उपभोक्ताओं को सब्सिडी न देने के गलत मीटर रीडिंग के गंदे खेल से बाज आए सरकार : अजय खरे
रीवा 5 सितंबर । मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के पर्याप्त विद्युत भंडारण के दावे पूरी तरह खोखले नजर आ रहे हैं । प्रदेश भर में अघोषित बिजली कटौती अभी भी जारी है और ग्रामीण क्षेत्रों में यह संकट काफी अधिक है । शिवराज सरकार के द्वारा दूसरे राज्यों को पर्याप्त मात्रा में सस्ते में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है , वहीं पिछली कमलनाथ सरकार के समय से दी जा रही सब्सिडी में मध्यप्रदेश की वर्तमान शिवराज सरकार के द्वारा बड़ी चतुराई से कटौती करके आम बिजली उपभोक्ताओं के साथ ठगी की जा रही है । अभी पिछली कमलनाथ सरकार के समय से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 100 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर अधिकतम ₹100 बिजली का बिल आ रहा है । वहीं 101 से 150 यूनिट तक खर्च हो जाने पर 0 – 100 यूनिट तक के बिजली बिल में किसी तरह का बदलाव न करके आगे की 50 यूनिट का खर्च अलग से जोड़कर बिल बनाया जाता है ।
पिछली व्यवस्था के अनुसार प्रतिमाह 150 यूनिट से अधिक की बिजली खपत होने की स्थिति में उपभोक्ता को सब्सिडी का लाभ नहीं दिया जाता है लेकिन इधर शिवराज सरकार के द्वारा बदली जाने वाली व्यवस्था के चलते 100 यूनिट से एक भी यूनिट अधिक बिजली खपत हो जाने पर सब्सिडी पूरी तरह समाप्त करके 101 यूनिट खपत दर्ज करके ₹8 40 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से बिल बसूले जाएंगे जिसके चलते बिजली उपभोक्ता को ₹100 की जगह प्रतिमाह ₹1000 के आसपास बिल का भुगतान करना होगा । वैसे भी बिजली विभाग के द्वारा मनमाने तरीके से बिजली रीडिंग लेकर उपभोक्ताओं के साथ ठगी की जा रही है । एक महीने में काफी कम मीटर रीडिंग लेकर अगले महीने अधिक मीटर रीडिंग लेकर मनमानी वसूली की जा रही है । इसका उदाहरण यह है कि किसी बिजली उपभोक्ता की औसत 90 यूनिट प्रतिमाह खपत है लेकिन बिजली विभाग के द्वारा किसी माह केवल 10 यूनिट बिजली खपत दिखाकर ₹100 वसूले जाएंगे और वही दूसरे महीने 170 यूनिट बिजली की खपत दिखाकर करीब ₹2000 का बिल थमा दिया जाएगा । 100 यूनिट तक बिजली खर्च होने पर महज ₹100 ही अदा करना है । वैसे भी आम उपभोक्ता के यहां इससे अधिक खपत नहीं होती है । लेकिन बड़ी धूर्तता से मनमाने तरीके से बिजली रीडिंग दर्शाकर उपभोक्ताओं को भारी चपत लगाई जा रही है । भारतीय जनता पार्टी सन 2003 में बिजली सड़क पानी रोजगार के सवाल को लेकर सत्ता में आई थी . लेकिन दिसंबर 2018 में उसने जनता का विश्वास खो कर सत्ता गवां दी थी । मार्च 2020 में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार को षडयंत्रपूर्वक गिराकर फिर से मुख्यमंत्री बने शिवराज के द्वारा जनसमस्याओं को दूर करने के बजाय लोगों को धोखा दिया जा रहा है । सरकार को जनता के साथ धोखाधड़ी का खेल बंद करके उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना चाहिए । बिजली विभाग द्वारा आम बिजली उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे मनमानी बिलों को तत्काल प्रभाव से सही किया जाना चाहिए । उपभोक्ताओं को सब्सिडी से वंचित रखने के लिए गलत मीटर रीडिंग के गंदे खेल से शिवराज सरकार को बाज आना चाहिए ।





