मीना राजपूत
*समंथा (समंथा रुथ प्रभु)* जानी मानी दक्षिण अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, साथ ही नागार्जुन की पुत्रवधू और नागा चैतन्य की पत्नी) ने एक फोटोशूट करवाया था और उसी समय जब उनसे पूछा गया कि वो सेक्स और फूड में से किसे चुनेंगी तो उन्होंने कहा : *भोजन से ज्यादा ज़रूरी है सेक्स.* मै सेक्स को चुनना पसंद करूँगी। मीडिया कहती है ये काफी बोल्ड बयान था।
*प्रियंका चोपड़ा* ने कहा कि एक रिश्ते में मर्द की अहमियत केवल बच्चे का गर्भाधान करने तक ही है, इसके आगे मर्द की कोई औकात नहीं। मीडिया कहती है कि ये भी एक बोल्ड बयान था।
*सोनम कपूर* का कहना है कि वो कैज़ुअल सेक्स में विश्वास नहीं रखतीं और मीडिया इसे भी एक बोल्ड बयान ही मानती है।
*नरगिस फखरी* का कहना है कि रिलेशनशिप (शायद रखैल परम्परा) में सेक्स बहुत ज़रूरी है और यदि रिलेशनशिप में इसकी कमी है तो पार्टनर बदल लेना चाहिए। यह बयान भी मीडिया को बोल्ड ही लगता है।
*कंगना राणावत* कहती है कि सेक्स के समय पार्टनर के वीर्य के दाग अपनी पेंटी में रख लें ताकि किसी कानूनी कार्रवाई के समय पक्के सबूत के तौर पर काम दें। यह बयान भी परम बोल्ड है।
अल्लाउद्दीन खिलजी के मानस पुत्र *रणवीर खिलजी* (सिंह नहीं लगाऊंगी क्योंकि रणवीर बीच में ट्विटर पर लिख रहे थे कि उन्हें अपना धर्म खोता दिख रहा है) ने कहा था कि वे अपने साथ हमेशा पर्स में कंडोम रखते हैं (जबकि वे अविवाहित हैं)। इस बयान की बोल्डता उसी सातवें आसमान पर थी जिस के ठीक ऊपर ताला वाले अल्लाह का तख्त है।
*अर्जुन कपूर* कहते हैं कि प्यार से ज्यादा सेक्स ज़रूरी है। ये बयान काफी बोल्ड एवं क्रांतिकारी माना गया।
*आलिया भट्ट* ने बयान दिया था कि The Classic Missionary ,उनकी पसंदीदा सेक्स पोजीशन है।
*इमरान हाशमी* कहते हैं कि विवाह के बाद वे One Night Stand को काफी मिस करते हैं। ये बयान भी मीडिया ने काफी बोल्ड बताए।
_पहले तो मुझे समझ में ही नहीं आया कि आखिर ये बोल्ड है क्या चीज़। गूगल बाबा ने बताया कि बोल्ड का अर्थ है दबंग, हिम्मती, निर्भीक, बहादुर, जाबांज, वीर आदि आदि।_
लेकिन शायद सर्वज्ञ गूगल को ये नहीं पता था कि बोल्ड के कई और अर्थ होते हैं, और वो है बेशर्म, वो है पाशविक, वो है पिछड़ा, वो है मूर्खता, वो है विवेकहीनता, वो है नीचता, वो है नग्नता।
_क्योंकि गूगल ने जो अर्थ बताए वो सभी अर्थ महारानी लक्ष्मीबाई में भी थे, महारानी पद्मिनी में भी थे, महारानी अहिल्याबाई में भी थे, महारानी दुर्गावती में भी थे। लेकिन उन्हें कभी किसी ने बोल्ड नहीं कहा। कहा नहीं.. या कहने नहीं दिया ?_
*नागार्जुन* इस बात से बहुत खुश होंगे कि उनकी नई नवेली पुत्रवधू सेक्स में भोजन से अधिक रुचि रखती है और इससे सिद्ध होता है कि सर्ज़िकल स्ट्राइक युद्धस्तर पर होगा, आखिर बेटा पतोहू का मधुचंद्र पर्व पचास दिनों तक चला था।
_प्रियंका चोपड़ा के उलट यदि हम ऐसा ही बयान दे दें तो हमें महिलावादी धूर्त घेर कर पीटने की योजना बना लेंगे। हम कहें कि महिला की आवश्यकता केवल बच्चे पैदा करने के लिए है, इसके आगे उसकी कोई औकात नहीं, तो क्या क्या हंगामे होंगे, आप समझ सकते हैं।_
ज़ाहिर है हमपर वे धाराएं भी लगा दी जाएंगी जो ब्रह्मांड के किसी कानून में नहीं।
जिस तरह का सेक्स संचार सेलेब्रेटीज और मिडिया द्वारा हो रहा है, उसे देखकर सहज़ सवाल उठता है की किस तरह की संस्कृति निर्मित की जा रही है? क्या आने वाले समय में सरेआम/चौराहे पर होगा संभोग?
