कहीं छींक से बाधा का इशारा मिलता है, तो कहीं सफलता, धन लाभ और स्वास्थ्य का.
छींक का आना आम सी बात है. हम सभी को रोजाना कई बार छींक आती है. छींक को लेकर हमारे समाज में कई तरह की मान्यताएं प्रचलन में हैं. अगर कहीं निकलते समय छींक आ जाएं तो लोग रुकने के लिए कह देते हैं. इसे अनहोनी से जोड़ दिया जाता है. हालांकि, विज्ञान में इसे शरीर की सामान्य प्रक्रिया मान लिया जाता है, लेकिन शकुन शास्त्र में इसको भविष्य के संकेतों से जोड़ा गया है.
दिलचस्प बात ये है कि हर एक छींक अशुभ नहीं होती, बल्कि सही समय और परिस्थिति में आई छींक शुभ फल भी दे सकती है. छींक हमेशा अशुभ नहीं मानी जाती है. शकुन शास्त्र में बताया गया है कि छींक का शुभ या अशुभ होना उसके समय, दिशा, संख्या और परिस्थिति पर तय है. कहीं छींक से बाधा का इशारा मिलता है, तो कहीं सफलता, धन लाभ और स्वास्थ्य का. इसलिए ये कहा जाता है कि हर छींक को नकरात्मक और अशुभ मानने के बजाय उसके संदर्भ को समझें. ऐसे में आइए जानते हैं छींक से जुड़े शुभ-अशुभ संकेत और उनसे जुड़ी मान्यताएं.
छींक आना कब होता है अशुभ?
शकुन शास्त्र के अनुसार, छींक सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाली घटनाओं का इशारा भी होती है. अगर घर से निकलते समय छींक आ जाए या सामने कोई छींक दे तो इसको कार्य में बाधा या असफलता का संकेत माना जाता है. ऐसे समय में कुछ देर रुककर निकलना और पानी पीना शुभ माना गया है. इसी तरह, दूध उबालते समय महिला को छींक आना अशुभ माना गया है. ये परिवार में किसी सदस्य की बीमारी की चेतावनी देती है.
अगर किसी बहस के दौरान छींक आती है, तो ये छींक मामला और बिगड़ने का इशारा देती है. वहीं, घर से बाहर निकलते समय कुत्ते की छींक किसी अज्ञात भय या विपत्ति का इशारा मानी जाती है. कहा जाता है कि ऐसे संकेतों को अनदेखा नहीं करना चाहिए.
छींक आना कब होता है शुभ?
वहीं अगर आप किसी शुभ और मांगलिक काम को करने के लिए निकल रहे हैं, और आपको छींक आ जाती है, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है. यह सफलता और आकस्मिक धन लाभ की ओर इशारा करता है. दवा लेते समय छींक आने का अर्थ होता है कि व्यक्ति जल्द सेहतमंद होने वाला है. वहीं बाजार में कोई वस्तु खरीदते समय छींक अगर छींक आ जाए तो ये भी बहुत शुभ होता है. यह भविष्य में उस वस्तु से सुख और लाभ मिलने का इशारा होता है.





