एजेंडे में नहीं था स्लॉटर हाउस संचालन का प्रस्ताव
तीन अफसर संदेह के दायरे में
धर्मेंद्र पैगवार
भोपाल। राजधानी में प्राइवेट कंपनी को स्लॉटर हाउस संचालन की अनुमति के आदेश पर महापौर परिषद के सदस्यों ने ही सवाल उठा दिए हैं। एमआईसी कि जिस बैठक का हवाला देकर असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़े की कंपनी को आधुनिक स्लॉटरहाउस संचालन की अनुमति दी गई थी उस एजेंडे में संचालन का प्रस्ताव ही नहीं था। इसमें सिर्फ निर्माण की समय अवधि बढ़ाने की बात कही गई थी।
नगर निगम की देखरेख में पीपीपी मोड में बने स्लॉटर हाउस में गाय काटने के मामले में भोपाल से लेकर पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन होरहे हैं। इस पूरे मामले की पड़ताल की गई तो सामने आया है कि लाइव स्टॉक कंपनी भोपाल को 20 साल तक स्लॉटर हाउस संचालक की अनुमति पर्दे के पीछे से दी गई है। इसमें महापौर परिषद को भी अंधेरे में रखा गया है। मामला सामने आने के बाद महापौर मालती राय ने बयान दिया था कि महापौर परिषद की बैठक में संचालन की अनुमति दी गई है। हकीकत इससे पूरी तरह अलग है। 24 अक्टूबर 2025 को 10 सदस्यों वाली महापौर परिषद की कि बैठक का हवाला दिया जा रहा है उसके एजेंडे में स्लॉटर हाउस के संचालन की अनुमति देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। एजेंडे में कुल सात विषय थे जिसमें छठे नंबर पर जिंसी स्थित माडर्न स्लाटर हाउस के कार्य को पूर्ण करने के लिए 8 अक्टूबर 2025 तक की समय वृद्धि दिए जाने का प्रस्ताव था।
निगम की स्वच्छ भारत मिशन शाखा के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग के हस्ताक्षर से एक प्रस्ताव एमआईसी की स्वीकृति के लिए भेजा गया। इसमें स्लॉटर हाउस निर्माण संबंधी कार्य के लिए बिना पेनल्टी के इसकी अवधि 8 अक्टूबर 2025 तक बढ़ाने और स्लॉटर हाउस को
20 साल की अवधि के लिए संचालन और संधारण की अनुमति देने का प्रस्ताव था। इस पर अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और तत्कालीन निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण के बाद महापौर परिषद की अध्यक्ष महापौर मालती राय ने 24 अक्टूबर 2025 को स्वीकृति दे दी। लेकिन बैठक के एजेंडे में संचालन का उल्लेख जानबूझकर छिपाया गया।
महापौर परिषद की बैठक का एजेंडा और इस संबंध में तैयार किए गए प्रस्ताव की कॉपी प्रजातंत्र के पास उपलब्ध है। इसमें जल्दबाजी इतनी थी कि एमआईसी संकल्प के बाद 24 अक्टूबर को ही यह फाइल आयुक्त कार्यालय पहुंचा दी गई। आयुक्त संस्कृति जैन ने भी अगले ही दिन 25 अक्टूबर को इसे आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिया।
एमआईसी सदस्य बोले संचालन का प्रस्ताव ही नहीं था
स्लॉटर हाउस में गाय काटने के बाद जो राजनीतिक बवाल हुआ है उससे सभी बड़े नेता सन्न हैं। पूरे प्रदेश में हो रही छीछालेदार के बाद अब महापौर परिषद के सदस्यों ने चुप्पी तोड़ी है। सदस्यों का कहना है कि बैठक के एजेंडे में माडर्न स्लाटर हाउस के संचालन की अनुमति देने का कोई प्रस्ताव ही नहीं था। एजेंडा में सिर्फ क्रमांक 6 पर इसके निर्माण की समय अवधि बढ़ाने का जिक्र था। 20 साल के लिए संचालन की अनुमति देने और स्लॉटर हाउस चालू करने पर तो चर्चा ही नहीं हुई।
भाजपा के जिला अध्यक्ष रविंद्र यति भी परिषद के सदस्य हैं। उन्होंने कहा की बैठक में संचालन का प्रस्ताव नहीं आया था तो आदेश कैसे हो गया ?
महापौर परिषद के ही वरिष्ठ सदस्य मनोज राठौर, राजेश हिंगोरानी, जितेंद्र शुक्ला, जगदीश यादव, अशोक वाणी, आनंद अग्रवाल आदि ने भी साफ तौर पर कहा कि एमआईसी में संचालन को लेकर तो कोई चर्चा ही नहीं हुई।
वरिष्ठ सदस्य जगदीश यादव ने कहा कि पर्दे के पीछे से यह खेल किया गया है। इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से भी शिकायत की है। उनका आरोप है कि स्लॉटर हाउस के मामले में अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग की भूमिका की जांच होना चाहिए। इस मामले में तत्कालीन अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और प्रभारी कार्यपालन यंत्री आर के त्रिवेदी की भूमिका भी संदिग्ध है।
पर्दे के पीछे से किसका खेल ?
जब महापौर परिषद की बैठक के एजेंडे में स्लॉटरहाउस संचालन की अनुमति देने का प्रस्ताव नहीं था तो इसका आदेश कैसे तैयार हुआ ? इस सवाल का जवाब नगर निगम से लेकर वल्लभ भवन और भाजपा मुख्यालय तक ढूंढा जा रहा है। इसके पीछे कौन सी ताकत थी ? जब पूर्व की भाजपा शासित दो निगम परिषद माडर्न स्लाटर हाउस के प्रस्ताव को खारिज कर चुकी थी तो मौजूदा निगम परिषद ने जुलाई 2022 में सत्ता संभालने के बाद पूर्व प्रशासक के आदेश को खारिज क्यों नहीं किया ? इस सवाल का भी नगर निगम के जिम्मेदारों के पास कोई जवाब नहीं है।
क्या कहती है महापौर
महापौर मालती राय ने कहा कि महापौर परिषद की बैठक में एजेंडा शॉर्ट में ही बनता है। इसमें समय वृद्धि का जिक्र था। एजेंडे पर कमिश्नर ब्रीफिंग करता है कि डिटेल क्याहै ? उसके बाद जो संकल्प लगता है वह हमने नोट शीट में लगा कर भेजा है। उन्होंने कहा कि पीपीपी मोड पर मॉडर्न स्लॉटर हाउस संचालन का प्रस्ताव प्रशासक कार्यकाल में बना था। हमने सिर्फ विभाग से प्राप्त प्रस्ताव पर संकल्प दिया है।
यह पूछे जाने पर कि जब जुलाई 2022 में निगम परिषद का गठन हो गया था और पूर्व की दो निगम परिषद इसे खारिज कर चुकी थी तो आपके नेतृत्व वाली महापौर परिषद ने इसे खारिज क्यों नहीं किया ? इस पर महापौर श्रीमती राय ने कहा कि यदि कमिश्नर प्रस्ताव देते तो हम उसे खारिज कर देते। इस सवाल पर कि यह फैसला तो राजनीतिक नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों को लेना चाहिए ? उन्होंने कहा जब हमारी परिषद बनी थी तब स्लॉटर हाउस का बहुत काम हो चुका था। यह जानकारी हम लोगों को बहुत देर से मिली।





