इंदौर में पोहा-उसल पोहा का इंदौरियों को चस्का लगानेवाले”प्रशांत उपहार गृह” के संस्थापक
अनिलकुमार धडवईवाले , इंदौर
इंदौर में विभिन्न क्षेत्रों में कल्पना से परे विपरीत हालातों से जूझते हुए अपनी अटूट लगन ,आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से शहर के मराठी समाज के जिन प्रेणादायी शख्सियतों ने अपना एक अलग वजूद बनाया था। साथ ही इंदौर का नाम देशभर रोशन किया था। उस फेहरिस्त में एक नाम है स्व. पुरुषोत्तम जोशी। जो सभी समाजजनों अण्णा जोशी इस आत्मिय संबोधन से ही ज्यादा पहचाने जाते थे।
इस शहर में होटेल व्यवसाय की शुरुवात और उसे विकसित करने का श्रेय स्वर्गिय केशवराव पुराणिक, स्व. दामू अण्णा घुघरे और स्व. शेकदार को ही जाता है। इन व्यक्तियों ने उस जमाने मे होटल व्यवसाय शुरू किया था। जब मराठी समाज मे यह अच्छी बात नही मानी जाती थी। उन्होंने अपनी सूझबूझ और कल्पनाशीलता से
इस व्यवसाय को आगे बढाया। स्वल्पाहार और भोजन के संम्बंध में आम नागरिकों को- बाहर से आनेवाले मुसाफिरों की समस्याओं – असुविधाओं को मद्देनजर रखते हुए उम्दा व्यवस्था की उपवास के दिनों को ध्यान में रखकर उपवास के खाद्य पदार्थो का प्रचलन शुरू किया था। जिससे लोगों को काफी सुविधा मिली। प्रशांत उपहार के पहले राष्ट्रीय भोजनालय शुरू किया था।व्यवसाय के पिछे सिर्फ धन अर्जित करना ही अत्यंत संवेदनशील- समाजसेवी स्व. अण्णा का मक्सद नही था। बल्कि आम नागरिकों को स्वल्पाहार-भोजन संबंधी सुविधा उपलब्ध कराना और जरूरतमंदों को रोजगार दिलाना भी था। जिसमे वे सफल रहे। सैकडों लोगों की जिंदगी उन्होंने संवारी – बनाई है। उस जमाने में 60-65 साल पहले उनके व्यवसाय में कोई 50 स्थायी और 40 के करीब अस्थाई कर्मचारी थे। जिन्हें वे परिवार के सदस्य के भांति रखते थे।
स्व.अण्णा का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के एक छोटेसे अविकसित गांव निजामपुर में हुआ था।
परिवार की माली हालात बहुत खस्ता थे। उनके पिताजी पण्डिताई करके छह सदस्यीय परिवार का गुजर बसर करते थे। अण्णा की माताजी के निधन पश्चात अण्णा को फूफाजी स्व. केशवराव पुराणिक फटेहाल स्थिति में इंदौर ले आये थे। तब अण्णा आठ वर्ष के थे। यहां आने के बाद अण्णा ने होटल में नौकरी करने के साथ पढ़ाई जारी रखी। मेट्रिक के बाद पढ़ाई छोड दी। मन मे होटल व्यवसाय शुरू करने की ठानी और 1949 में बड़ी हिम्मत से सिर्फ आठ सौ रुपयों की लागत से जेलरोड पर प्रशांत उपहार गृह की शुरुवात की। कुछ समय बाद अपने भाई दत्ता भैया को साथ लिया। टेस्टी पोहा- ऊसल पोहा- दही मिसळ से अल्पसमय में मशहूर हो गये। अपने सदा मुस्कुराते चेहरे
,सहज सरल- निराभिमानी नेचर और मिलनसारिता से लोकप्रिय हो गये थे। शहर की कई समाजिक संस्थाओं से जुड़े रहे। निस्वार्थ भाव से जनसेवा भी करते रहे। हालांकि 75 साल पहले जेलरोड पर शुरू किया गया प्रशांत उपहार गृह अस्तित्व विहीन हो चुका है। लेकिन आज भी इंदौर शहर में मेडिकल कॉलेज के सामने- यशवंत रोड और वैशाली नगर कॉर्नर पर दिपक-विजय-
विनोद और प्रशांत( गोटू
भैया) के साथ तिसरी पीढ़ी के युवा अंकुर -रोहित और श्रेयस जोशी प्रशांत उपहार गृह सुचारू ढंग से संचालित कर रहे है।
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#अनिलकुमार धडवईवाले , इंदौर / 88714 00338





