रीवा . ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय ओंकार नाथ खरे की धर्मपत्नी श्रीमती उमा खरे की प्रथम पुण्यतिथि के पावन स्मृति के अवसर पर नेहरू नगर वार्ड नंबर 13 मे एक विचार संगोष्ठी के माध्यम से उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे . संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी श्री रामाधार पटेल ने श्रीमती उमा खरे को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की धर्मपत्नी और लोकतंत्र सेनानी की मां के रूप में एक आदर्श नारी के रूप में याद किया
. उन्होंने कहा कि वह एक संस्कारित परिवार की शिक्षित एवं विलक्षण बुद्धि वाली महिला थीं , जिन्होंने विषम परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए अपने पारिवारिक दायित्वों को बखूबी निभाया . सन 1975 में देशव्यापी आपातकाल के दिनों में बड़े बेटे अजय खरे के मीसा राजनीतिक बंदी के रूप में जेल में 18 महीने के रहने के बावजूद उन्होंने अपने पति चार बेटियों और छोटे बेटे की पारिवारिक व्यवस्था को बड़ी जिम्मेदारी के साथ पूरा करने में जरा भी विचलित नहीं हुई . समाजसेवी नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीमती उमा खरे अत्यंत धैर्यवान सुलझी हुई विषम से विषम परिस्थितियों में संघर्ष का सामना करने वाली महान महिला थीं . जब कभी उनसे मिले उनका स्नेह और आशीर्वाद हमें मिलता रहा है . यह भारी विडंबना का विषय है कि देश की आजादी के लिए त्याग करने वाले परिवारों की स्मृति में प्रशासन के पास दो फूल भी नहीं हैं . कार्यक्रम का संचालन कर रहीं नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री मीरा पटेल ने कहा कि श्रीमती खरे एक आदर्श पत्नी मां बेटी सास होने के साथ-साथ देश और समाज के लिए चिंतनशील रहती थीं . श्रीमती नजमुन्निसा ने कहा कि श्रीमती खरे काफी सुलझी हुई मानवीय मूल्यों की एक मिसाल थींं . वह अच्छी लेखिका एवं वक्ता भी थीं . उनकी रचनाएं सरल सलिल मुक्ता सरिता के अलावा कई समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुईं .
आकाशवाणी केंद्र से कई बार उनकी वार्ता प्रसारित की गई . श्रीमती खरे के जेष्ठ पुत्र लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि आपातकाल में मीसाबंदी होने के दौरान जब मां जेल में मुलाकात में आती थीं तो उन्होंने कभी हतोत्साहित नहीं किया .वह जीवन के अंतिम पड़ाव तक निरंतर अध्ययनशील रहीं . सन 1933 में जन्मी मां ने बाल्यावस्था में आजादी के आंदोलन का दौर भी देखा था . हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण करने के बाद लंबे समय तक गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों का निर्वाह किया . युवा नेता परिवर्तन पटेल ने कहा कि उनसे मिलना मेरे लिए बहुत प्रेरक रहा . उन्होंने मुझसे कहा था कि कोई भी काम करो , उसको सही तरीके से सही समय पर करना चाहिए . विषम से विषम परिस्थितियों का सामना करने धीरज होना चाहिए . कपिल शर्मा ने कहा कि उनसे जितने बार भी मिला , हर बार कुछ न कुछ सीखने का मौका मिला .
छात्रा खुशी मिश्रा ने कहा कि श्रीमती उमा खरे से मुझे दादी की तरह स्नेह मिला है . वह हर विषय में जानकारी रखती थी . हिंदी अंग्रेजी गणित भूगोल इतिहास समाजशास्त्र विज्ञान दर्शनशास्त्र धार्मिक ग्रंथों एवं पौराणिक कथाओं के संबंध में उनके पास ज्ञान का भंडार था . वह हमेशा अध्ययनरत रहती थीं . हमें भी पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं . यह भारी विडंबना है कि आज शासन प्रशासन में बैठे हुए लोग इतने अधिक निष्ठुर हैं कि मृत्यु की खबर मिलने के बाद भी उनके पास स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवारों के लिए संवेदना के दो शब्द भी नहीं हैं . खुशी मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के कारण ही देश आजाद हुआ . इसी वजह से यहां के लोगों को शासन प्रशासन के उच्च पदों पर बैठने का मौका मिला , नहीं तो गुलामी के दिनों में अंग्रेजों की बूट पॉलिश करके गुजर बसर करनी पड़ती थी . जिस देश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों इतिहास को अनदेखा किया जाता है , वहां बुरे दिन की शुरुआत हो जाती है . कार्यक्रम में शारदा श्रीवास्तव एवं इरशाद की उपस्थिति उल्लेखनीय रही .





