विजया पाठक, एडिटर जगत विजन*
भारतीय जनता पार्टी के मंत्री से लेकर कार्यकर्ता सभी 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर एक्टिव हो गए है। यही वजह है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जनता के बीच मेल मिलाप का दौर शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में श्रीमंत और केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले दिनों भाजपा की जन आर्शीवाद यात्रा में शामिल होने इंदौर पहुंचे। लोगों से बदत्तमीजी करने और उन्हें नीचा दिखाने के लिए हमेशा चर्चा में रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र और विधायक आकाश विजयवर्गीय से भी बदत्तमीजी कर दी और उन्हें बाहर जाने को कह दिया।
दरअसल सिंधिया इंदौर में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे, इस दौरान आकाश विजयवर्गीय कुछ जरूरी विषय पर नगर अध्यक्ष गौरव रणदीपे से बात कर रहे थे, तभी सिंधिया ने उन्हें बातचीत करने से मना कर दिया और उन्हें बाहर जाने को कह दिया। सिंधिया ने सीधेतौर पर पत्रकारों के सामने आकाश विजयवर्गीय को नीचा दिखाने की कोशिश की। जबकि देखा जाए तो आकाश विजवर्गीय इंदौर की आवाम के जनप्रिय नेता है और हर मुश्किल की घड़ी में वे जनता के साथ खड़े रहते है। लगभग डेढ़ साल पहले कांग्रेस से भाजपा में सिंधिया को बिल्कुल भी शिष्टाचार नहीं आता है। खुद को वो भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश का मुख्यमंत्री समझते है।
उन्हें बिल्कुल भी इस बात की तमीज नहीं कि जिस व्यक्ति ने पिछले 30 सालों से भी अधिक समय से भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में मजबूती प्रदान करते हुए अपनी पूरी जिंदगी खपा दी, उस व्यक्ति के बेटे से किस तरह से बात करना चाहिए। आम जनता के सामने किस तरह से किसी दूसरे पार्टी के कार्यकर्ता से पेश आना चाहिए। इससे पहले भी सिंधिया भोपाल हो या फिर ग्वालियर में चुनाव रैली के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ बेहुदा व्यवहार कर चुके है। इस पूरे मसले पर भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और मंत्रियों को संज्ञान लेना चाहिए और सिंधिया को एक बात खुले तौर पर समझा देना चाहिए कि दोबारा इस तरह से किसी भाजपा के कार्यकर्ता के साथ व्यवहार न करें, क्योंकि इससे कहीं न कहीं पार्टी की छवि धूमिल होती है। पार्टी द्वारा सिखाए गए शिष्टाचार का अनादर होता है।
राजनीतिक लोग विजयवर्गीय और सिंधिया के बीच हुई इस खिचाव को राजनीति से जोड़कर देख रहे है। हालांकि बाद में अपनी गलती पर पर्दा डालने की कोशिश सिंधिया ने की और कहा कि कैलाश विजयवर्गीय से हमारे कई वर्षों पुराने संबंध हैं। जब क्रिकेट संघ में चुनाव होते थे तो आमने सामने जरूर लड़ते थे, लेकिन उसके विपरीत हमारे संबंध हमेंशा से ही मधुर रहे हैं। हाल ही में जब में इंदौर आया तो वो एयरपोर्ट पर आए और उन्होंने पुष्पगुच्छ दिया। कैलाश विजयवर्गीय के साथ मिलकर इंदौर का विकास करेंगे। उनके बेटे मेरे हर कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं।





