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स्किन डिजीज के लिए सक्सेसफुल होम रेमेडी

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डॉ. गीता शुक्ला (दिल्ली)

  _250 ग्राम सरसो का तेल लेकर लोहे की कढ़ाई मे चढ़ाकर आग पर रख दे। जब तेल खूब उबलने लगे तो उसमें 50 ग्राम नीम की कोमल कोपल (नई पत्तियाँ ) डाल दे। कोपलो (पत्तियों ) के काले पड़ते ही कहाडी को तुरंत नीचे उतार दे अन्यथा तेल मे आग लगकर तेल जल सकता है। ठंडा होने पर तेल को छानकर बोतल मे भर ले।_
    दिन मे चार बार एगजिमा वाले हिस्से पर इस तेल को लगाए । कुछ ही दिनों मे एजजिमा नष्ट हो जाएगा ।एक वर्ष लगातार लगाते रहने से यह रोग दोबारा कभी न होगा।

सहायक उपचार :
चना चून को नून बिन चौसठ दिन जो खाय ।
दाद, खाज और सेंहुआ जरा मूर सो जाय।

विकल्प :
4 ग्राम चिरायता और चार ग्राम कुटकी लेकर शीशे या चीनी के पात्र मे 125 ग्राम पानी डालकर रात को भिगो दे और ऊपर से ढँककर रख दे ।सुबह मे रात को भिगोया हुआ चिरायता और कुटकी का पानी निथार कर कपड़े से छानकर पी ले और पीने के बाद 3-4 घंटे तक कुछ नही खाए और उसी समय अगले दिन के लिए उसी पात्र मे 125 ग्राम पानी और डाल दे।

   इस प्रकार चार दिन तक वही चिरायता और कुटकी काम देंगे ।इसके बाद इसको फेंककर नया चार चार ग्राम चिरायता और कुटकी डालकर भिगोये और चार चार दिन के बाद बदलते रहे ।यह पानी (कड़वी चाय ) लगातार दो चार सप्ताह पीने से एगजिमा फोडे फुंसी आदि चर्म रोग नष्ट हो जाते है मुँहासे निकलना बंद होते है और रक्त साफ होता है।

विशेष :
1) एगजिमा मे इस कडवे पानी को पीने के अलावा इस पानी से एगजिमा वाले स्थान को धोया करे ।
2) इस प्रयोग से एगजिमा और रक्त दोष के अतिरिक्त हड्डी की टीबी , पेट के रोग , अपरस (psoriasis ) और कैंसर आदि बहुत सी बीमारिया दूर होती है ।इन कठिन बीमारीयो मे आवश्यकतानुसार एक दो महीनों तक चिरायता और कुटकी का पानी पीना चाहिए ।रोजाना यह पानी न पी सकने वाले यदि इसे सप्ताह मे एक या दो बार ले तो भी काफी फायदा होता है।छोटे बच्चो को दो चम्मच की मात्रा मे यह पानी पिलाना चाहिए ।बच्चो के लिए कडवाहट कम करने के लिए इस कड़वी दवा को पिलाने के बाद ऊपर से एक दो घूट सादा पानी पिला सकते है।
3) इस प्रयोग से psoriasis (सोरायसिस ) जैसा कठिन चर्म रोग दूर होता है ।इस रोग मे शरीर की किसी किसी जगह का चमडा लाल होकर फूल उठता है और सूखी और कड़ी उछाल निकल आती है जो मछली के बाह्य चर्म जैसी दिखाई देती है ।जहाँ जहाँ चकते (पैचेज ) होते है वहाँ बाल नही होते परंतु जैसे जैसे पैचेज ठीक होते है वहाँ बाल उगना शुरू हो जाता है जो कि बीमारी के ठीक होने के लक्षण है ।चिरायता और कुटकी के लगातार एक दो महीने के प्रयोग से यह लाइलाज बीमारी भी ठीक हो जाती है ।
4) हर प्रकार के जवर मे विशेषकर बसे हुए (पुराने ) जेवर मे यह प्रयोग अत्यंत लाभकारी है।

अपथ्य :
खटाई (खासकर इमली , अमचूर की खटाई ) भारी , तले , तेज मिर्चीदार मसालेदार खाना तथा नशीले पदार्थो का सेवन न करे ।नमक का सेवन भी कम से कम करे ।यदि नमक का परहेज संभव न हो तो नमक के स्थान पर सैंधा नमक का प्रयोग करे कयूकि इ। नमक परिवर्तन से भी कई चर्म रोगों से मुक्ति मालना संभव है।
गर्भवती एवं रजसवला महिलाओं को यह पानी नही पीना चाहिए।
मन तन की किसी भी बीमारी के लिए निःशुल्क मार्गदर्शन व्हाट्सप्प 9997741245 पर अपना परिचय और रोग का डिटेल देकर प्राप्त किया जा सकता है.
(लेखिका चेतना विकास मिशन से संवद्ध मुख्य चिकित्सिका हैं.)

Ramswaroop Mantri

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