सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में आज पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि देश में ई-कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल प्रबंधन के लिए ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 लागू किए गए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी हैं और इनके तहत 106 प्रकार के इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संग्रह, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान की व्यवस्था की गई है, जिनमें छोड़े गए मोबाइल फोन, कंप्यूटर और यूपीएस सिस्टम शामिल हैं।
ई-कचरे का अनुमानित उत्पादन
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, देश में वर्ष 2023-24 में 12,54,286.55 टन और 2024-25 में 13,97,955.59 टन ई-कचरा उत्पन्न हुआ। इसके प्रबंधन के लिए निर्माताओं, उत्पादकों, रिफर्बिशरों और पुनर्चक्रणकर्ताओं का सीपीसीबी के ऑनलाइन ई-अपशिष्ट पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है।
मंत्री ने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य न केवल ई-कचरे का सुरक्षित और पर्यावरणीय दृष्टि से अनुकूल निपटान सुनिश्चित करना है, बल्कि चक्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देना है, जिससे संसाधनों का पुन: उपयोग हो सके और प्रदूषण घटे। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को अनौपचारिक क्षेत्र की ई-कचरा गतिविधियों की जांच, उन्हें औपचारिक क्षेत्र में लाने, निरीक्षण और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सुंदरबन में मैंग्रोव क्षेत्र में एक दशक में 22.16 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने जानकारी दी कि भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2013 और ISFR 2023 के अनुसार पश्चिम बंगाल में सुंदरबन सहित कुल मैंग्रोव कवर 2,097 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2,119.16 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इस प्रकार पिछले दशक में 22.16 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मिष्टी और कैम्पा-एमजीएनआरईजीएस अभिसरण जैसी राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं के अंतर्गत वनीकरण और पर्यावरण-बहाली के प्रयासों का परिणाम है। इसके अलावा, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचनाओं जैसे नियामक उपायों ने विनाशकारी गतिविधियों पर रोक लगाने और प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केंद्र की प्रमुख संरक्षण पहलों में ‘मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों का संरक्षण और प्रबंधन’ योजना एवं मिष्टी कार्यक्रम का देशभर के तटीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में क्रियान्वयन, एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (ICZM) परियोजनाओं के तहत मैंग्रोव वनरोपण, लवणीय तटबंधों को सुदृढ़ करना और वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा देना तथा ग्रीन इंडिया मिशन के तहत पर्यावरण पुनर्स्थापना, तथा सुंदरबन टाइगर रिजर्व में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत रॉयल बंगाल टाइगर संरक्षण कार्य – जिसमें शिकार-रोधी शिविर, आवास सुधार, कैमरा ट्रैप और उपग्रह टेलीमेट्री आधारित निगरानी शामिल है।
सुंदरबन जीवमंडल के संरक्षण के लिए एक व्यापक प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है, जिसमें जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रतिरोधक क्षमता और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान होगा। इसमें—वनीकरण और पुनर्वनीकरण के जरिए मैंग्रोव क्षेत्र का विस्तार, पूर्व चेतावनी प्रणालियों और जलवायु-प्रतिरोधी ढाँचे को मजबूत करना, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMC) के माध्यम से स्थानीय समुदायों को पर्यावरण-विकास और मैंग्रोव प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी देना।
सुंदरबन मैंग्रोव इकोसिस्टम न केवल रॉयल बंगाल टाइगर का प्रमुख आवास है, बल्कि यह चक्रवातों से सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय आजीविका को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।





