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*तिलहन फसल योजना में गंभीर अनियमितताएँ उजागर*

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*घटिया मूंगफली बीज और जबरन दवाइयों से किसान बर्बादी की कगार पर*

भारतीय किसान एवं मजदूर सेना (अ) के प्रदेश अध्यक्ष श्री बबलू जाधव ने इंदौर जिले सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित तिलहन फसल योजना में गंभीर अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के कल्याण के लिए बनाई गई थी, किंतु जमीनी स्तर पर यह किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बनती जा रही है।

श्री जाधव ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय बीज निगम के नाम से किसानों को 20 किलोग्राम के मूंगफली बीज पैकेट ₹5800/- की अत्यधिक कीमत पर वितरित किए गए, परंतु वास्तविकता यह है कि बड़ी संख्या में किसानों के खेतों में यह बीज अंकुरित ही नहीं हुआ। जैसे बड़वानी जिले में किसानों को बीज, खेत तैयारी, श्रम और समय—हर स्तर पर भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि यह किसानों की मेहनत, भरोसे और सरकारी योजनाओं के साथ खुला अन्याय है। सवाल यह उठता है कि यदि बीज अमानक और गुणवत्ता-हीन था, तो उसकी आपूर्ति किसके संरक्षण में और किसकी जवाबदेही में की गई?

*श्री जाधव ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय किसान एवं मजदूर सेना द्वारा दो दिन पूर्व ही इस घटिया बीज की गुणवत्ता को लेकर विभाग को अवगत करा दिया गया था, जिसके बाद उप संचालक कृषि श्री चंपालाल केवड़ा जी ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित बीज की आपूर्ति पर तत्काल रोक लगाई तथा किसानों को दिए गए बिज वापस लेने की बात कही। संगठन इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत करता है, परंतु साथ ही यह भी अपेक्षा करता है कि जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।*

इसके अतिरिक्त, डी.बी.डी. (Direct Benefit Transfer) योजना के अंतर्गत जहाँ किसानों को अपनी पसंद की कृषि दवा एवं कीटनाशक खरीदने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, वहीं कई स्थानों से विभागीय अमले द्वारा किसानों पर जबरन दवाइयाँ थोपे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यह न केवल योजना की मूल भावना के विपरीत है, बल्कि इसमें ठेकेदारी, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की आशंका को भी बल मिलता है।

*श्री जाधव ने कहा कि एक ओर सरकार बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर लगाकर “किसान कल्याण वर्ष” मनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों को घटिया, अमानक और नुकसान पहुँचाने वाला बीज दिया जा रहा है। यह सरकार के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच गहरे अंतर को दर्शाता है।*

भारतीय किसान एवं मजदूर सेना (अ) सरकार से निम्न मांगें करती है—

राष्ट्रीय बीज निगम के माध्यम से वितरित मूंगफली बीज की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराई जाए।

घटिया एवं अमानक बीज वितरण में शामिल दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संबंधित एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

डी.बी.डी. योजना में किसानों को दवा चयन की पूर्ण स्वतंत्रता दी जाए तथा जबरन दवा थोपने की प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाए।

श्री बबलू जाधव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही इस मामले में ठोस, पारदर्शी और किसान-हितैषी कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन किसानों के अधिकारों की रक्षा हेतु आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

उन्होंने अंत में कहा कि यह मामला केवल बीज का नहीं है, बल्कि किसानों की आजीविका, विश्वास और सरकारी योजनाओं की साख से जुड़ा हुआ है।

Ramswaroop Mantri

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