शशिकांत गुप्ते
आज किसी ने मुझे व्यंग्यचित्र भेजा। जहन में एक प्रश्न उभर आया, वास्तव में नींबू से भूत, प्रेत चुड़ैल आदि भटकती आत्माओं को वश में किया जा सकता है। बहुत से ओझा,तांत्रिक बाबा तो ऐसे आत्माओं को कांच की बोतल में बंद करने का दावा करतें हैं।
नींबू के साथ मिर्ची को धागे में बांधकर व्यावसायिक जगहों पर टांगने से व्यवसाय में वृद्धि होती है। ऐसी मान्यता है।

इनदिनों नींबू महंगे होने के बाद भी अपने देश के बहुत से लोगो का मनोविज्ञान (psychology)
यह मानता है कि, महंगी चीज अच्छी होती है। जैसे दवाई महंगी हो तो ज्यादा कारगर होगी।
कहावत है महँगा रोए एक बार, सस्ता रोए बार – बार
नींबू महंगे होने से एक बात समझ में आ गई,अब भूत,प्रेत और भटकती आत्माओं का इलाज ज्यादा अच्छे से होगा। यह तो हुई मनोविज्ञान की बात वास्तविकता में सुलझे हुए विचारक इसे अंधश्रद्धा कहतें हैं।
अंधश्रद्धा मतलब Superstition.
अंधश्रद्धा निर्मूलन के लिए सक्रिय लोग कहतें हैं,यदि कोई व्यक्ति या समूह उटपटांग हरतके करता है। जैसे चीखना,चिल्लाना, दूसरों को मारना,वस्तुओं को फैंकना, तोड़ना,मरोड़ना इसे चिकित्साविज्ञान की भाषा में
Hysteria हिस्टीरिया कहा जाता हैं। कोई भूत प्रेत चुड़ैल वगैराह होती ही नहीं है।
चिकित्सविज्ञान के अनुसार हिस्टीरिया के मरीज के लक्षण निम्नानुसार होतें हैं।
शरीर के किसी अंग में ऐंठन, थरथराहट, बोलने की शक्ति का नष्ट होना, निगलने व सांस लेते समय दम घुटना, बहरापन, तेज-तेज चिल्लाना या खूब हंसना जैसे लक्षण जिस किसी में दिखाई देतें हैं, यह सुनिश्चित करतें हैं कि,ऐसा व्यक्ति हिस्टीरिया से ग्रसित है। रोग के लक्षण एकाएक प्रकट या लुप्त हो सकते हैं। लेकिन कभी-कभी लगातार हफ्तों या महीनों तक भी ये बने रह सकते हैं।
अंधश्रद्धा निर्मूलन के लिए सक्रियता से कार्यरत लोग,आमलोगों को समझाते हैं कि अंधश्रद्धा से दूर रहो।
इसीलिए नींबू के महंगे होने से यह नहीं समझना चाहिए कि, अब भूत,प्रेत, चुड़ैल आदि का इलाज नहीं हो पाएगा?
नींबू के महंगे होने से गर्मी में नींबू का शरबत पीने वाले वंचित होंगे।
नींबू का शरबत गर्मी से भी निजात दिलाता है,शरीर की पाँचन शक्ति के लिए भी उपयोगी होता है।
इस कहावत का पुनः स्मरण होता है, महंगा रोएं एक बार,सस्ता रोएं बार बार।
यह कहावत अब की बार,बहुत हुई महंगाई की मार,वगैराह जैसे स्लोगन याद दिलाती है।
इनदिनों सिर्फ नींबू ही महंगे नहीं है। आमजन तो प्रत्येक रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम सुनकर रो रहा है। अबकी बार के चक्कर में महंगा एक बार नहीं बार बार रो रहा है।
यदि वाकई कोई तांत्रिक है,ओझा है, तो कृपया यह महंगाई रूपी डार्लिंग का भूत उतार दे। डार्लिंग इसलिए कि,यही महंगाई आठ वर्ष पूर्व डायन होती थी। तब वह भलेही छोटे रूप में होगी लेकिन थी तो डायन ही। अब विकराल रूप धारण करने के बाद डार्लिंग कहना अच्छा लगता है। कारण अब महंगाई ने लोगों की स्मरणशक्ति भलेही कमजोर करदी है लेकिन सहन शक्ति बढ़ा दी है।
वैसे भूत,बाधा के लिए नींबू की आवश्यकता नहीं है। यह नहीं भूलना चाहिए कि, हमारे पास हनुमान चालीसा है।
भूत पिशाच निकट नहीं आवे
महावीर जब नाम सुनावे
यह लेख पढ़कर मेरे मित्र सीतारामजी ने मुझे सलाह दी कि इस लेख को लोगों तक भेजने के पूर्व एक दो नींबू काट कर चौराहे पर फैंक कर आजावो आपका लेख बहुत लोकप्रिय होगा।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





