सत्यप्रकाश दुबे
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों एक गहरी आंतरिक कलह चल रही है, जो पार्टी की एकता और उसकी साख के लिए खतरे की घंटी बन चुकी है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता, जो आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, लगातार उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह आंतरिक संघर्ष पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का कारण बन रहा है और विपक्षी पार्टी भाजपा को कांग्रेस पर हमले करने के भरपूर मौके मिल रहे हैं। यह स्थिति कांग्रेस के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है, क्योंकि इससे न केवल पार्टी की जनता के बीच छवि खराब हो रही है, बल्कि आदिवासी समाज भी इस संघर्ष के कारण आहत हो रहा है।
बैज के नेतृत्व में जो उम्मीदें और बदलाव की बातें हो रही थीं, वे अब एक आंतरिक कलह की वजह से सवालों के घेरे में आ गई हैं। दीपक बैज का नेतृत्व छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। बैज एक आदिवासी नेता हैं और आदिवासी समुदाय में उनका एक खास स्थान है। उन्होंने पार्टी को एक नई दिशा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जो पार्टी की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते थे। बैज के नेतृत्व में कांग्रेस ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में सफलता हासिल करने के लिए भरसक प्रयास किए। इसके अलावा, उन्होंने पार्टी की जमीनी स्तर पर उपस्थिति को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं बनाई, जिनमें निष्कासित नेताओं को वापस पार्टी में शामिल करना भी शामिल था।
यह कदम हालांकि कुछ नेताओं के लिए समस्या का कारण बन गया, क्योंकि कुछ नेता इसे अपनी सत्ता के लिए खतरा मानते थे। पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने दीपक बैज पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें नगरीय निकाय चुनावों में पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप प्रमुख है। जुनेजा का कहना था कि पैसा खुदा से कम नहीं, और उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पैसे लेकर टिकट दिया था, वे अब पार्टी में कैसे वापस आ गए। जुनेजा के इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी को और हवा दी है। बैज ने हालांकि अपने कार्यकाल में निष्कासित नेताओं को वापस पार्टी में शामिल किया था, जिसमें रायपुर के नेता अजीत कुकरेजा की वापसी भी शामिल थी। कुकरेजा की वापसी के बाद यह मुद्दा और भी गर्मा गया है, क्योंकि जुनेजा और अन्य विरोधी नेता इसे बैज की कमजोरी के तौर पर देख रहे हैं।
जुनेजा की नाराजगी इस बात से है कि बैज ने उन नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है जिन्होंने पार्टी के हितों के खिलाफ काम किया था। यह आरोप कि बैज ने पैसे लेकर नेताओं की वापसी कराई है, कांग्रेस के लिए एक नकारात्मक संदेश भेज सकता है। इस आरोप ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को और बढ़ावा दिया है और पार्टी की छवि को और नुकसान पहुँचाया है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों गुटबाजी की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। दीपक बैज, जो पार्टी की छवि को सुधारने और उसे मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे, कुछ नेताओं के लिए अप्रिय बन गए हैं। बैज ने पार्टी में ऐसे नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, जिन्होंने पार्टी के आंतरिक हितों के खिलाफ काम किया या जिनकी छवि पार्टी को नुकसान पहुंचा रही थी। बैज का मानना है कि कांग्रेस को एक नई दिशा की आवश्यकता है, और इसके लिए उन्होंने कई नेताओं से निपटने की कोशिश की है, जिनकी नीयत और कार्यशैली कांग्रेस के हित में नहीं थी। बैज ने अपने कार्यकाल में पार्टी की छवि सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन कुछ नेताओं को यह बदलाव रास नहीं आ रहा। उनका मानना है कि बैज का नेतृत्व और उनकी साफ-सुथरी छवि उनके खिलाफ काम कर रही है, और वे इसके खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हैं। पार्टी के भीतर गुटबाजी और अंदरूनी संघर्ष ने बैज को इस स्थिति में ला दिया है कि उन्हें अपनी नीतियों और कदमों को लेकर सफाई देनी पड़ रही है।
