भोपाल और इंदौर में किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का पुरजोर विरोध
तीनों कृषि कानून और श्रम संहिता वापस लिए जाने और महंगाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन चस्पा किया
श्रम संगठनों और किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने की भागीदारी
इंदौर। संयुक्त किसान मोर्चा के आपातकाल के 46 वर्ष पूरे होने तथा वर्तमान किसान आंदोलन के 7 माह पूरे होने के अवसर पर ‘खेती बचाओ – लोकतंत्र बचाओ आंदोलन’ आवाहन के तहत इंदौर के कमिश्नर कार्यालय पर शहर के विभिन्न किसान संगठनों और श्रम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रभावी प्रदर्शन कर तीनों किसान कानूनों को वापस लेने ,श्रम संहिता रद्द करने और महंगाई पर रोक लगाने की मांग की।
कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा , किसान खेत मजदूर संगठन , किसान संघर्ष समिति , एटक, इंटक, सीटू, एच एम एस, आदिवासी संगठन, श्रम संगठनों की संयुक्त अभियान समिति, और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े अन्य संगठनों के कार्यकर्ता 12:00 बजे से ही कमिश्नर कार्यालय पर एकत्रित हो गए थे। कमिश्नर कार्यालय पर परीसर में चले 1 घंटे तक के प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने बड़ी देर तक नारेबाजी की ।
प्रदर्शनकारियों की सभा को सर्व श्री श्याम सुंदर यादव ,कैलाश लिंबोदिया, अरुण चौहान, प्रमोद नामदेव, रूद्रपाल यादव, सी एल सेरावत, रामस्वरूप मंत्री, लक्षमीनारायण पाठक सहित कई वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान की सरकार मजदूरों ,किसानों पर लगातार कुठाराघात कर रही है। इस सरकार के चलते किसान और मजदूर सहित हर वर्ग परेशान है और आज संघर्ष के मैदान में हैं, लेकिन सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन करते हुए आंदोलनकारियों से बातचीत करने तक तैयार नहीं है। इसी के चलते आज पूरे देश भर में किसान और श्रम संगठन मिलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ।
राज्यों की राजधानियों में जहां राजभवन का घेराव हो रहा है वही जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन हो रहे हैं इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं नेताओं की गिरफ्तारी करने तक की कोशिश यह सरकार कर रही है। भोपाल में प्रदर्शन के पूर्व जहां नेताओं की गिरफ्तारी हुई है, वहीं इंदौर में भी गांवों से इस प्रदर्शन के लिए आने वाले लोगों को रोका गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया । सभी वक्ताओं ने सरकार की इस शर्मनाक कार्यवाही का घोर विरोध किया ।
सभा और प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने बड़ी देर तक नारेबाजी की और राष्ट्रपति के नाम अधिकारियों को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन कार्यालय में कोई अधिकारी मौजूद नहीं होने पर कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन को संभागायुक्त के दरवाजे पर चिपका दिया । ज्ञापन मैं 3 किसान विरोधी कानून रद्द करने, बिजली संशोधन बिल 2020 वापस लेने तथा सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना दाम पर खरीद की कानूनी गारंटी और श्रम कानूनों की बहाली तथा चारों संहिताओं को रद्द करने की मांग की गई है । ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में मानसून आ गया लेकिन अभी तक तीनों कृषि कानून और संस्थाओं के खिलाफ इंदौर में भी हुआ प्रभावी प्रदर्शन को खाद, बीज पर्याप्त मात्रा में सोसायटियों से नहीं मिला है। जिसके चलते किसानों को बाजार से उच्च दामों पर तथा निम्न गुणवत्ता का खाद बीज लेना पड़ रहा है।विगत वर्ष फसल खराब होने के बावजूद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला ना ही सरकार द्वारा मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार एमएसपी वृद्धि का ढिंढोरा पिट रही है लेकिन फसलों की जो एमएसपी तय की गई है उस पर भी मंडियों में खरीद नही होने से किसानों को काफी नुकसान सहना पड़ रहा है। लॉकडाउन में मंडियां बंद होने पर व्यापारियों को अनाज बेचना पड़ा। रायसेन ,इंदौर,धामनोद, सांची, खरगोन के किसानों से करोड़ों रूपये की उपज लेकर व्यापारी फरार हो गए है। 4 जून से ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद शुरू करने को लेकर मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल की घोषणा के बावजूद अभी तक खरीदी शुरू नहीं हुई है।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से श्यामसुन्दर यादव, रामस्वरूप मंत्री, अरुण चौहान, प्रमोद नामदेव, जयप्रकाश गुगरी, कैलाश लिंबोदिया, पूर्व पार्षद सोहनलाल शिंदे, भगतसिंह यादव, अरविंद पोरवाल,हरिओम सूर्यवंशी, भागीरथ कछवाय, कामरेड मारोतकर, लक्ष्मी नारायण पाठक, माता प्रसाद मौर्य धीरज अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शरीक थे।




