रोज़ी रोटी अधिकार अभियान ई-श्रम पोर्टल के तहत पंजीकृत प्रवासी/असंगठित श्रमिकों को राशन कार्ड प्रदान करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करता है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल, 2023 को एमए 94/2022 में ‘प्रवासी मजदूरों की समस्या और दुख’ के एक आदेश में प्रवासी श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। ई-श्रम पोर्टल पर 28.60 करोड़ प्रवासी/असंगठित श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनमें से 20.63 करोड़ राशन कार्ड डेटा पर पंजीकृत हैं। यह आदेश सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को एनएफएसए के तहत उन 8 करोड़ लोगों को राशन कार्ड जारी करने का निर्देश देता है, जो ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं, लेकिन उनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। राशन कार्ड के बिना बड़ी संख्या में प्रवासी/असंगठित मज़दूर या उसके परिवार के सदस्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये हैं. एनएफएसए को नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के अनुसार कवरेज को अद्यतन करने की आवश्यकता है परन्तु 2021 की जनगणना को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है और इसके प्रकाशन के संबंध में कोई तिथि अधिसूचित नहीं की गई है, जिसके कारण 10 करोड़ से अधिक लोगों को राशन कार्ड के अभाव में खाद्य सुरक्षा तंत्र के दायरे से बाहर रखा गया है।
*रोज़ी रोटी अधिकार अभियान मांग करता है:*
*सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 8 करोड़ प्रवासी/असंगठित क्षेत्र के कामगार जो ई-श्रम पर पंजीकृत हैं, लेकिन उनके पास राशन कार्ड नहीं है उनके राशन कार्ड जारी करने की कवायद तुरंत शुरु करनी चाहिए।
*सरकारों को सभी प्रवासी/असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए पीडीएस तक पहुंच को सार्वभौमिक बनाना चाहिए और किसी भी आय मानदंड सहित बहुसंख्यक और जटिल समावेशन/बहिष्करण वाले मानदंडों को लागू किए बिना राशन कार्ड प्रदान करना चाहिए। जटिल मानदंडों को अपनाने से लोग बाहर हो जाते हैं क्योंकि वे अक्सर निवास प्रमाण, आधार कार्ड, बिजली बिल आदि सहित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ होते हैं। ये व्यक्ति समाज के सबसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में से हैं और इन्हें एनएफएसए के दायरे में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए।