इस संघर्ष के कारण पार्टी की ताकत में कमी आई है और इसे गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। टीएस सिंहदेव, जो छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक प्रमुख नेता हैं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए बेताब हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वे बैज के खिलाफ माहौल बनाने में लगे हुए हैं। सिंहदेव का यह दबाव पार्टी के भीतर कई कश्मकश की स्थिति पैदा कर रहा है, क्योंकि कुछ वरिष्ठ नेता उनके पक्ष में हैं और मीडिया के जरिए उनका समर्थन कर रहे हैं। सिंहदेव की स्थिति को लेकर कांग्रेस में एक गहरी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बैज के विरोधी उनका मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए सक्रिय हैं, लेकिन पार्टी की एकता बनाए रखने के लिए बैज और सिंहदेव के बीच संवाद और समझौते की आवश्यकता है।
सिंहदेव का दबाव कांग्रेस के भीतर एक गंभीर समस्या पैदा कर रहा है, क्योंकि इससे पार्टी की एकता और मजबूत नेतृत्व पर असर पड़ सकता है। इस आंतरिक संघर्ष को समाप्त करने के लिए बैज और सिंहदेव को एक साथ मिलकर पार्टी की दिशा तय करनी होगी, ताकि एकजुट होकर पार्टी आगामी चुनावों की तैयारी कर सके। इन आंतरिक कलहों और गुटबाजी से पार्टी की छवि पर गंभीर असर पड़ रहा है। जब पार्टी के भीतर इस तरह की उठापटक होती है, तो इसका सीधा असर जनता पर भी पड़ता है। आम लोग यह महसूस करने लगे हैं कि कांग्रेस में कोई दिशा नहीं है और नेता अपनी-अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए पार्टी के हितों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे न केवल कांग्रेस की राजनीतिक साख पर असर पड़ता है, बल्कि जनता के बीच भी इसका नकारात्मक संदेश जाता है। इसके अलावा, भाजपा जैसी विपक्षी पार्टी को कांग्रेस पर हमले करने के भरपूर मौके मिलते हैं। भाजपा नेता इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए सक्रिय हैं और हर मौके पर कांग्रेस के आंतरिक विवादों को उजागर कर रहे हैं। इससे कांग्रेस को एक ओर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि भाजपा ने इस स्थिति को अपनी राजनीतिक लाभ के रूप में लिया है और चुनावी माहौल में इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। दीपक बैज आदिवासी समुदाय से आते हैं, और उनका नेतृत्व आदिवासी समाज के लिए महत्वपूर्ण है। जब पार्टी के भीतर उनके खिलाफ बयानबाजी की जाती है और उनका अपमान किया जाता है, तो यह समाज भी आहत होता है। आदिवासी समाज को यह महसूस हो रहा है कि उनके नेता के खिलाफ की जा रही गुटबाजी न केवल पार्टी के लिए हानिकारक है, बल्कि समाज के लिए भी अपमानजनक है।
आदिवासी समाज के लोग बैज के साथ खड़े हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर चल रहे संघर्ष ने इस समुदाय में भी असंतोष पैदा किया है। इस संघर्ष के कारण आदिवासी समाज में यह धारणा बन रही है कि कांग्रेस में उनके नेताओं को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है, जो पार्टी की छवि और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। बैज को यह महसूस करना होगा कि उनका नेतृत्व न केवल पार्टी की साख के लिए, बल्कि आदिवासी समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है।यदि कांग्रेस को इस आंतरिक कलह से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला, तो इसके परिणाम आगामी चुनावों में देखे जा सकते हैं। कांग्रेस को चाहिए कि वह अपनी आंतरिक संघर्षों को समाप्त करे और सभी नेताओं को पार्टी की एकता बनाए रखने के लिए एकजुट करे।
इसके लिए दीपक बैज को अपने विरोधियों से संवाद करना होगा और उन्हें पार्टी की प्राथमिकताओं और लक्ष्यों के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। यदि कांग्रेस ने इस समय स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास नहीं किया, तो आने वाले चुनावों में उसका परिणाम बहुत ही नकारात्मक हो सकता है। बैज को यह समझना होगा कि पार्टी की एकता ही उसकी सफलता की कुंजी है, और इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कांग्रेस के भीतर गहराती आंतरिक कलह ने पार्टी के नेतृत्व के लिए संकट खड़ा कर दिया है। दीपक बैज का कार्यकाल और उनके विरोधियों की गतिविधियाँ पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। बैज को अपने विरोधियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे, लेकिन उन्हें पार्टी की एकता को बनाए रखते हुए यह काम करना होगा। यदि कांग्रेस को आगामी चुनावों में सफलता चाहिए, तो उसे इस आंतरिक संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में गंभीर कदम उठाने होंगे।
(यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है)