अग्नि आलोक
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*अन-नेचुरल सेक्स : बचिए ज़हर के कहर से !*

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          ~ डॉ. प्रिया 

     ऑर्गस्मिक सेक्स सुख से महरूम रहने पर मनोविकारग्रस्तता के चलते तन से भी रुग्ण बनी आम स्त्रियां ठंडी पड़कर मुर्देपन से राजी हो जाती हैं। लेकिन जिंदादिल, गैर-समझौतावादी कोई -भी हॉट फ़ीमेल हालात के आगे सरेंडर नहीं करती। ऐसी स्त्री डिस्चार्ज होकर बेसुध होने वाले दिव्य यौन-आनंद के लिए 60 से 90 मिनट का प्रेमपूर्ण- हॉटेस्ट सेक्स चाहती है और मर्द? लगभग  95% मर्द  5 से 10 मिनट में ही नामर्द सावित हो जाते हैं।

 इसलिए~

 सेक्सटॉय संबन्धी प्रोडक्ट्स का बाज़ार बेतहासा बढ़ रहा है। ये योनि की सेंसटिविटी डैमेज कर देते हैं, फिर स्त्री कभी- भी, कैसे- भी तृप्त नहीं हो पाती। पुरूष की नामर्दी के कारण कुत्ते जैसे जानवर पाले जा रहे हैं। सक्षम लोग ‘पुरुष वेश्या’ बन रहे हैं, जिन्हें अच्छीखासी रकम देकर धनी औरत 2- 4 घण्टे के लिए खरीदती है।

 लेकिन~

 ये उपाय ‘प्रेमी’ मर्द के स्पर्श, उसकी आग, उसकी सिहरन और उसके प्रेम का अनुभव कैसे देंगे? ये रोग ऊपर से पैदा कर रहे हैं।

    “सफल संभोग” का सुख कुदरत का दिव्य वरदान है। इससे स्त्री आनंद के उस लोक में पहुंचती जहाँ जन्नत भी फीकी पड़ जाए। इसलिए उसे ‘अतृप्त’ ही मर जाने की सलाह भी नहीं दी जा सकती।

 

Ramswaroop Mantri

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