
सुसंस्कृति परिहार
इस बार जिस प्रकार से संदेशखाली में टीएमसी नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन शोषण व जमीन हड़पने की घटनाएं सुर्खियों में आई हैं, उसके बाद से सभी राजनीतिक दलों ने पिछली घटनाओं को छोड़कर संदेशखाली को पकड़ लिया है जबकि पिछले चुनावों मे सिंगूर के मुद्दे पर ही विपक्ष ममता को घेरता रहा है। राज्य के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में नारी अत्याचार की घटनाओं ने इस बार के चुनाव में सिंगुर जैसे मुद्दे को फीका कर दिया है। आमतौर पर देखा गया है कि वर्ष 2009 से अब तक जितने भी चुनाव हुए हैं उनमें सिंगुर की घटना विपक्ष के लिए प्रधान मुद्दा बना रहता था।इस बार जिस प्रकार से संदेशखाली में टीएमसी नेताओं द्वारा महिलाओं के यौन शोषण व जमीन हड़पने की घटनाएं सुर्खियों में आई हैं, उसके बाद से सभी राजनीतिक दल इन घटनाओं को छोड़कर संदेशखाली को पकड़ लिया है। सिंगुर हुगली लोकसभा संसदीय क्षेत्र के अंर्तगत है।पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना ज़िले में बांग्लादेश की सीमा से सटा अनाम-सा कस्बा संदेशखाली एक बार फिर राज्य में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है.
इस मुद्दे पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी में भी ठन गई है।आज वामदल और भाजपा दोनों इस मामले में साथ खड़े नज़र आ रहे हैं।इस घटना को और तूल दिया वहां मिले हथियारों के जखीरे ने। सीबीआई जांच कर रही हैं कुछ गिरफ्तार भी होने की खबर है।
हालांकि ममता इस कृत्य के लिए संघ को दोषी ठहरा रही हैं।जो सच लगता है क्योंकि धज्जी को सांप बनाने में संघ का कोई जवाब नहीं।कहा जाता है कि संदेशखाली रेड लाइट एरिया की तरह है जहां सभी तरह के लोग स्त्रियों का बराबर शोषण करने वहां जाते रहे हैं ये बात हावड़ा क्षेत्र के लोग भली-भांति जानते हैं।इसको तूल देने यहां की तीन महिलाओं को तैयार किया गया उनने इस बात को कुबूल किया है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं ने उनसे कोरे कागज पर साईन इसलिए कराए थे कि उन्हें मदद दिलवायेंगे उन्ही कागज़ों का इस्तेमाल तृणमूल के एक मुस्लिम नेता पर किया गया है हालांकि हालात बिगड़ते देख ममता सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है ।तब हथियारों का जखीरा पकड़कर ममता के ख़िलाफ़ नया बखेड़ा खड़ा किया गया है।बड़ी बात तो यह है एक कथित पीड़िता को क्षेत्र से भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। मोदी, नड्डा और शाह इस कांड को लेकर पूरे बंगाल में घूम-घूम कर प्रचारित कर रहे हैं।सबसे बड़ी बात यह है कि इस वक्त ममता संदेश खाली षडयंत्र की शिकार बनाई गई हैं। गठबंधन से दूरी ने उनकी मुसीबतों में इज़ाफ़ा किया है। इसलिए अब वे इंडिया को बाहर से समर्थन देने की दुहाई दे रही हैं। हालांकि लगता नहीं है कि संदेश खाली का संदेश बंगाल की महिलाओं पर असर डाल पाएगा क्योंकि महिला अत्याचार मामले में यह प्रदेश बहुत पीछे है इसके विपरीत महिला सुरक्षा , महिला कल्याण, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में ये सबसे आगे है।घनी आबादी वाले बंगाल में बहुतायत से बाहर से आए लोग जो यहां मौजूद है वे यहां बेखटके, निर्भय होकर अपना व्र्यवसाय करते हैं।
आज बंगाल की जनता भली-भांति समझ रही है जो भाजपा नेता संदेशखाली क्षेत्र में नारी अत्याचार पर चहुं ओर चीख रहे हैं वे अपने गिरेबान में झांके जिन्होंने मणिपुर में नारी अत्याचार पर जुबां नहीं खोली। कितने भाजपा नेता महिला अत्याचार से जुड़े हैं और नेताओं की शरण में सुरक्षित हैं । कुश्ती पहलवान महिला चेम्पियन के साथ यौन शोषण मामले पर बजभूषण सिंह पर क्या किया गया तथा कुलदीप सेंगर जैसे कई लोग भुलाए नहीं जा सकते।इसलिए लगता नहीं है कि यह मसला आम चुनाव को प्रभावित करेगा । स्थितियों में थोड़ा बदलाव हो सकता है लेकिन अभी हालात भाजपा के ख़िलाफ़ बने हुए हैं। ममता दीदी की लोकप्रियता बरकरार है पर बदलाव होना भी तय है भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस और माकपा कै वोट बैंक बढ़कर उन्हें जिता सकते हैं। भाजपा का दायरा बढ़ाने की अपेक्षा सिमटने वाला है।यदि इंडिया गठबंधन साथ होता तो ममता मुसीबत में नहीं फंस पाती। भाजपा साफ़ हो जाती ।बहरहाल,देर आए दुरुस्त आए।




