अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

चरण-दर-चरण

Share

शशिकांत गुप्ते

पहला चरण हो गया। हरएक चरण के बाद विश्लेषकों के द्वारा अनुमान लगाए जातें हैं। जितने भी चरण होना है।वह हो जाने दो।
नाई नाई कितने बाल सब सामने आजाएँगे।
धनबल,बाहुबल,वाकचातुर्यबल,वादों और दावों का बल, रैलियों में की गई घोषणाओं का बल सब स्पष्ट दिखाई देगा।
अंतिम चरण के बाद मतों की गणना की प्रक्रिया पूर्ण होने पर नतीजे सामने आजाएँगे। देश के आमजन की यही अभिलाषा है कि,अंतिम चरण के मतदान के बाद,जो भी जीते उसके चरण शुभ होना चाहिए?
यह लोकोक्ति चरितार्थ नहीं होनी चाहिए।
जहां जहां पांव पड़े संतन की तहं तहं होवे बंटाधार
आमजन ने हाल ही में इस लोकोक्ति को चरितार्थ हुए देखा है,और इसके दुष्परिणाम भुगत भी रहा है।
आमजन को मूलभूत समस्याओं से तो निज़ात मिली नहीं उल्टा समस्याओं ने विकराल रूप धारण कर लिया।
आश्चर्यजनक बात तो यह है कि, विकराल हो रही समस्याओं को सहर्ष सहन करने वालों की भी कोई कमी नहीं है।इनलोगों की गिनती भक्तों में होती है।
ये सभी भक्त,भक्ति के भाव में लीन होकर स्तुतिगान गातें है।
तेरे महंगाई से भी प्यार,तेरे जुमलों से भी प्यार, झूठे वादों से भी प्यार, तुम जो भी कहोगे सरकार
हम विश्वास कर लेंगे।
सन 2014 के शुरुआत में पचास वर्ष तक राज करने का दावा किया गया था। भक्तों की तपस्या को देखते हुए अब सौ साल तक राज करने की उम्मीद जाग गई है।
इस संदर्भ में मेरे व्यंग्यकार मित्र द्वारा प्रस्तुत सन 1967 प्रदर्शित फ़िल्म एन इवनिंग इन पेरिस के गीत की पैरोड़ी प्रांसगिक लगती है। इस गीत को लिखा है गीतकार हसरत जयपुरीजी ने

अजी ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा
ऐसा बहुमत बार बार कहाँ मिलेगा
आओ जनता को दिखलाते हैं
जुमलों पर विश्वास करने वालो
देखों देखों देखों सिर्फ देखों
देखो ये स्वयंभु राष्ट्रवादियों की टोली मीठी मीठी जिनकी बोली
क्या क्या स्वांग रचाए हैं
वादें मुकर कर करतें हैं ये आँख मिचौली
झूठे वादों से दामन भर लो, मर जाओगे विश्वास कर लो
कल का सपना किस ने देखा इन पर आज विश्वास कर लो

आश्चर्य तब होता है जब भक्तों द्वारा हर किसी ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरे को चाणक्य की उपमा दी जाती है।
चाणक्य आचार्य था। मतलब शिक्षक था। शिक्षक सृजन कर्ता होता है। चाणक्य ने बालक चंद्रगुप्त में गुण देखकर उसे राजा बनाया। चाणक्य स्वयं राजा नहीं बना। चाणक्य की नीति जनहित के लिए थी।
बहरहाल मुख्यमुद्दा है।
चरण-दर- चरण मतदान हो रहा है, चुनाव की प्रक्रिया के चलते होता रहेगा।
आमजन की अभिलाषा पूर्ण होनी चाहिए।
एक लोकोक्ति का स्मरण हमेशा करते रहना चाहिए, चौबेजी छब्बे जी बनने गए और दुबेजी होकर लौट आए। ऐसा न हो।
यह कहावत याद रखना चाहिए।
अब पछताए क्या होत, जब चिड़िया चुग गई खेत

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें