डॉ. नीलम ज्योति
_प्रेम और सेक्स के मामले में भी स्त्री~दमन क्यों? क्योंकि उसमे 08 गुना अधिक सेक्स-क्षमता होती है। उसका शरीर पूरी तरह कामाविष्ट हो जाए तो वह एक ही रात में 3 से 5 बार की मांग करेगी। नामर्द के लिए उसे शांत करना असंभव हो जाएगा। ध्यान रहे बलात्कार या बच्चे पैदा करने की क्षमता मर्दानगी नहीं है। मर्दानगी है स्त्री को ऑर्गेज्मिक आनंद से बेदुध करने की क्षमता।_
उसका दमन करते रहना 'पुरूष' की मज़बूरी होती है और पहले मानसिक व उससे कारण शारीरिक रोगी बनना या तृप्ति के लिए अन्य ऑप्सन अपनाना 'स्त्री' की मजबूरी। अतृप्ति पीड़ा देती है। सेक्स से उसे घिन आने लगती है। फिर भी खुद का ज़िस्म मुर्दे की तरह पुरुष को सौंपना पड़ता है।
_अधिकांस स्त्रियां जीवन भर सुपर स्टेज के अनुभव से वंचित रह जाती हैं। वे बच्चों को जन्म देती हैं, पुरुष को तृप्त करती हैं, यह और बात है।_
उनकी यह बुनियादी जैविक जरूरत ध्यानिष्ठ बनकर पूरी की जा सकती है, लेकिन लोगों में न सीखने की ललक है, न कुछ दिन का समय निकालने की मानसिकता है, न धैर्य।
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