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*सराफा चौपाटी:ओटलों, बेसमेंट और अवैध निर्माणों में तोडफ़ोड़ के डर से भी सरेंडर हुए सराफा कारोबारी*

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  • महापौर  की रणनीति रही सफल, दबाव-प्रभाव के साथ सभी जनप्रतिनिधियों को भी किया सहमत, अब सराफा चौपाटी के कायाकल्प की भी चुनौती

इंदौर, राजेश ज्वेल। आखिरकार सराफा कारोबारी रातोरात सराफा चौपाटी कायम रखने पर सहमत कैसे हो गए इसे लेकर पूरे सराफा बाजार में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। अग्रिबाण ने ही सबसे पहले यह खुलासा कर दिया था कि चौपाटी नहीं हटेगी और परम्परागत व्यंजनों के साथ जारी रहेगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की रणनीति इस मामले में सफल रही, क्योंकि वे पहले दिन से ही इस बात पर अड़े हुए थे कि देश-विदेश में सराफा चौपाटी मशहूर है और उसे पूरी तरह से हटा नहीं सकते और वर्षों से जो परम्परागत व्यंजनों की दुकानें लग रही हैं वह मौजूद रहें। मंत्री-विधायक के साथ जनप्रतिनिधियों को भी महापौर ने अपनी मंशा अनुरूप सहमत कर लिया और सराफा कारोबारी अकेले पड़ गए। संघ-भाजपा से लेकर उज्जैन तक के सम्पर्कों को भी इन कारोबारियों ने टटोल लिया, मगर सभी जगह से निराशा हाथ लगी। ओटलों, बेसमेंट और अवैध निर्माणों के टूटने के डर ने भी इन कारोबारियों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।

यह पहला मौका है, जब सराफा कारोबारियों ने भी एकजुटता के पूरे प्रयास किए और 125 शपथ-पत्र भी सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने जमा कर लिए। अध्यक्ष सहित सभी कारोबारियों ने अंत तक अपने तेवर भी बरकरार रखे और दो टूक राय भी जाहिर करते रहे कि सराफा चौपाटी 1 सितम्बर से नहीं लगने देंगे। मगर महापौर भार्गव सहित अन्य जनप्रतिनिधि इस पर सहमत नहीं हुए कि शहर की पहचान और परम्परागत सराफा चौपाटी को एकाएक खत्म कर दिया जाए। महापौर भार्गव का कहना है कि देश-विदेश में यह चौपाटी मशहूर है और जो भी प्रतिष्ठित व्यक्ति इंदौर आता है वह खान-पान के इस परम्परागत ठीये पर अवश्य जाता है और शहर की भी जनता वर्षों-बरस से यहां व्यंजनों का लुत्फ लेने आती रही है। सराफा कारोबारियों की जो समस्या है उसे हम दूर करेंगे और यही कारण है कि 9 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जिसमें कारोबारियों, दुकानदारों के साथ निगम भी शामिल रहेगा।

फायर सेफ्टी, पार्किंग के साथ-साथ सराफा चौपाटी का पूरा कायाकल्प किया जाएगा। दूसरी तरफ सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकम सोनी का कहना है कि व्यापारी किसी तरह दबाव-प्रभाव में काम नहीं कर सकता और जनप्रतिनिधियों से भी मदद नहीं मिली और उन्होंने सभी कारोबारियों के हित को देखते हुए यह निर्णय लिया, क्योंकि अभी दिवाली जैसा बड़ा त्योहार सामने है, जो कि सराफा कारोबारियों के लिए वर्ष का सबसे बड़ा अवसर होता है और इस समय पर किसी तरह के विरोध का सामना भी कारोबारी नहीं करना चाहते। दूसरी तरफ कुछ सराफा कारोबारियों ने अग्रिबाण से चर्चा करते हुए दबे स्वरों में कहा कि चार दिन पहले ही नगर निगम ने वीडियो-फोटोग्राफी करवाई और पूर्व में भी दो-तीन मर्तबा सराफा में ओटले तोड़े गए और बेसमेंट सील करने की कार्रवाई भी की गई थी। चूंकि सराफा में भी पुरानी दुकानों को तोडक़र कई कॉम्प्लेक्स बना लिए गए और जायज है कि उनमें भी अवैध निर्माण तो हुआ ही है। ऐसे में ओटलों, बेसमेंट या अवैध निर्माणों को तोडफ़ोड़ से बचाने के लिए भी कारोबारियों को डरकर सराफा चौपाटी कायम रखने की सहमति देना पड़ी। सूत्रों का यह भी कहना है कि इन कारोबारियों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़ के अलावा भाजपा के बड़े पदाधिकारियों, संघ के साथ-साथ मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र उज्जैन में भी सम्पर्क के प्रयास किए, मगर कहीं से भी मदद नहीं मिली तो मजबूरन सराफा कारोबारियों को हथियार डालना पड़े। अन्यथा पहली बार इन कारोबारियों ने चौपाटी हटाने को लेकर सख्त रवैया अपनाया था और आरपार की लड़ाई लडऩे का मन भी बना लिया था। मगर कल दोपहर को महापौर के साथ हुई बैठक में अधिक विरोध कारोबारी नहीं कर पाए और अपनी शर्तों के साथ चौपाटी संचालन पर सहमत हो गए। अब देखना यह है कि महापौर ने जो दावे किए हैं उस पर वे कितना अमल करा पाते हैं और परम्परागत दुकानें ही चौपाटी में रहेंगी, चाइनीज सहित अन्य जंक फूड की दुकानें हटेंगी।

Ramswaroop Mantri

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