हाउसिंग सेक्टर की स्थिति 2020 में काफी बुरी रही, ऐसे में नए वित्त वर्ष में रिकवरी को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ी हैं। जानकारों का कहना है कि सरकार को बजट में मकानों की नई मांग निकालने पर जोर देना चाहिए। उनके सुझावों में किफायती आवास योजना का दायरा बढ़ाना और होम लोन के प्रिंसिपल के भुगतान पर अलग छूट देना शामिल हैं।
अभी 45 लाख रुपए तक के घर किफायती आवास योजना में
मोतीलाल ओसवाल रियल एस्टेट के डायरेक्टर और सीईओ शरद मित्तल का कहना है कि रहने के मकसद से मकान खरीदने वालों को बढ़ावा देना होगा। इसके लिए किफायती आवास योजना के दायरे में लाए जाने वाले मकानों की कीमत की सीमा को 60 लाख रुपए किया जा सकता है। अभी यह 45 लाख रुपये है।
होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर 1.5 लाख रुपए की अलग छूट मिले
नाइट फ्रैंक इंडिया के CMD शिशिर बैजल का मानना है कि मकानों की मांग बढ़ाने में होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट पर 80C के अंदर छूट से खास फायदा नहीं हुआ है। अगर इसके लिए अलग से 150,000 रुपए की कर कटौती का लाभ दिया जाए तो मकानों की खरीद बढ़ सकती है।
क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम 31 मार्च 2023 तक बढ़ाई जाए
बैजल का कहना है कि क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) से किफायती मकानों की मांग बढ़ी है। इस योजना की समय सीमा को दो साल बढ़ाकर 31 मार्च 2023 तक किया जाना चाहिए। बड़े शहरों में मकान महंगे होने के चलते सब्सिडी की अग्रिम राशि इनकम के हिसाब से 3.5 लाख रुपये तक बढ़ाई जानी चाहिए जो अभी 2.3-2.67 लाख रुपये के बीच है।
दूसरा घर खरीदने पर भी इनकम टैक्स में छूट का प्रावधान हो
नरेडको (महाराष्ट्र) की सीनियर वाइस-प्रेजिडेंट और नाहर ग्रुप की चेयरपर्सन मंजू याग्निक के मुताबिक सोशल डिस्टेंसिंग के चलते सेकंड होम्स की अच्छी मांग है। इस पर आयकर में छूट दिए जाने से रियल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। कंस्ट्रक्शन जल्दी पूरा करने के लिए एक ही जगह सारी मंजूरी देने यानी सिंगल-विंडो क्लिअरेंस की सुविधा दी जानी चाहिए।
पिछले बजट में हाउसिंग के लिए क्या था
पीएम आवास योजना के लिए आवंटन लगभग 10% बढ़ा था। सरकार ने इसके लिए 27,500 लाख करोड़ रुपए दिए थे। किफायती आवास योजना में ब्याज भुगतान पर 1.5 लाख रुपए अतिरिक्त छूट का प्रावधान पहले 31 मार्च 2020 तक के लिए था। इसे 31 मार्च 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया था।





