पूरी दुनिया में जिन देशों ने प्राथमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण का उद्देश्य हासिल किया वह सिर्फ समान शिक्षा प्रणाली से। फिर भी भारत में पहले 1968 में कोठारी आयोग की और बिहार में 2007 में मुचकुंद दूबे आयोग की सिफारिश होते हुए भी समान शिक्षा प्रणाली को लागू नहीं किया गया। सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने जन विकास शक्ति संगठन, कोशी नव निर्माण मंच, जन जागरण शक्ति संगठन के साथ मिलकर बिहार में समान शिक्षा प्रणाली को लागू कराने के लिए कर्पूरीग्राम, जिला समस्तीपुर से 6 जुलाई से एक पदयात्रा शुरू की है जो 10 जुलाई को जे.पी. निवास, कदम कुआं, पटना में समाप्त होगी।
कर्पूरीग्राम में गोखुल, कर्पूरी, फुलेश्वरी डिग्री कालेज से पदयात्रा शुरू हुई और कर्पूरी ठाकुर के भतीजे नित्यानंद ने कर्पूरी जी के पैतृक निवास पर यात्रा का स्वागत किया। पदयात्रा गांधी मूर्ति, ताजपुर, बहुआरा, बाजितपुर, इभैच में नुक्कड़ सभाएं करती हुई आगे बढ़ी। इसमें जन विकास शक्ति संगठन की महिल सदस्यों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। पदयात्रा में उपर्युक्त संगठनों के इलावा 6 जुलाई को पटना से धनंजय सिन्हा, आलोक कुमार व शशिकांत प्रसाद, राष्ट्र सेवा दल के शाहिद कमाल, सहरसा से प्रोफेसर अरमान खान, मधुबनी से प्रोफेसर जावेद अब्दुल्लाह शामिल हुए जबकि 8 जुलाई को पटना से उद्यमी नशूर अजमल व सामाजिक कार्यमकर्ता सर्फराज शामिल हुए।
पदयात्रा में पर्चा वितरण कर बिहार में समान शिक्षा प्रणाली को लागू कराने के महत्व के बारे में आम जन को बताया जा रहा है और जनता का व्यापक समर्थन पदयात्रा को मिल रहा है।
शिक्षा के बिना विकास सम्भव नहीं है। शिक्षा भी समाज के सभी तबके के बच्चों को मिलेगी तभी समाज का संतुलित विकास हो पाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि शिक्षा में निजीकरण की प्रक्रिया को रोक कर सभी बच्चों को एक गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार ले। ऐसा तभी सम्भव है जब समान शिक्षा प्रणाली को लागू किया जाए। यह समाज की आवश्यकता है और सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
पदयात्रा में आज महेन्द्र यादव, भागवत पंण्डित, इन्द्रजीत, दुखीलाल यादव, बबीता, अजय साहनी, पिंकी, फूलकुमारी, सुधा, राजो, गौतम यादव, आरती, रिंकी, अविरल अरमान, पवन, संतराम यादव, अशोक चैरसिया, शंकर सिंह, मीनाक्षी सिंह, संदीप पाण्डेय शामिल रहे।
*सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने बिहार में समान शिक्षा प्रणाली को लेकर निकाली पदयात्रा*





