घरेलु हिंसा में गंभीर रूप से पिटने वाली पत्नी ,लड़की या महिला को मध्यप्रदेश सरकार देगी लाखो रूपये !\
प्रदीप मिश्रा
री डिस्कवर इण्डिया न्यूज़ इंदौर
अब हरामी पुरुष और परिवार इसलिए पीटेंगे की सरकार लाखो रूपये देगी!?*
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री मंडल की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि घरेलू हिंसा की पीड़िता के लिए सहायता योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। घरेलू हिंसा में 40% तक शारीरिक क्षति होने पर 2 लाख एवं दिव्यांगता पर 4 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। पीड़िता के इलाज का पूरा खर्चा, न्यायालय में प्रकरण होने पर आवागमन की व्यवस्था भी की जाएगी।
*सदियों से इस देश में लडकियों खासकर पत्नियों के साथ इस देश में घरेलु हिंसा न सिर्फ पति द्वारा वरन परिवार की महिलाओ सास ,ननद ,जेठ ,देवर और यहाँ तक ससुर के द्वारा भी शर्मनाक और निहायत ही घटिया मानसिकता के तहत की जा रही है !?*
*महिलाओ ,लडकियों खासकर पत्नियों के साथ घरेलु हिंसा इस देश के उन पुरुषो और परिवारों को जो ऐसे अमानुषिक और पिसाचीय अपराधिक घटना को अंजाम देते है उन्हें और उनके परिवारों को ऐसा दंड कानूनी रूप से मिलना चाहिए की उनकी रूह काँप उठे !और इस तरह की घरेलु हिंसा करने की सोंच भी समाज और प्रदेश में कोई पुरुष और परिवार न उठा सके !**वही प्रदेश की सरकार सख्त से सख्त कानून न लाकर पिटने पर मुवावजा सहायता राशि देने के निर्णय पास कर रही है !? इससे ज्यादा शर्मनाक और अमानुषिक निर्णय क्या हो सकता है !सरकार की शर्मनाक संवेंदंशीलता है यह !?*
लड़की ,पत्नी या परिवार की किसी महिला को पति या परिवार के किसी अन्य सदस्य के द्वारा मार पीट करने पर पीड़ित लड़की ,पत्नी या परिवार की किसी महिला को मध्य प्रदेश सरकार 2 लाख से लेकर 4 लाख रूपये तक मुवावजा राशि सहायता के रूप में देगी !? राज्य सरकार के प्रवक्ता ग्रह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की घरेलू हिंसा की पीड़िता को सहायता देने संबंधी योजना को मंजूरी दी गई है।
*वही दूसरी तरफ कानून का शर्मनाक पहलु यह है की 90 फीसदी मामलो में किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी या परिवार की किसी महिला को पीटने और जलील करने पर पुलिस भादवि की धारा 294,323,506 के तहत प्रकरण दर्ज करती है !पीटने वाला पुरुष थाने से ही छोड़ दिया जाता है !? और न्यायालय में कभी भी अपराधी पुरुष को सजा नहीं होती है !? गंभीर मामलो में भी भारतीय नारी कभी भी पारिवारिक पुरुष के खिलाफ न्यायालय में गवाही नहीं देती है !*





