चूरू नगर परिषद के पूर्व सभापति और वरिष्ठ समाजवादी नेता माधव शर्मा का गुरुवार रात्रि निधन हो गया। वे 85 साल के थे। माधव शर्मा ने डॉक्टर लोहिया, चंद्रशेखर, राजनारायण, जॉर्ज फर्नांडिस, सुरेंद्र मोहन, मुरलीधर व्यास, प्रो केदार और माणिक सुराणा जैसी शख्सियत के साथ बैठ कर राजनीति सीखी। वे हमेशा सामाजिक न्याय की खातिर संघर्ष करते रहे। उन्होंने कुशल सिंह और प्रदीप शर्मा के साथ मिलकर 1948 में चूरू में सोशलिस्ट पार्टी की नींव रखी थी।
शर्मा सच्चे समाजवादी थे और हमेशा समाज के दबे, कुचले और वंचित वर्गों के भले के लिए काम किया। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हनुमान कोठरी ने बताया माधव जी ने जीवन पर्यन्त आम आदमी के लिए संघर्ष किया था। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक और वरिष्ठ पत्रकार बाल मुकुंद ओझा ने बताया कीआज़ादी के बाद के पत्रकारों में माधव शर्मा सुविख्यात नाम है। उन्होंने 1956 में देहरादून से साप्ताहिक लोक परिवर्तन अख़बार के संपादन के साथ सक्रीय पत्रकारिता में प्रवेश किया। माधव शर्मा 1958 में दैनिक वीर अर्जुन से जुड़े। समाचार भारती और ए एन एफ के वर्षों संवाददाता रहे। उनका एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ।
माधव शर्मा 1969 – 72 में चूरू नगर परिषद के सदस्य भी रहे। इस दौरान एक बार नगर परिषद के सभापति भी चुने गए। वे तांगा यूनियन और रेलवे सहित अनेक मज़दूर संगठनों के अध्यक्ष रहे है। समाजवादी आंदोलन में सक्रीय भागीदारी के कारण अनेक बार जेल यंत्रणा के शिकार हुए। आपातकाल के दौरान मीसा में भी बंद रहे। 1978 में राज्य सरकार ने शर्मा को चूरू ऊन मिल का अध्यक्ष नियुक्त किया था। 1977 में सरकार ने उन्हें डीपीआर की राज्य वर्गीकरण सलाहकार समिति का सदस्य मनोनीत किया था। 1977 से अब तक डीपीआर से अधिस्वीकृत पत्रकार रहे और आम आदमी की पीड़ा को दूर करने के लिए हमेशा संघर्षरत रहे।





