| जात धरम के झगड़े छोडो़, समता ममता की बात करो, बहुत रह लिए अलग-थलग, मिलने जुलने की बात करो, हिंसा के पुजारी ठहरे वो, तुम अमन-चैन की बात करो, ठहरे वो अमीरों के चाकर…! तुम मेहनतकश की बात करो, लूटा और खसोटा जन को, अब तो जन की बात करो, बहुत पी लिया लहू हमारा, अब हिसाब की बात करो, हड़पतें हैं जो मेहनत को, उनको हड़पने की बात करो, बेनूर सुबह के हामी वो, तुम सुर्ख सुबह की बात करो, हीरे मोती परबत सागर, सारी बहारों की बात करो, इक खेत नहीं इक देश नहीं, सारी दुनिया की बात करो, सारे ताने बाने को बदलो, खुद भी बदलने की बात करो, हारे थके, आधे अधूरे नहीं, पूरे इंकलाब की बात करो, मुनेश त्यागी,एडवोकेट, मेरठ सिविल कोर्ट मेरठ,संपर्क-9837151641 संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण ‘,मोबाईल नम्बर 9910629632, |
ठहरे वो अमीरों के चाकर….! तुम मेहनतकश की बात करो…





