूध के दामों में कमी करना कहीं से भी उचित नहीं है पिछले डेढ़ साल से लगातार दूध, फल ,सब्जी व अनाज के भाव में भारी कमी के चलते किसान बेहाल है परंतु अब तक शासन द्वारा कोई राहत राशि नहीं दी गई उसके उल्टा सरकार भी किसानों के हक के पैसे पिछले 2 साल से लेकर बैठी है उन्होंने बताया कि प्याज भावांतर ,सोयाबीन बोनस, गेहूं बोनस के साथ सोयाबीन किट प्रकोप आरबीसी 6 (4)की राहत राशि भी अब तक किसानों को नहीं दी गई है यह राशि जल्द से जल्द दी जावे साथ ही दूध के दामों में फिर से बढ़ोतरी की जावे*





