विगत दिनों हुई एक घटना से मन आहत हो गया जब एक 55 वर्षीय तीर्थ यात्री रात के 2 बजे लगभग 3 किलोमीटर चलने के बाद चक्कर खाकर गिर पड़े। स्थानीय निवासी, सहयात्री और आसपास के डोली वाले किसी तरह उन्हे 45-55 मिनट में नीचे ला पाये, किसी प्रकार एक आटो मिला और फिर उन बेहोश यात्री को आटो में चढाने में भी लगभग 15 मिनट लग गए। सोचिये ! इस पूरे समय अगर आक्सीजन, एम्बुलेंस या डाक्टर वहां उपलब्ध होते तो उस यात्री की जान बचाई जा सकती थी।
अब एक सवाल आप सभी से है कि करोडों का चढ़ावा मंदिरों और धर्मशालाओं में आता है लेकिन फिर भी 24 × 7 एक भी एम्बुलेंस वहां पर नही है ।
सोने से सज्जित कलश और संगमरमर के तोरण द्वार तो बनते जा रहे हैं लेकिन क्या हम एक इमर्जेंसी मेडिकल सेंटर भी नही बनवा सकते हैं ?
आप समाज की प्रसिद्ध संस्था के प्रतिष्ठित श्रेष्ठीजन हो, उपरोक्त घटना की पुनरावृति न हो अत: इस निवेदन पत्र के माध्यम से हम आपसे यह अपेक्षा करते हैं कि : –
श्री सम्मेद शिखर जी ( मधुबन) और सम्पूर्ण यात्रा मार्ग पर 4 से 5 मेडिकल यूनिट की व्यवस्था तत्काल की जाए।
तीर्थ क्षेत्र में स्थित हर धर्मशाला, कोठी और भवन में आक्सीजन, स्टेचर और जीवनरक्षक दवाईयों की व्यवस्था आवश्यक रूप से हो
हर सुविधाओं से युक्त एक अस्पताल का निर्माण भी तुरंत होना चाहिए।
हर तीर्थ यात्री अपनी सुविधानुसार दिये जा रहे दान या चुकाये जा रहे किराए का 1% का दान ” मेडिकल फंड” में भी करें ताकि सरकार और कमेटियों पर भी बोझ न पडें और मेडिकल सुविधाओं में भी वृद्धि हो सके।
डाक्टर संदीप नारद
260 AA, तुलसी नगर
सरस्वती मंदिर के पास
इंदौर 452010