नरगिस फखरी के अनुसार तो जो जम के कार्रवाई करे, उसके साथ रहो, बाद में बिस्तर और हमबिस्तर दोनों बदल लो। कंगना के अनुसार जब तक मज़े हैं, मज़े लो, जब कोई ज्यादा मज़ा देने वाला मिल जाये तो पहले वाले को भी मज़ा चखा दो।
_और इसकी तैयारी उसी समय कर लो जब पहले वाला युद्धस्तर पर मज़ा दे रहा हो, काहे कि कौन जाए कल को कोई उससे सभी बड़े दिल (?) वाला मिल जाये …!_
रणवीर खिलजी के अनुसार वे इसी फिराक में रहते हैं, कि जीना है तो ठोक डाल…अर्जुन कपूर केवल स्त्री को वासनापूर्ति का माध्यम समझते हैं। प्यार न करो, केवल इस्तेमाल करो। यही बात हम कहें तो वो बोल्ड नहीं, विवादित बयान माना जायेगा।
आलिया भट्ट को पैदा लेकर खड़े होने की उम्र अभी सही से आई नहीं है, भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति जैसे पहली कक्षा के स्तर का भी ज्ञान नहीं है लेकिन इस धूर्त को ये पता है कि शारीरिक एनकाउंटर कैसे करते हैं.
यहाँ तक कि तमाम स्थितियों पर रिसर्च और प्रैक्टिकल करने के बाद इसने अपनी पसन्दीदा सम्भोग मुद्रा भी बता दी। इमरान हाशमी अपनी अय्यासी और वेश्याखोरी का परिचय अपने बयान से ही दे चुके हैं।
ये सब बयान वास्तव में घोर रूप से विवादित हैं, अभद्रता, अमर्यादा और अश्लीलता को प्रायोजित रूप से बढ़ाने वाले हैं लेकिन मीडिया वाले इन्हें बोल्ड बयान कहते हैं, बहादुर और निर्भीक बयान कहते हैं।
_वहीं कोई धर्मगुरु, नेता या सम्मानित व्यक्ति समाज की स्वच्छता और संस्कृति की रक्षा के लिए कुछ सारगर्भित एवं हितकारी बयान दे तो उसे ये तुरन्त विवादित घोषित कर देंगे, जबकि उस बयान पर विवाद उठता ही तब है जब उसे विवादित बताया जाता है।_
मतलब विवादित घोषित होता पहले है, विवाद उठता बाद में है। औए जो वास्तव में विवादित हैं उन्हें बोल्ड कहा जाता है, यानी दबंग, निर्भीक, वीरतापूर्ण बताया जाता है।
_नंगे नाचने और जगह जगह बोरिंग करवाने को वीरता नहीं रंडीबाजी कहते हैं ! क्या समझे ! हाँ, बिल्कुल यही कहते हैं।_
जो अभिनय तथा बयान वास्तव में वीरता और ओजस्विता से भरे थे, उन्हें आज तक बोल्ड नहीं बताया गया, अपितु जो जितने अधिक उत्तेजक और अश्लील हों उन्हें उतना ही बोल्ड कह देते हैं जिससे वीरता का पर्याय अश्लीलता हो गयी हो।
{चेतना विकास मिशन)





