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कुर्सी के लिए नौटंकीबाज सिंधिया का घमंड हुआ चूर

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अपनी छवि बदलने सफाईकर्मी के छुए पैर*
मध्‍यप्रदेश में सीएम की कुर्सी पर सिंधिया की नजर
क्रिकेट के मैदान से महाआर्यमान की राजनीति में हुई एंट्री
क्या अपने लिए मुख्यमंत्री पद या अपने बेटे के लिए उप मुख्यमंत्री पद की संभावना तलाश रहे हैं सिंधिया
विजया पाठक,
एडिटर जगत विजन
हमेशा अपने घमंड में मशगूल रहने वाले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो कभी किसी के सामने खुद को झुकने में भी छोटा समझते थे। आज स्थिति ऐसी परिवर्तित हुई कि उन्हें सियासत के लिए सफाई कर्मचारियों के सामने झुकना पड़ा। साथ ही सिंधिया को उनके पैर तक धुलाने पड़े। सिंधिया के अंदर अचानक आए इस परिवर्तन ने एक बार फिर सियासी हलचले बढ़ा दी हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सिंधिया का यह कदम निश्चित ही प्रदेश के मुखिया की गद्दी की ओर बढ़ने का इशारा भी हो सकता है। देखा जाए तो सफाई कर्मियों के साथ बैठना, उनके पैर पड़ना, पैर धुलाना जैसे कार्य पिछले दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस में किया, उसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने और अब यही कारनामा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दोहराया है। हम कह सकते हैं कि अब सिंधिया की नजर मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर नजर है। पार्टी हाईकमान को दिखाना चाहते हैं कि वह अब बीजेपी के रंग और ढंग में ढल चुके हैं। सिंधिया के बर्ताव में आए परिवर्तन ने शिवराज को भी सकते में डाल दिया है। क्‍योंकि जिस तरह उन्‍होंने अपने बेटे महाआर्यन को लांच किया है और पीएम मोदी के साथ तस्‍वीर खिंचवाई है कहीं न कहीं सिंधिया मोदी की नजर में खास बनना चाहते हैं। यहीं कारण है कि पिछले कई दिनों से वह अपनी छवि को बदल रहे हैं। छवि को बदलने की चाहत भले ही उनकी बनावटी रही हो लेकिन वह इस बात को तो समझ गए हैं कि अपने मंसूबे कामयाब करने हैं तो खुद को नौटंकीबाज तो बनना होगा।
सिंधिया के इस झुकाव के क्या मायने
ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा महिला सफाई कर्मियों के पैर छूने का मामले का दूसरा पक्ष देखें तो सिंधिया प्रदेश में अपनी छवि बदलने का प्रय़ास कर रहे हैं। उन्हें इस बात का एहसास हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए उन्हें महाराज का कद छोड़ना होगा। यही वजह है कि सिंधिया ने एक बार फिर महिला सफाईकर्मी के पैर छुए हैं। इतना ही नहीं सिंधिया मंच से उतरकर नीचे बैठी एक सफाईकर्मी के पास पहुंचे। उसका हाथ पकड़कर मंच पर ले आए और कार्यक्रम का शुभारंभ करने के लिए दीप प्रज्वलित करवाया। इसके बाद सिंधिया ने महिला सफाईकर्मी को मंच पर अपने बगल में कुर्सी पर बैठाया। इससे खुश महिला सफाईकर्मी ने कहा कि वह सिंधिया को मध्यप्रदेश का सीएम बनते देखना चाहती है।
झुकना तो दूर, बात करना उचित नहीं समझते थे सिंधिया
कुछ वर्षों पहले तक ज्योतिरादित्य सिंधिया के बर्ताव पर नजर डाले तो यह वही सिंधिया हैं जो हमेशा घमंड में डूबे रहते थे। कांग्रेस में रहते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी किसी छोटे आदमी के सामने झुकना तो दूर उन्होंने उससे सही ढंग से बात तक नहीं की। कांग्रेस पार्टी के नेताओं के अनुसार सिंधिया जब भी भोपाल किसी भी रैली के लिए आते तो उनका साफ निर्देश होता कि वो ऐसी किसी जगह में नहीं जाएंगे जहां गरीबी हो या फिर गरीब लोग रहते हों। तभी से सिंधिया ने पूरे प्रदेश में हर तरफ लूट-खसौट और भ्रष्टाचार फैला रखा था। लेकिन बीजेपी ने उनके इस पूरे गुरूर को तोड़कर रख दिया है और उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वो एक सामान्य जनप्रतिनिधि हैं, जिन्हें जनता ने चुना है।
पार्टी से गददारी से पुराना नाता
यह वही सिंधिया हैं जिन्‍होंने एक चुनी हुई सरकार को अपने स्‍वार्थ के लिए गिरा दिया था। अब क्‍या बीजेपी उनकी इस गददारी को भूल सकती है। भविष्‍य में यदि सिंधिया को मध्‍यप्रदेश की कमान मिलने की बात आती है तो क्‍या बीजेपी ऐसे व्‍यक्ति पर विश्‍वास कर सकती है। विचार करने वाली बात है। बीजेपी को उनकी आदत को जरूर समझना होगा। आज भले ही सियासत को चमकाने के लिए वह ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हों लेकिन कहीं न कहीं सिंधिया की जो छबि बनी हुई है उससे बीजेपी को सावधान रहने की आवश्‍यकता है।
बेटे को किया लांच, राजनीति से जोड़ने की साजिश
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक दिन पहले ही अपने बेटे महाआर्यमान को पहली बार सामाजिक क्षेत्र में लांच किया है। सिंधिया के बेटे महाआर्यमान को ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिशएन का उपाध्यक्ष बनाया है। बेटे की इस नियुक्ति के साथ ही सिंधिया ने इस बात का संदेश भी दे दिया है कि आने वाले समय में अब उनका बेटा ही ग्वालियर में उनकी राजनीति की कमान को संभालेगा। महाआर्यमान की इस पद नियुक्ति के साथ ही उनकी सियासी गलियारे में आने के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। बात यह है की किस हैसियत से महाआर्यमन सिंधिया को यह पद दिया गया। अभी अभी विदेश से पढ़कर आए महाआर्यमान ना तो कोई क्रिकेटर है ना ही इन्होंने कोई प्रबंधन पद पर नौकरी या व्यापार किया है। बाकी नेता पुत्र जो की युवा मोर्चा से संघर्ष कर राजनीति में लॉन्च होते है। पर यहां तो महाराज से बड़े महाराज इनके पुत्र बिना कुछ साबित करे क्रिकेट की राजनीति में आ गए और भाजपा के कार्यकर्ता के लिए रेडीमेड महाराज पुत्र महाआर्यमान उनके नेता भी बन गए। इन सबको देखते हुए लगता है की मध्य प्रदेश में राजशाही और परिवारवाद वाली राजनीति कभी खत्म नहीं होने वाली है, जो की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एंटी परिवारवाद वाले नरेशन के खिलाफ जाती है।

Ramswaroop Mantri

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