भोपाल
नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस के सामने आदिवासी वोट बैंक को साधे रखने की चुनौती है। यही वजह है कि आदिवासी बाहुल्य जिलों की इसकी कमान प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक ने अपने हाथों ले ली है। पिछले दशक तक आदिवासी बीजेपी का वोट बैंक था, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में बड़ा फेरबदल हुआ और कांग्रेस ने प्रदेश की आदिवासी 47 में से 31 सीटें जीत कर चौका दिया था। इससे पहले लगभग इतनी ही सीटें बीजेपी को मिलती आ रही थी। यही वजह है कि वासनिक 28 से 30 जनवरी तक मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया व शहडोल के दौर पर रहेंगे। इस दौरान वे इन जिलों उम्मीदवारों का चयन करने से पहले क्षेत्रीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। वासनिक 28 दिसंबर को मंडला ओर डिंडौरी, 29 दिसंबर को अनूपपुर व शहडोल व 30 दिसंबर को उमरिया में बैठकें करेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव के साथ आगामी विधानसभा की तैयारी के मद्देनजर आदिवासी जिलों के लिए प्लान तैयार किया गया है। यही वजह है कि पिछले माह प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने आदिवासी जिलों के विधायकों, जिला अध्यक्षों सहित अन्य प्रदाधिकारियों की बैठक ली थी। इस बैठक में पूर्व सांसद व पूर्व विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था। बैठक में निर्णय लिया गया था कि पार्टी इस साल ट्राइबल डॉक्यूमेंट भी जारी करेगी। जिसमें कांग्रेस की सरकार बनने पर आदिवासियों के लिए लायी जाने वाली योजनाओं के बारे में बताया जाएगा।
इसलिये है कांग्रेस का आदिवासियों पर फोकस
मध्य प्रदेश के कुल जनसंख्या का लगभग 21% वोटर्स आदिवासी हैं। आने वाले नागरीय निकाय और पंचायत चुनाव में आदिवासी वोटर्स का चुनाव जीतने के महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। वहीं 2018 के विधानसभा में जिस तरह से आदिवास बाहुल्य क्षेत्रो में कांग्रेस को सफलता मिली है, उसे पार्टी बरकरार रखना चाहती है।
47 में से 31 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा
मध्य प्रदेश में 47 आदिवासी विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 47 में से 31 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उसके बाद कांग्रेस ने एक आदिवासी विधानसभा सीट झाबुआ उप-चुनाव में भी जीती थी। वर्तमान में कांग्रेस पास 31 आदिवासी विधायक है, क्योंकि महिला आदिवासी विधायक सुमित्रा देवी कस्डकर बीजेपी में शामिल हो गई हैं।





